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लक बाइ चांस मिला टीम इंडिया में मौका: ऋद्धिमान साहा

साहा ने बताया कैसे पड़ा उनका निकनेम पपाली

Updated On: Apr 10, 2017 09:56 AM IST

Neeraj Jha

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लक बाइ चांस मिला टीम इंडिया में मौका: ऋद्धिमान साहा

ऋद्धिमान साहा इस समय भारतीय टेस्ट टीम के महत्वपूर्ण सदस्य है. फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत करते हुए साहा ने बताया कि टीम इंडिया में उन्हे मौका मिलेगा वह उन्हे भी नहीं पता था. टॉस से ठीक पहले उन्हे बताया गया कि वह अपना पहला टेस्ट खेल रहे हैं. तो जानते है कि अब तक के करियर के बारे में क्या कहना है साहा का.

सवाल- किंग्स इलेवन पंजाब आईपीएल के लिए पूरी तरह से तैयार है और टीम के मेंटर सहवाग से आपको किस तरह की मदद मिल रही है. आपकी इस बार अपनी टीम को लेकर क्या उम्मीदें है.

मुझे उम्मीद है कि वीरू भाई से मिले टिप्स के बाद पिछली बार की तुलना में मेरे लिए यह सत्र काफी अच्छा रहेगा. भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में जगह बनाने से बाद से उन्होंने मेरी काफी मदद की है. सभी फॉर्मेट में बल्लेबाजी करते हुए मैंने सकारात्मकता लाने की कोशिश की है.

इस बार का डोमेस्टिक सीजन भी मेरे लिए काफी अच्छा रहा है,  44 से अधिक की औसत से मैंने 400 से ज्यादा रन बनाए और मुझे उम्मीद है कि आईपीएल में भी अच्छा करूंगा. मैंने टेस्ट क्रिकेट में भी अच्छा प्रदर्शन किया है तो इससे मेरा आत्मवश्विास काफी बढ़ा है  और आप इसका असर टी20 में भी देखोगे.  टीम में हर खिलाड़ी के ऊपर जिम्मेदारी होती है. हर खिलाडी को प्रदर्शन करना होगा और यह सुनिश्चित करना सबकी जिम्मेदारी है कि इस बार किंग्स इलेवन की टीम खिताब की दावेदार हो.

सवाल- आपके क्रिकेटर बनने में परिवार ने किस तरह से सपोर्ट किया?

घर में हमेशा से ही खेल के प्रति काफी अच्छा माहौल रहा. पिताजी फुटबॉल के एक अच्छे खिलाडी रहे थे और उनकी क्रिकेट में भी रूचि थी. खास बात ये है को वो सिलीगुड़ी के लीग मैचों में विकेटकीपर  बैट्समैन के तौर पर ही खेलते थे. कहीं न कहीं इस चीज़ का मझ पर काफी प्रभाव पड़ा. मैंने भी मन बना लिया था की मुझे भी क्रिकेटर ही बनना है और अच्छी बात ये रही की इसमें घर के लोगों का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा. मैं खेलने के अलावा रात के तीन चार बजे जागकर ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड  के मैचों को देखता था.

सवाल- आपकी इंटरनेशनल क्रिकेट पहली दो एंट्री बिल्कुल ही आकस्मिक रही. बहुत काम लोगों को पता होगा कि आपने अपना पहला टेस्ट 2010 में खेला. कैसे मिला ये मौका?

सिर्फ अंतरराष्ट्रीय ही नहीं बल्कि डोमेस्टिक क्रिकेट में भी मुझे चांस अचानक से ही मिला. जब बंगाल के रेगुलर विकेटकीपर दीप दासगुप्ता का आईसीएल के साथ करार हुआ. मैंने अपने पहले ही मैच में सेंचुरी मारकर अपना स्थान पक्का कर लिया. जहां तक टेस्ट मैच में मौका मिलने की बात है, उसकी कहानी बहुत मजेदार है.

2010 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ नागपुर में पहला टेस्ट मैच था. मैं टीम का हिस्सा तो था लेकिन उस सीरीज में मेरे खेलने की उम्मीद न के बराबर थी. यहां तक की टीम के कोच गैरी कर्स्टन ने भी मुझे साफ तौर पर बता दिया था कि मैं आखिरी 11 में नहीं हूं और ये भी सलाह भी दी कि मैं अपनी प्रैक्टिस खुद ही कर लू और इस वजह से मुझे टीम के किसी भी गेंदबाज को खेलने का मौका नहीं मिला. खैर मैं नेट बोलर्स के साथ अभ्यास करता रहा.

इसी दौरान पता चला की वीवीएस लक्ष्मण इंजरी की वजह से नहीं खेल पाएंगे और उनकी जगह रोहित शर्मा को टीम में जगह मिल गई. लेकिन प्रैक्टिस के दौरान वो भी चोटग्रस्त हो गए.  मजेदार बात ये रही की वो मुझे से ही टकरा गए थे. टॉस होने से कुछ देर पहले कप्तान एम एस धोनी मेरे पास आए और उन्होंने कहा कि मेरा नाम अंतिम ग्यारह में है और इस तरह मुझे अपना पहला टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला. उस मैच में डेल स्टेन और मोर्ने मोर्केल जैसे तेज गेंदबाज का सामना करना पड़ा, जो मेरे लिए एक अच्छा अनुभव रहा.

सवाल- टीम का हिस्सा होते हुए भी कितना मुश्किल होता है अंतिम 11 में नहीं आना.  क्योंकि इसके बाद आपको अगला मौका मिलने में तकरीबन दो साल लग गए.

पर्थ में स्लो ओवर रेट की वजह से कप्तान धोनी भाई को बाहर बैठना पड़ा. जैसा मैंने आपको बताया की डेब्यू मैच में मुझे टॉस से कुछ देर पहले बताया गया था कि मै खेल रहा हूं, उसके बाद से हमेशा मैं आखिरी क्षण तक इंतजार करता था, खासकर जब तक की टॉस न हो जाए. एक तरह से ये आदत बन गई थी और मैं अपने आपको पूरी तरह से खेलने के लिए तैयार रखता था. एडिलेड टेस्ट में भी कुछ ऐसा ही हुआ, आखिरी वक्त में मुझे बताया गया की मैं टीम का हिस्सा हूं.

माही भाई ने मुझे बताया की ये मुझे ये मौका मिलने वाला है और ये मेरे लिए बहुत बड़ा मौका है.  उन्होंने मुझसे यह भी  कहा कि तुम टीम को विकेट के पीछे से रहकर मदद करना.

सवाल- धोनी के रिटायरमेंट के बाद आपकी जगह टीम में पक्की हो गयी और हाल फिलहाल में आपने जबरदस्त प्रदर्शन किया है और यही वजह है कि आपकी गिनती वर्तमान टीम के टॉप बल्लेबाजों में हो रही है. आपने पिछले साल वेस्टइंडीज में अपना पहला शतक लगाया, वो भी तब जब टीम को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी.

सेंट लूसिया टेस्ट में स्थिति अच्छी नहीं थी, पांच विकेट गिर चुके थे. अश्विन मेरे से पहले आए थे क्योंकि उन्होंने पिछले मैच में अच्छी बैटिंग की थी .अश्विन ने मुझे बताया की शुरुआत में रूक कर खेलना है, क्योंकि जितना खेलेंगे विकेट उतना आसान होता जायेगा. फिर मैंने ज्यादा से ज्यादा बॉल खेलने की कोशिश की. हम दोनों ने टाइम लिया और उसके बाद धीरे धीरे शॉट्स खेलना शुरू किया. हमारी अच्छी साझेदारी की वजह से टीम बेहतर स्थिति में पहुंच गई. हम दोनों की इस पारी को आप  मैच विनिंग पारी भी कह सकते हो.

इस साल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जो शतक मैंने रांची में लगाया था वो मेरे हिसाब से अभी तक की मेरी सबसे बढ़िया पारी है. तीसरे टेस्ट में स्थिति अच्छी नहीं थी, ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 451 रन बनाये थे और जब मैं क्रीज पर आया तो टीम का स्कोर 328 पर 6 था.  पुजारा काफी देर से विकेट पर टिका था और लग नहीं रहा था कि वह आउट होगा.  फिर मैंने अपना टाइम लिया और अपनी ताकत के हिसाब से खेला. स्पिनर्स को स्टेप ऑन करके स्वीप मारना. इस स्ट्रेंथ का पूरा फायदा उठाकर हमने एक अच्छी साझेदारी को अंजाम दिया. टीम 600 से ऊपर रन बनाकर एक अच्छी स्थिति में पहुंच गई.

सवाल-  पश्चिम बंगाल में निकनेम्स का काफी प्रचलन है और इन नामो के पीछे कई दिलचस्प कहानियां भी होती है. आपको लोग पपाली के नाम से पुकारते है. क्या कहानी है इसके पीछे?

वैसे तो निकनेम का कोई खास अर्थ होता नहीं है. बचपन में हम किराए के घर में रहते थे और पड़ोस में एक लड़की रहती थी और उसने मुझे पपाली के नाम से पुकारना शुरू कर दिया फिर कुछ दिनों के बाद पापा का तबादला सिलीगुड़ी शहर में हो गया और वहां भी लोगों ने मुझे इसी नाम से पपुकार्ण शुरू कर दिया. कुछ दोस्तों ने इस नाम को और भी छोटा कर दिया और वो मुझे पोप्स के नाम से बुलाते है.

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