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सदी के महानायक के साथ बर्थडे साझा करने वाला भी क्या बनेगा बड़ा नायक?

टी20, वनडे और टेस्ट तीनों फॉरमेट में हार्दिक पांड्या ने किया है खुद को साबित

Updated On: Sep 23, 2017 09:09 AM IST

Neeraj Jha

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सदी के महानायक के साथ बर्थडे साझा करने वाला भी क्या बनेगा बड़ा नायक?

ये कहना बिलकुल गलत नहीं होगा कि भारतीय क्रिकेट को जिस ऑलराउंडर का कई सालों से इंतज़ार था, वो शायद अब मिल गया है. जी हां, हम बात कर रहे है हार्दिक पांड्या की. पांड्या क्रिकेट में नए जेनरेशन के लिए एक उदाहरण के तौर पर उभरे है, उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर आपके अंदर प्रतिभा और जुनून हो तो आप सभी तरह के प्रतिकूल परिस्थितियों पर काबू पा सकते है.

पांड्या एक बेहद ही प्रतिभाशाली क्रिकेटर हैं जबकि उनकी पृष्ठभूमि संघर्षमय रही है. उन्होंने कम समय में ही क्रिकेट की दुनिया में अपना एक अलग मुकाम बना लिया है. इतने का समय में ही कई मौजूदा और पूर्व खिलाड़ियों ने उन्हें आने वाले दिनों के बड़े खिलाड़ी का खिताब भी दे दिया है. उनकी मैदान पर मैदान के बाहर का जो व्यक्तित्व उभर कर आया है - उसने उन्हें सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली सरीखे खिलाड़ियों की श्रेणी में ला खड़ा कर दिया है. वो दिन भी दूर नहीं होगा शायद जब हार्दिक टीवी और अखबारों के ज्यादातर विज्ञापनों में दिखेंगे.

कामयाबी की कहानी

उनके आत्मविश्वास की एक बहुत ही दिलचस्प किस्सा बताता हूं. हमारे एक पत्रकार मित्र विमल कुमार जब बड़ौदा में इरफान पठान का इंटरव्यू कर मैदान से बाहर निकल रहे थे तो एक खिलाड़ी ने विमल से पूछा कि आप सिर्फ अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का ही इंटरव्यू करते है, कभी हमारे जैसे खिलाड़ियों को भी मौका तो दीजिए. वो हार्दिक पांड्या थे.

हार्दिक का जन्म सूरत में 11 अक्टूबर 1993 में हुआ था. इस तारीख का भारतीय इतिहास में एक खास स्थान है क्योंकि बॉलीवुड के सुपरस्टार और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का जन्म भी इसी दिन हुआ था. खैर, हार्दिक के पिता हिमांशु पांड्या एक कार फाइनेंसियल कंपनी चलाते थे. भाई क्रुणाल पंड्या खुद भी एक क्रिकेटर हैं. बचपन से ही दोनों भाइयों को क्रिकेट में बहुत रुचि थी. इसी रुचि को देखते हुए उनके पिता जी अपना सारा व्यवसाय छोड़ कर दोनों को लेकर बड़ौदा आ गए.

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क्रिकेट में उनका लगाव और उनकी फाइनेंसियल प्रॉब्लम को देखकर उनके ट्रेनर किरण मोरे ने उन्हें तीन साल तक बिना किसी शुल्क के पढ़ाया. पांड्या भाइयों की जुबानी - उन्होंने कई हफ्ते तो मैगी खाकर ही गुजार दिए. इस दौरान इरफान पठान और यूसुफ पठान ने भी उनकी काफी मदद की. इरफान ने तो उन्हें अपना बैट भी खेलने के लिए दिया था.

हार्दिक की पढाई में कोई खास रुचि नहीं थी और इसीलिए उन्होंने 9वीं में फेल होने के बाद पढ़ाई को अलविदा कह दिया. बड़ौदा क्रिकेट टीम के लिए 2013 से खेलना शुरू किया. पांड्या ने घरेलू क्रिकेट में कोई ज्यादा समय नहीं बिताया है. लेकिन 2013-14 मुश्ताक अली ट्रॉफी के दौरान उन्होंने बड़ौदा को जीत दिलाने में अहम रोल निभाया था. उसी दौरान मुंबई इंडियंस की कोर टीम की नजर उन पर पड़ी और उसके बाद जो हुआ, वो इतिहास है.

उन्होंने टी 20 क्रिकेट में अपनी शुरुआत की. 2015 में वह आईपीएल में मुंबई इंडियंस की ओर से खेले जिसमें उन्होंने 8 गेदों में 21 रन बनाए और तीन कैच भी पकड़े, जिसके वजह से मुंबई जीत गई. उनकी उस शानदार पारी को देखकर सचिन तेंदुलकर ने कहा कि हार्दिक 18 महीनों के अंदर इंडियन क्रिकेट टीम में शामिल हो जाएगा. वही हुआ भी, हार्दिक एक साल के अंदर ही भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल हो गए.

Mumbai Indians cricketer Hardik Pandya (L) and brother and teammate Mumbai Indians cricketer Krunal Pandya smile during the 2017 Indian Premier League (IPL) Twenty20 cricket match between Mumbai Indians and Sunrisers Hyderabad at Wankhede Stadium in Mumbai on April 12, 2017.  GETTYOUT /----IMAGE RESTRICTED TO EDITORIAL USE - STRICTLY NO COMMERCIAL USE----- / AFP PHOTO / INDRANIL MUKHERJEE / ----IMAGE RESTRICTED TO EDITORIAL USE - STRICTLY NO COMMERCIAL USE----- / GETTYOUT

2016 में आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप में उन्होंने मैच के आखिरी ओवर में दो महत्वपूर्ण विकेट लिए जिससे भारत 1 रन से जीत गया. 18 जून 2017 को पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल मैच में उन्होंने 43 गेंदों में 76 बनाए. लेकिन दुर्भाग्यवश तरीके से रन आउट हो गए, नहीं तो आज मैच का परिणाम कुछ और ही होता.

जिस रफ्तार से वो क्रिकेट खेल रहे ,थे उसी रफ्तार से उनका करियर भी भाग रहा था. जल्द ही उन्हें श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में मौका दिया गया. 3-0 से भारत ने ये सीरीज जीत ली. लेकिन इस सीरीज में हार्दिक ने जो प्रदर्शन किया उस से उन्होंने टेस्ट में भी अपनी जगह पक्की कर ली. उन्होंने एक ओवर में 26 रन बनाए और अपना पहला शतक भी जड़ दिया. इसी के साथ उन्होंने 2 सालों के भीतर ही तीनों ही फॉर्मेट में अपना स्थान बना लिया.

हरफनमौला खिलाड़ियों का इतिहास

क्रिकेट के इतिहास के पन्नों को अगर पलटा जाए तो यह बात कबूल करनी पड़ेगी कि हमारे देश में बहुत ऐसे खिलाड़ी नहीं हुए है, जिन्होंने बैटिंग और बॉलिंग दोनों ही में ऑलराउंड प्रदर्शन किया हो. अगर ऑलराउंडर की बात होगी तो सबसे पहले नाम आएगा वीनू मांकड का. वीनू अपने समय में सबसे ज्यादा व्यक्तिगत स्कोर करने वाले खिलाड़ी बने और साथ ही एक इनिंग्स में सबसे ज्यादा विकेट लेने का भी रिकॉर्ड उनके नाम रहा. 1952 में लॉर्ड्स का वो टेस्ट मैच कौन भूल सकता है जब वीनू मांकड ने पहली पारी में 72 और दूसरी में 184 रनों की पारी खेली थी. इसके अलावा पहली पारी में 5 विकेट भी लिए.

कपिल देव और मोहिंदर अमरनाथ ने 70 और 80 के दशक में जो कारनामा और बैट और बॉल के जरिए दिखाया था वो ऐतिहासिक है. ये कहना गलत नहीं होगा की 1983 वर्ल्ड कप में मिली जीत में दोनों के ऑलराउंड प्रदर्शन का बड़ा रोल रहा.

उसके बाद भी भारत को रवि शास्त्री, मनोज प्रभाकर, रोबिन सिंह सरीखे ऑलराउंडर का फायदा मिला, इन्होंने व्यक्तिगत प्रदर्शन से भारत को कई मैचों में जीत दिलाई. फिर कई सालों तक हरफनमौला खिलाडी की खोज जारी रही. आखिरकार 2003 में इरफान पठान के रूप में हिंदुस्तान को एक बेहतरीन बॉलिंग ऑलराउंडर मिला जिसे कोच ग्रेग चैपल ने बैटिंग ऑलराउंडर बनाने की कोशिश में उनका करियर ही खराब कर दिया.

उसके बाद रवींद्र जडेजा भी एक ऑलराउंडर के तौर पर उभरे. लेकिन वो बैट्समैन से ज्यादा एक बॉलर के रूप में सफल हुए. टेस्ट मैचों में रविचंद्रन आश्विन ने हाल फिलहाल में जडेजा को एक ऑलराउंडर के तौर पर काफी पीछे छोड़ दिया है.

इन खिलाड़ियों और हार्दिक के बीच जो सबसे बड़ा अंतर दिखता है, वो है हार्दिक का आत्मविश्वास और जूनून जो उन्होंने बड़े बड़े मैचों में दिखाया है. लोग उनकी तुलना हरफनमौला कपिल देव से कर रहे है - वजह साफ़ है की कपिल की तरह ही हार्दिक जीत के लिए जान लगा देने वाले खिलाड़ी हैं.

लंबी रेस का घोड़ा

पांड्या के खेल की बदौलत उनकी फैन फॉलोइंग तेजी से बढ़ रही है. भारत में क्रिकेटर की सफलता का पैमाना तब आंका जाता है जब उनका नाम बॉलीवुड के सितारों के साथ जोड़ा जाता है. हार्दिक यहां भी लिस्ट में ऊपर ही हैं. मीडिया में उनका नाम परिणीति चोपड़ा और शिबानी दांडेकर जैसी बॉलीवुड के अभिनेत्रियों से पहले ही जोड़ा जा चूका है. हार्दिक में महान खिलाड़ी बनने के सारे गुण मौजूद हैं और उन्होंने समय समय पर इसे साबित भी किया है. लेकिन उनकी सबसे बड़ी परीक्षा होगी कि वो कैसे अपने इस सफलता को संभालते हैं. अगर वो अपनी सफलता को अच्छी तरह हैंडल कर लेते है फिर तो सही मायने में वो लंबी रेस के घोड़े है.

(लेखक करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. इस आलेख में प्रकाशित विचार उनके अपने हैं. आलेख के विचारों में फर्स्टपोस्ट की सहमति होना जरूरी नहीं है.)

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