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गालियां देने वाले क्रिकेटरों को पकड़ने के लिए पिच पर ओवर टाइम करेगा नन्हा जासूस

डबलिन कांफ्रेंस में फैसला किया गया है कि ब्रॉडकास्टर को मैच के दौरान किसी भी समय स्टंप माइक को चालू रखने की इजाजत होगी

Updated On: Jul 04, 2018 05:54 PM IST

Jasvinder Sidhu Jasvinder Sidhu

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गालियां देने वाले क्रिकेटरों को पकड़ने के लिए पिच पर ओवर टाइम करेगा नन्हा जासूस

यह साल का सातवां महीना है और अब तक इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) अंतरराष्ट्रीय मैचों में नियमों की अनदेखी, अनुशासनहीनता, विपक्षी खिलाड़ियों के खिलाफ भद्दी, उकसाने वाली भाषा के इस्तेमाल और खेल की भावना का अपमान करने के लिए 36 बार सजा घोषित कर चुकी है.

इसमें से 11 मामले मैच के दौरान गंदी और गालियों वाली भाषा इस्तेमाल करने के हैं. क्रिकेट जब वजूद में आया तो यह भद्रजनों का खेल था. कई दशकों तक रहा भी.

समय बदला, प्रतिस्पर्धा बढ़ी, मैच की ड्रेस रंगीन हो गई, पैसा आया, इस सब के साथ खिलाड़ियों का मैदान पर बर्ताव शर्मिंदगी के हर स्तर को भी छूने लगा.

हालत यह है कि इस पर लगाम लगाने के लिए खेल का चलाने वाली संस्था आईसीसी ने अपनी सालाना कांफ्रेंस में इस मुद्दे पर विचार करने लिए काफी लंबा समय लिया.

स्टंप माइक की मदद से लगेगी लगाम

दो दिन पहले आयरलैंड के डबलिन शहर में आईसीसी की 75वीं सालाना खत्म हुई. कई प्रस्ताव पारित हुए. जिनमें एक यह भी था कि मैदान पर खिलाड़ियों की बददिमागियों पर लगाम लगाने के लिए कई और कदम उठाने की जरूरत है.

हाल के सालों में क्रिकेटरों पर विपक्षी टीम से सदस्यों के खिलाफ गाली गलौच, रंगभेदी टिप्पणियों और बदतमीजी के आरोप लगे हैं. लेकिन कई में सबूतों की कमी के कारण सजा नहीं मिल सकी.

डबलिन कांफ्रेंस में फैसला किया गया है कि ब्रॉडकास्टर को मैच के दौरान किसी भी समय स्टंप माइक को चालू रखने की इजाजत होगी. यानी अब स्टंप माइक का प्रसारण उस समय भी ऑन रखा जा सकेगा, जब मैच थमा हो यानी गेंदबाजी न हो रही हो.

स्टंप माइक से मिलेंगे सबूत!

बेशक स्टंप माइक देखने में छोटा है लेकिन अब इसका काम बड़ा हो गया है. अधिकतर मामलों में देखा गया है कि ओवर के बाद या खेल थमने की स्थिति में क्रिकेटरों में आपसी भिड़ंत होती है.

अभी तक नियम यह था कि माइक खेल के दौरान ही इस्तेमाल होता था, ताकि बैट से लगने वाले एज को पकड़ा जा सके. डेड बॉल के समय माइक से ऑडियो का प्रसारण नहीं होता था.

आईसीसी के कार्यकारी बोर्ड में इस नियम के पास हो जाने के बाद माइक पूरे मैच के दौरान खिलाड़ियों की मैदान पर होने वाली बातचीत का प्रसारण करेगा और उसकी रिकॉर्डिंग किसी विवाद होने की स्थिति में तीसरे अंपायर और आईसीसी के जांचकर्ता के लिए साक्ष्य का काम करेगी.

वैसे इस साल में भारतीय कप्तान विराट कोहली को जनवरी में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट मैच में खेल की भावना की अनदेखी करने के लिए अपनी फीस का 25 फीसदी बतौर सजा जमा करना पड़ा था.

कोहली ने अंपायर के फैसले पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए बॉल को मैदान पर पटक पर मारा था. इसी साल मई में रवींद्र जडेजा भी खेल की भावना से न खेलने के दोषी पाए गए और 50 फीसदी मैच फीस गंवा बैठे.

Virat Kohli

आईसीसी ने एक और बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है. हाल के सालों में अंपायर के फैसलों के खिलाफ खिलाड़ियों का विरोध बढ़ा है. इससे अंपायरों के आत्मविश्वास पर असर पड़ना लाजिमी है.

इस पर भी कांफ्रेंस में विचार किया गया. खिलाड़ियों के बदजुबानी और अनुशासन के मामलों में मैच रेफरी सजा तय करता है. लेकिन इससे पहले क्रिकेटरों को अपील का अधिकार है. लेकिन अब आईसीसी ने ऐसी अपील पर फीस लगाने का फैसला किया है. यानी खिलाड़ियों, कोचों और सपोर्ट स्टाफ को ऐसी अपील में जाने से पहले फीस जमा करनी पड़ेगी.

अगर क्रिकेटर अपील में बेदाग निकलता है तो यह फीस रिफंडेबल होगी. दोषी पाए जाने पर फीस का जब्त होना तय है.

 

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