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इस अनाथ ने पेट भरने के लिए थामी थी गेंद, अब ओडिशा की तरफ से खेलेंगे रणजी

देवधर ट्रॉफी के बाद स्पिनर पापू राय को ओडिशा रणजी टीम में भी चुना गया

Updated On: Oct 22, 2018 07:57 PM IST

FP Staff

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इस अनाथ ने पेट भरने के लिए थामी थी गेंद, अब ओडिशा की तरफ से खेलेंगे रणजी
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सफलता की भूख तो आम बात है, लेकिन बाएं हाथ के स्पिनर पापू राय के लिए सफलता के दूसरे मायने थे. इससे यह सुनिश्चित होता था कि उन्हें भूखे पेट नहीं सोना पड़ेगा. ओडिशा के 23 वर्षीय स्पिनर पापू को हाल में समाप्त हुई विजय हजारे ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन के बाद पहले दो मैचों के लिए रणजी ट्रॉफी टीम में शामिल किया गया. इससे पहले पापू को देवधर ट्रॉफी के लिए अजिंक्य रहाणे की अगुआई वाली भारत सी टीम में चुना गया था.

कोलकाता के इस लड़के की कहानी मार्मिक है. पापू ने जब ‘मम्मी-पापा’ कहना भी शुरू नहीं किया था तब उन्होंने अपने माता-पिता गंवा दिए थे. अपने नए राज्य ओडिशा की तरफ से विजय हजारे ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद पापू ने अपने पुराने दिनों को याद किया जब प्रत्येक विकेट का मतलब होता था कि उन्हें दोपहर और रात का पर्याप्त खाना मिलेगा. पापू ने अपने मुश्किल भरे दिनों को याद करते हुए कहा, ‘भैया लोग बुलाते थे और बोलते थे कि बॉल डालेगा तो खाना खिलाऊंगा. और हर विकेट का दस रुपए देते थे.’

कमाई के लिए बिहार से बंगाल आ गए थे माता-पिता

उनके माता-पिता बिहार के रहने वाले थे जो कमाई करने के लिए बंगाल आ गए थे. पापू ने अपने पिता जमादार राय और पार्वती देवी को तभी गंवा दिया था जबकि वह नवजात थे. उनके पिता ट्रक ड्राइवर थे और दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ जबकि उनकी मां लंबी बीमारी के बाद चल बसी थीं. पापू के माता-पिता बिहार के सारण जिले में छपरा से 41 किमी दूर स्थित खजूरी गांव के रहने वाले थे तथा काम के लिए कोलकाता आ गए थे. वह अपने माता-पिता के बारे में केवल इतनी ही जानकारी रखते हैं.

टीम में सेलेक्शन के बाद पूरी रात नहीं सो पाए

कोलकाता के पिकनिक गार्डन में किराए पर रहने वाले पापू ने कहा, ‘उनको कभी देखा नहीं. कभी गांव नहीं गया. मैंने उनके बारे में केवल सुना है. काश कि वे आज मुझे खेलता हुए देखने के लिए जीवित होते. मैं टीम में सेलेक्शन के बाद पूरी रात नहीं सो पाया और रोता रहा. मुझे लगता है कि पिछले कई वर्षों की मेरी कड़ी मेहनत का अब मुझे फल मिल रहा है.’

चाचा-चाची ने की परवरिश

माता-पिता की मौत के बाद पापू के चाचा और चाची उनकी देखभाल करने लगे, लेकिन जल्द ही उनके मजदूर चाचा भी चल बसे. इसके बाद इस 15 वर्षीय किशोर के लिए एक समय का भोजन जुटाना भी मुश्किल हो गया. लेकिन क्रिकेट से उन्हें नया जीवन मिला. उन्होंने पहले तेज गेंदबाज के रूप में शुरुआत की, लेकिन हावड़ा क्रिकेट अकादमी के कोच सुजीत साहा ने उन्हें बाएं हाथ से स्पिन गेंदबाजी करने की सलाह दी.

सेकेंड डिवीजन लीग में लिए सर्वाधिक विकेट

वह 2011 में बंगाल क्रिकेट संघ की सेकेंड डिवीजन लीग में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज थे. उन्होंने तब डलहौजी की तरफ से 50 विकेट लिए थे. लेकिन तब इरेश सक्सेना बंगाल की तरफ से खेला करते थे और बाद में प्रज्ञान ओझा के आने से उन्हें बंगाल टीम में जगह नहीं मिली. भोजन और आवास की तलाश में पापू भुवनेश्वर से 100 किमी उत्तर पूर्व में स्थित जाजपुर आ गए. पापू ने कहा, ‘मेरे दोस्त (मुजाकिर अली खान और आसिफ इकबाल खान) जिनसे मैं यहां मिला, उन्होंने मुझसे कहा कि वे मुझे भोजन और छत मुहैया कराएंगे. इस तरह से ओडिशा मेरा घर बन गया.’

2015 में ओडिशा अंडर-15 टीम में जगह मिली

उन्हें 2015 में ओडिशा अंडर-15 टीम में जगह मिली. तीन साल बाद पापू सीनियर टीम में पहुंच गए और उन्होंने ओडिशा की तरफ से लिस्ट ए के आठ मैचों में 14 विकेट लिए. पापू ने विजय हजारे ट्रॉफी के लीग चरण में आठ मैचों में 14 विकेट चटकाए थे जिससे वह राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजरों में आए, जिन्होंने आगामी देवधर ट्रॉफी में उन्हें अजिंक्य रहाणे वाली भारत सी टीम में चुना गया. अब वह देवधर और रणजी ट्रॉफी में खेलने के लिए उत्साहित हैं. उन्होंने कहा, ‘उम्मीद है कि मुझे मौका मिलेगा और मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगा. इससे मुझे काफी कुछ सीखने को मिलेगा.’

हरियाणा के खिलाफ करेगा रणजी अभियान की शुरुआत

ओडिशा ग्रुप सी लीग में अपने रणजी अभियान की शुरुआत हरियाणा के खिलाफ करेगा जो एक से चार नवंबर तक खेला जाएगा. इसके बाद वह 12 से 15 नवंबर तक उत्तर प्रदेश से भिड़ेगा. बिप्लब समंत्रे 15 सदस्यीय ओडिशा टीम की अगुआई करेंगे.

(एजेंसी इनपुट के साथ, फोटो फेसबुक से साभार)

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