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संडे स्पेशल: नॉन ग्लैमरस से ग्लैमर तक विकेट कीपर का सफर

ब्रैडमैन ने अपनी बेस्ट टीम में डॉन टैलोन को विकेट कीपर के तौर पर चुना था

Rajendra Dhodapkar Updated On: Mar 05, 2017 08:32 PM IST

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संडे स्पेशल: नॉन ग्लैमरस से ग्लैमर तक विकेट कीपर का सफर

एक बार सर डॉन ब्रैडमैन ने अपने एक ‘ऑल टाइम ग्रेट’ टीम चुनी थी. उसका एक महत्व भारतीयों की नजर में यह था कि अपने सचिन तेंदुलकर भी उसमें थे. सर डॉन की टीम में उन्हें मिलाकर सात ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी थे. उनमें डेनिस लिली को छोड़कर बाकी सब वे थे, जो उनके साथ और उनकी कप्तानी मे खेले थे.

ब्रैडमैन के मुताबिक बेस्ट विकेट कीपर थे टैलोन

उस टीम में विकेटकीपर थे डॉन टैलोन, जो ब्रैडमैन की अजेय टीम के सदस्य थे. द्वितीय महायुद्ध की वजह से कई साल तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्थगित रहा था. इसलिए क्रिकेट इतिहास को अक्सर युद्ध पूर्व और युद्ध के बाद के दौर मे बांट कर देखा जाता है. टैलोन का अंतरराष्ट्रीय करियर इसी वजह से युद्ध के बाद तीस साल की उम्र मे शुरू हो पाया. वे कुल जमा इक्कीस टेस्ट मैच खेल पाए. फिर भी  ब्रैडमैन समेत उनके कई समकालीन उन्हें सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर मानते हैं. उनकी तुलना उनके पूर्ववर्ती बर्ट ओल्डफील्ड से की जाती है, जो कुछ लोगों की नजर में महानतम विकेटकीपर थे.

ओल्डफील्ड और टैलोन दोनों के बारे मे यह कहा जाता है कि दोनों बिना किसी शोरशराबे और दिखावे के अपना काम करने वाले विकेटकीपर थे. दोनों की बल्लेबाजी भी बस ठीक ठाक ही थी. लेकिन ब्रैडमैन पुराने अंदाज के खिलाड़ी थे, जिनका माना था कि बल्लेबाज का काम रन बनाना है. गेंदबाज का काम विकेट लेना है और विकेटकीपर का काम विकेटकीपिंग करना है. इन सभी से अपना अपना काम ठीक से करने की उम्मीद करनी चाहिए, एक दूसरे का काम करने की नहीं.

अगर कोई गेंदबाज़ या विकेटकीपर कुछ बल्लेबाज़ी भी कर ले या बल्लेबाज़ गेंदबाजी भी कर ले तो यह बोनस है. इसलिए ब्रैडमैन ने विकेटकीपर चुनते हुए सिर्फ विकेटकीपिंग के बारे में सोचा. उसकी बल्लेबाज़ी के बारे मे नहीं. और उन्होंने एक ऐसे विकेटकीपर को चुना, जो टीम का बहुत ही काबिल और शांत किस्म का सदस्य था. ओल्डफील्ड के बारे में कहते हैं कि कि इतने संकोच थे कि वे अपने कैच और स्टंपिंग के बारे में ऐसे शर्मिंदा रहते थे, गोया उन्होंने बल्लेबाज को आउट करके उसके साथ अन्याय कर दिया हो.

गॉडफ्रे इवांस ने बदली विकेट कीपर की इमेज

विकेटकीपर की यह छवि बदली युद्ध के बाद आए अंग्रेज विकेटकीपर गॉडफ़्रे इवांस ने. इवांस ने विकेटकीपिंग को नया ग्लैमर दिया. इवांस विकेटकीपर के साथ शोमैन भी थे. वे अक्सर आम कैच पकड़ने मे भी ऐसी कलाबाजी खाते थे, जिससे वह कैच मुश्किल मालूम होता था. वे कैच पकड़ने के बाद गेंद को खूब ऊंचा उछाल कर जश्न मनाते थे.

लंबे चौड़े इवांस मे बहुत ऊर्जा थी. वे दिन की आखिरी गेंद तक उतने ही उत्साह और शक्ति से भरपूर लगते थे. टीम कितनी ही खराब हालत में हो, वे टीम का जोश भी बढ़ाने के लिए जोर-जोर से अपने साथियों को उत्साहित करते रहते थे. शायद इवांस ने ही विकेटकीपर के लिए टीम का उत्साह बढ़ाने की इस नई भूमिका का आगाज किया था, जिसे बाद के सारे विकेटकीपरों ने अपनाया, वे शायद पहले विकेटकीपर थे जो दर्शकों में इतने लोकप्रिय थे कि उन्हें देखने लोग मैदान पर आते थे,

इस शोमैनशिप की बुनियाद में मजबूत तकनीक और मेहनत थी. इवांस को क्रिकेट इतिहास के सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपरों में गिना जाता है. अपना पहला टेस्ट उन्होंने भारत के खिलाफ खेला था. वह टेस्ट बारिश की वजह से पूरा नहीं खेला जा सका था. भारत की एकमात्र पारी में इवांस ने एक बाई रन दिया था और इसकी चर्चा वे हमेशा खेद से करते रहते थे. परफेक्शन को लेकर उनका इस कदर आग्रह था. उनके नाम बाई रन न देने के कई रिकॉर्ड दर्ज हुए.

तेज गेंदबाज एरिक बेडसर के लिए वे हमेशा विकेट के पास खड़े होते थे. अक्सर वे अन्य तेज गेंदबाजों के लिए और नई गेंद होने पर भी आगे खड़े होते थे. उन्होंने कई बल्लेबाजों को तेज गेंदबाजों की गेंदों पर स्टंप भी किया. अपने अंदाज के मुताबिक वे धुआंधार बल्लेबाजी करते थे. लेकिन जरूरत पड़ने पर उन्होंने बहुत धीमी बल्लेबाज़ी करके टीम को हार से बचाया. बतौर एक लेखक के उनकी बल्लेबाजी में दो ही गियर थे, पहला और पांचवां.

bari kirmani

पाकिस्तान के वसीम बारी और भारत के सैयद किरमानी.

इवांस के बाद विकेटकीपर का कुछ नाटकीय या ग्लैमरस होना एक महत्वपूर्ण योग्यता मानी जाने लगी. अगर टीम के चयन के लिए दो विकेटकीपर उपलब्ध हों तो ज्यादा ग्लैमरस विकेटकीपर को तरजीह मिलने लगी. याद कीजिए, फ़ारूख इंजीनियर के खड़े कॉलर और बिलक्रीम वाले बाल,  सैयद किरमानी का घुटा सिर और बड़ी बड़ी मूंछें. धोनी का जलवा तो अभी हमारे सामने है. इंग्लैंड के विकेटकीपरों की बात हो तो एलन नॉट याद आते हैं. ऑस्ट्रेलिया में रॉडनी मार्श और एडम गिलक्रिस्ट, श्रीलंका के कुमार संगकारा सबसे लोकप्रिय खिलाड़ियों में रहे हैं.

भारत के मौजूदा विकेटकीपर ऋद्धिमान साहा पहली तरह के विकेटकीपर लगते हैं. वे तकनीकी रूप से बहुत मजबूत, लेकिन कम ग्लैमरस शैली के विकेटकीपर हैं. हालांकि बल्लेबज़ वे इवांस शैली के मालूम होते हैं. अब विकेटकीपर का अच्छा बल्लेबाज होना भी अनिवार्य शर्त है और विकेटकीपर कप्तान भी बनने लगे हैं, जैसा पहले नहीं होता था. जमाना बदला है और जो कभी टीम का खामोश पुर्जा होता था, वह उसकी चमकदार हेडलाइट बन गया है.

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