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कब और कैसे शुरू हुए बीसीसीआई के बुरे दिन!

आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग मामले के बाद मुश्किल में घिरा बीसीसीआई

Updated On: Jan 02, 2017 02:26 PM IST

Lakshya Sharma

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कब और कैसे शुरू हुए बीसीसीआई के बुरे दिन!

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई केस में चल रही सुनवाई में आज कठोर फैसला सुनाते हुए बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को पद से हटाया दिया है, इससे साथ ही कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि जो अधिकारी लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें नहीं मानेगा, उन्हें भी बीसीसीआई से जाना होगा. आपको बताते है कि ये मामला आखिरकार शुरू कब और कैसे हुआ.

आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग से हुई शुरुआत

साल 2013 बीसीसीआई के लिए किसी बुरे सपने की तरह रहा. इस साल आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग का मामला पूरे देश में सुर्खिया बटोरने लगा. दिल्ली पुलिस ने आईपीएल टीम राजस्थान रॉयल्स के तीन खिलाड़ियों को स्पॉट फिक्सिंग के आरोप में गिरफ्तार किया. कुछ समय बाद उस समय के बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के दामाद और उनकी आईपीएल टीम चेन्नई सुपरकिंग्स के सीईओ गुरुनाथ मयप्पन और विंदु दारा सिंह को भी इस आरोप में हिरासत में लिया गया. इस मामले ने तूल पकड़ा और ये मामला सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा. सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इसकी जांच के लिए जस्टिस मुकुल मुद्गल की अध्यक्षता में एक कमेटी बना दी. उस कमेटी ने साल 2014 में अपनी पहली रिपोर्ट भेजी.

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मुद्गल कमेटी की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट को लगा कि बीसीसीआई में सुधारों की सख्त जरुरत है. इसके लिए जनवरी 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व चीफ जस्टिस आर आरएम लोढ़ा के नेतृत्व में तीन सदस्यों की टीम गठित कर दी. 4 जनवरी 2016 को लोढ़ा कमेटी ने बीसीसीआई में सुधार के लिए कई अहम सिफारिशें रखी. बीसीसीआई ने कुछ सिफारिशें मान लीं, लेकिन कुछ सिफारिशें मानने से वह आनाकानी करने लगा. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कई बार बीसीसीआई को चेतावनी दी, लेकिन बोर्ड अपनी समस्या का ही रोना रोता रहा.

चलिए पहले आपको सिफारिशें बताते हैं जो लोढ़ा कमेटी ने की

9 सदस्यों वाली परिषद - लोढ़ा कमेटी ने सिफारिश की थी कि बीसीसीआई में 14 सदस्य वाली कार्यकारिणी कमेटी की जगह 9 सदस्य की परिषद बनाई जाए.

70 साल से अधिक वाले बीसीसीआई में ना रहें-  एक सिफारिश यह भी थी कि 70 साल से अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति बीसीसीआई या राज्य बोर्ड में किसी पद पर ना हो.

एक राज्य, एक संघ- कमेटी ने कहा कि किसी भी राज्य में सिर्फ एक ही संघ होना चाहिए और राज्य सिर्फ एक ही वोट दे सकता है. अगर किसी राज्य में दो संघ है तो वह रोटेशन के तहत वोट दें.

3 सदस्य की चयन समिति- लोढ़ा कमेटी में कहा गया कि टीम चयन के लिए 5 सदस्यों की जगह 3 सदस्य की चयन समिति बने. इसके साथ ही कोई मंत्री या सरकारी अधिकारी कार्यकारिणी में शामिल ना हो.

3 साल का कार्यकाल- कमेटी ने कहा कि एक अधिकारी एक बार में केवल 3 साल के लिए ही बीसीसीआई की कार्यकारिणी का सदस्य रहे और ज्यादा से ज्यादा 3 बार ही बीसीसीआई का चुनाव लड़े. इसके साथ ही लगातार दो बार कोई अधिकारी किसी भी पद पर नहीं रह सकता

आईपीएल- बीसीसीआई का अलग-अलग संचालन-  सिफारिश में कहा गया कि आईपीएल और बीसीसीआई की अलग अलग संचालन संस्था हो. इसके साथ ही आईपीएल और राष्ट्रीय कैलेंडर के बीच 15 दिन का अंतर हो.

सट्टेबाजी को वैधता-  लोढ़ा कमेटी ने देश में सट्टेबाजी को वैध करने की सिफारिश की. लेकिन कोई खिलाड़ी, प्रबंधक और अधिकारी सट्टबाजी का हिस्सा ना हो. इसके साथ ही स्पॉट फिक्सिंग और मैच फिक्सिंग को अपराध माना जाएगा.

एक व्यक्ति, एक पद- कमेटी में इस बात पर जोर दिया गया कि एक सदस्य सिर्फ एक पद पर ही रह सकता है, वह चाहे राज्य क्रिकेट बोर्ड के किसी समिति का हो या बीसीसीआई की किसी समिति का.

आरटीआई के दायरे में आए बीसीसीआई- लोढ़ा कमेटी ने सिफारिश की थी कि बीसीसीआई को आरटीआई के दायरे में लाया जाए. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह संसद का मामला है और इसे नहीं माना. इसके साथ ही खिलाड़ियों के हित के लिए एक संघ बनाया जाए और उसकी फंडिंग बीसीसीआई करे.

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