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इससे पहले कि क्रिकेट का रोम-रोम बिक जाए, कहीं से थोड़ी गैरत खरीदे आईसीसी

फिक्सिंग पर हाल ही में सामने आई चीजों पर अगर आईसीसी गौर नहीं करती है तो यह क्रिकेट का नुकसान है

Updated On: Oct 22, 2018 01:17 PM IST

Jasvinder Sidhu Jasvinder Sidhu

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इससे पहले कि क्रिकेट का रोम-रोम बिक जाए, कहीं से थोड़ी गैरत खरीदे आईसीसी
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क्रिकेट पर भरोसा करके इस खेल को दीवानगी से साथ देखने वालों के लिए एक सीन है. एक गुप्त कैमरा है. कैमरे के पीछे खोजी पत्रकार है और सामने इस खेल को भ्रष्ट करने वाला तथाकथित बुकी. बुकी के दावे, जो मैदान पर सही साबित हो रहे हैं. उसके फोन की रिकॉर्डिंग है. यह बुकी दावा करता है कि इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच अगले दिन होने वाले वनडे मैच में फलां ओवर मेडेन होगा.

बुकी की जुबां सरस्वती की वाणी जैसी साबित होती है. रविवार को प्रसारित हुई अल जज़ीरा की खोजी रिपोर्ट में यह महज एक किस्सा है. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले आठ साल के दौरान 15 से ज्यादा मैच फिक्स हुए और इसमें कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर शामिल थे.

वैसे रिपोर्ट में यह दावा नहीं किया गया है कि टीमें ही बिकी हुई थीं. पूरी रिपोर्ट स्पॉट फिक्सिंग के इर्द-गिर्द ही घुमती है. रिपोर्ट में बुकीज के दावे और उन दावों को सच होता देखने के बाद अल-जज़ीरा की जांच को खारिज कर देना खालिस मूर्खता होगी.

आईसीसी रिपोर्ट  पर नहीं दिखा रही गंभीरता

यह भी शर्मनाक है कि इस बार भी खेल को चलाने वाली इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) फिर से ऐसी रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लेने की गलती कर रही है. इसका एक बड़ा कारण भी हो सकता है... क्योंकि आईसीसी की एंटी करप्शन यूनिट का करोड़ों का बजट है. लेकिऩ वह क्या करती है, उसकी जवाबदेही नहीं है.

साल 2000 की मैच फिक्सिंग हो या पाकिस्तानी क्रिकेटरों के इंग्लैंड में नो बॉल लाखों पाउंड में बेच देने का सनसनीखेज खुलासा, सब मीडिया या विभिन्न देशों की पुलिस की जांच के बाद ही सामने आया. हां, इतना जरूर है कि हाल ही में उसने पिच फिक्सिंग के मामलों पर कार्रवाई जरूर की है.

यह यूनिट मानने का तैयार ही नहीं कि इस खेल में भ्रष्टाचार है. मानने के बाद उस पर दवाब लाजिमी है, क्योंकि फिर पूछा जाएगा कि आखिर यूनिट के जासूस आखिर क्या कर रहे हैं!

आईसीसी के एंटी करप्शन और सेफ्टी यूनिट के अध्यक्ष रॉनी   Head of the International Cricket Council's anti-corruption and safety unit (ACSU) Sir Ronnie Flanagan (R) speaks to media in Lahore May 18, 2017. - Britain's National Crime Agency provided the initial intelligence that led to a major spot-fixing scandal in the Pakistan Super League, a leading official from world cricket's governing body said. Sir Ronnie Flanagan, head of the International Cricket Council's anti-corruption and safety unit (ACSU) was speaking to reporters in Pakistan's Lahore after testifying in a case against opening batsman Sharjeel Khan, who has been provisionally suspended by his board since the scandal erupted in February. (Photo by ARIF ALI / AFP)

आईसीसी के एंटी करप्शन और सेफ्टी यूनिट के अध्यक्ष रॉनी

अल-जज़ीरा की मई में आई पहली जांच में एक कथित फिक्सर मुनावर का नाम सामने आया. आईसीसी ने उसके बारे में क्या किया! आईसीसी ने उसका फोटो जारी किया और आम जनता से उसके बारे में बताने की गुजारिश की. एक हॉटलाइन भी जारी की गई जिस पर कोई भी उसके बारे में जानकारी दे सकता था.

असल में वह पूरी प्रक्रिया पर्दा डालने वाली थी. अल-जज़ीरा की रिपोर्ट में उस शख्स के बारे में इतनी जानकारी थी कि उसे गंभीरता से लेकर जांच शुरू की जा सकती थी.

जिन फिक्सरों का नाम सामने आया है उनके बारे में पुलिस को भी जानकारी है. लेकिन आईसीसी ने भारत की पुलिस से किसी प्रकार की आधिकारिक जानकारी की अपील नहीं की. आम आदमी को क्या पड़ी है जो दाऊद इब्राहिम जैसे कथित आतंकवादी के किसी आदमी के खिलाफ पंगा ले.

बेशक उसका नाम गुप्त भी रखा जाए. लेकिन भारत ऐसा देश नहीं है जहां लोग ऐसे लफड़ों में पड़ना पसंद करते हैं. शर्मनाक यह भी है कि पिछले दो महीनों में आईसीसी खुद हॉन्गकॉन्ग के दो क्रिकेटरों और श्रीलंका के पूर्व दिग्गज सनत जयसूर्या को दागी घोषित कर चुका है.

आसान है स्पॉट फिक्सिंग करना

साफ है कि क्रिकेट में जैसा दिख रहा है, वैसा नहीं है और भ्रष्टाचार इस खेल पर पहले से ज्यादा हावी दिख रहा है. यहां एक और बात साफ कर देना जरूरी है. स्पॉट फिक्सिंग के आरोपों को इसलिए भी गलत मानना गलती है, क्योंकि यह पूरी तरह से संभव है.

उदहारण के तौर पर अगर एक बल्लेबाज ने तय कर लिया कि उसे फलां ओवर मेडन खेलना है या फिर एक बॉलर वादा कर दे कि वह फलां बॉल वाइड फेंकेगा या फिर एक कप्तान मान जाए कि वह 10 से 20 ओवर के ब्लॉक में 40-50 रन विपक्षी टीम को देने की कोशिश करेगा तो परिणामों पर इसका असर नहीं पड़ेगा.

वजह यह है कि बल्लेबाज एक खास ओवर मेडन खेलने का बाद अगले में बॉलर का धो दे या फिर पिटाई खाने के बाद अगले ओवरों में किफायती रहे. कप्तान दस ओवर का ब्लॉक बेचने के बाद अगले में 10 रन भी नहीं जाने दे तो उसकी टीम के लिए नतीजे पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला

Members of the Delhi Youth Congress stand beside a placard denouncing corruption in cricket prior to performing Yagna, a Hindu ritual offering, to ward off the evil of cricket match fixing, near parliament in New Delhi 18 April 2000.  The International Cricket Council (ICC) is expected to hold an emergency meeting at Lord's in the next two weeks following a call for action over corruption in the game, after South African skipper Hansie Cronje was sacked for accepting money from an Indian businessman. (ELECTRONIC IMAGE) AFP PHOTO/JOHN MACDOUGALL (Photo by JOHN MACDOUGALL / AFP)

इस सब में किसी को शक होने का कोई केस ही नहीं है. इसलिए अगर आईसीसी को यह गणित समझ नहीं आ रहा तो यह खेल के लिए काफी बुरा है, क्योंकि कोई कार्रवाई नहीं हुई तो क्रिकेटरों के लिए सूचनाएं बेचना कुबेर लूटने जैसा होगा.

टॉस जीत कर फलां टीम क्या करने वाली है, गेंदबाजी में पहला बदलाव क्या होगा, कौन सा निचले क्रम का बल्लेबाज ऊपर खेलने आने वाला है या ऑन साइड की फील्डिंग लेकर फलां बॉलर लेग साइड पर एक-दो बॉल डालेगा, ऐसी न जाने कितनी ही इनसाइड इन्फोर्मेंशंस हैं जिसका दाम देने को बुकी पैसा देने का तैयार हैं.

यह सब नहीं रुका तो मामला इससे भी आगे बढ़ेगा और आईसीसी कुछ नहीं कर पाएगी.

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