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द्रविड़ की कहानी, ‘सबसे बड़े फैन’ की जुबानी

'भारत की दीवार' राहुल द्रविड़ के 44वें जन्मदिन पर विशेष

Pallavi Rebbapragada Pallavi Rebbapragada Updated On: Jan 11, 2017 06:18 PM IST

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द्रविड़ की कहानी, ‘सबसे बड़े फैन’ की जुबानी

हैदराबाद की बात है. 2005 यानी आज से 11 साल पहले की. मैं स्कूल में थी. किसी भी आम क्रिकेट फैन की तरह दिल में ख्वाहिश लिए गई थी. मुझे राहुल द्रविड़ से मिलना था. मेरे हाथ में जर्सी थी, जिसके पीछे पांच नंबर लिखा था. जी हां, राहुल द्रविड़ की जर्सी. एक ऑटोग्राफ की खाली किताब और एक बचकानी कविता थी, जो द्रविड़ के लिए लिखी थी.

हांफते हुए मैं उनके पास गई. बिना सांस लिए उन्हें मैंने ये बताया की मैं उनकी सबसे बड़ी फैन हूं. ये भी बताया कि जब ब्रेट ली की गेंद उनके कान पर लगी थी, तो ऐसा लगा, जैसे मुझे ही चोट लगी है. मैं काफी देर तक मायूस रहीं थीं.

द्रविड़ मुस्कुराए. मुस्कान में वही शालीनता थी, जिसके लिए वो जाने जाते हैं. वही शालीनता, जिसने अनगिनत लड़कियों को उनका फैन बनाया था. उन्होंने कहा, ‘क्रिकेट से प्यार करो, क्रिकेटर से नहीं.’ उन्होंने कहा कि इस खेल की मदद से जिंदगी को समझो. इसके उतार-चढ़ाव और हार-जीत के बीच भी कैसे जिंदगी को संभाला जाता है, उसे सीखो.

KUALA LUMUR, MALAYSIA - JUNE 27: Indian cricket player, Rahul Dravid attends a clinic with local young cricket players as part of the 2012 ICC Annual Conference at Kinrara Oval on June 27, 2012 in Kuala Lumpur, Malaysia. (Photo by Arep Kulal/Getty Images)

मुझे उनकी बातें हमेशा याद रहीं. आज भी याद आ रही हैं, जब उनका जन्मदिन है. जब देश और दुनिया आईपीएल की बेशुमार दौलत, ग्लैमर और नशे में चकाचौंध हैं, ऐसा लगता है कि द्रविड़ की वो सादगी कहीं गुम सी हो गई है.

सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट के भगवान का दर्जा दिया जाता है. लेकिन इस बीच हमें राहुल शरद द्रविड़ को भी याद करना चाहिए. रिटायरमेंट के पांच साल बाद भी उन्हें याद करते हैं, तो कमिटमेंट याद आता है. त्याग याद आता है. एक-एक ईंट जोड़कर वो भारतीय क्रिकेट की दीवार कैसे बने, यह याद आता है.

द्रविड़ को सहवाग ने कैसे किया खास अंदाज में विश

द्रविड़ की आज 44वीं सालगिरह है.  उन्होंने 1996 में पहली बार भारत की टेस्ट कैप पहनी थी. इंग्लैंड के लॉर्ड्स स्टेडियम पर उतरे इस नए खिलाड़ी ने अपने 16 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत 95 रन की चमकीली पारी से की. कुछ ही महीने बाद साउथ अफ्रीका के खिलाफ 148 रन बना कर उन्होंने क्रिकेट पंडितों का ध्यान अपनी तकनीक की तरफ आकर्षित किया. उसके बाद का पूरा करियर ऐसा रहा, जिस पर आपको एक भी दाग नहीं मिलेगा. उनके 164 टेस्ट और 344 वन डे मैचों के करियर में उन्हें हमेशा आदर्श क्रिकेटर समझा आ गया. आज भी जब कमिटमेंट की बात होती है, द्रविड़ का नाम सबसे पहले आता है.

कलकत्ता के ईडन गार्डन में खेली गयी वो पारी कौन भूल सकता है, जिसने भारतीय क्रिकेट को बदल दिया. जिसमे लक्ष्मण और द्रविड़ के बीच ऐतिहासिक साझेदारी हुई थी. उसको पिछले साल आईसीसी ने 50 साल की सबसे बेहतरीन पारी करार किया था.

उस दिन, जब द्रविड़ मैदान में उतरे तो भारत चार विकेट खो कर 232 के स्कोर पर हताश खड़ा था. द्रविड़ ने 180 रन बना कर भारतीय टीम की जीत और आत्मविश्वास का नया दौर शुरू किया.

NOTTINGHAM, ENGLAND - JULY 07: Rahul Dravid of India looks on during a India nets session at Trent Bridge on July 7, 2014 in Nottingham, England. (Photo by Matthew Lewis/Getty Images)

द्रविड़ के डेब्यू के कुछ साल बाद उन्हें पेप्सी का ब्रांड एम्बेसडर बनाया गया. इस कोला कंपनी की एक कैंपेन ‘जेनरेशन-नेक्स्ट’ के विज्ञापन में जवान द्रविड़ बैटिंग करते दिखाए गए. पीछे से दो लडकियां उन्हें प्रैक्टिस करते देख रही थीं और ये कह रही थीं कि ‘नया है, बाद में स्टाइल मारने लगेगा’. फिर कुछ लडकियां उनके इर्द-गिर्द नाचती भी दिखाई गईं. वो द्रविड़ के छुपे रंगीले मिजाज की कल्पना करती रहीं और द्रविड़ अपने करम में मगन रहे.

दरअसल, ऐसे ही हैं राहुल द्रविड़. उनका पूरा करियर इसी तरह की इमेज के इर्द-गिर्द रहा. मस्ती-मजाक पर आधारित एक रियलिटी शो ‘बकरा’  पर एक लड़की पत्रकार के रूप में उनका इंटरव्यू लेने आयी. फिर उसने उनकी फैन बनके अपने प्यार का इज़हार किया और अपने पिताजी को शादी की बात करने के लिए उनसे मिलाने ले आयी. घबराए हुए द्रविड़ ने उसे पढ़ाई करने का सुझाव दिया. वो प्रोग्राम देखकर भी मुझे उनसे अपनी पहली मुलाकात याद आई थी, जब उन्होंने क्रिकेटर नहीं, क्रिकेट से सीखने के लिए कहा था.

मैं उनसे दोबारा मिली तो पत्रकार बन चुकी थी. साल था 2012, लेकिन उनमें कोई बदलाव नहीं नजर आया. एक इवेंट के मौके पर वो दिल्ली आए थे. उनका वही शांत स्वभाव देखने को मिला।

इन दिनों  द्रविड़ भारत ए टीम  के कोच हैं. युवाओं को क्रिकेट सिखा रहे हैं. इस काम के लिए उनसे बेहतर कोई नहीं हो सकता था. अब भी वो खामोशी के साथ अपना काम कर रहे हैं, जैसा अपने प्लेइंग करियर में किया था.

न ही उन पर कोई बड़ी ब्लॉक बस्टर फिल्म बनी है. न उनका नाम किसी बड़ी अभिनेत्री के साथ कॉन्ट्रोवर्सी में जकड़ा गया. इस खिलाड़ी ने सिर्फ अपना कर्म करने पर ध्यान दिया है. मेरी तरह देश और दुनिया की तमाम लड़कियां उनकी दबी मुस्कराहट में कई रंग तलाश करती रहीं. आज भी करती हैं. मेरे क्रिकेट हीरो को उसकी सबसे बड़ी फैन की तरफ से – हैप्पी बर्थ डे.

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