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विशाखापत्तनम टेस्ट की खोज हैं जयंत यादव

भारत को जयंत यादव के तौर पर एक शानदार क्रिकेटर मिला है.

Updated On: Nov 24, 2016 09:01 AM IST

Vedam Jaishankar

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विशाखापत्तनम टेस्ट की खोज हैं जयंत यादव

विशाखापत्तनम टेस्ट में भारत की शानदार जीत हुई. इसमें भारत को जयंत यादव के तौर पर एक शानदार क्रिकेटर मिला है.

जयंत यादव ने अपने पहले ही टेस्ट मैच में ऑलराउंडर खेल दिखाया. दोनों ही पारियों में जयंत ने छोटी मगर उपयोगी पारियां खेलीं. अपनी शानदार फील्डिंग से एक तगड़े विरोधी बल्लेबाज को पैवेलियन लौटाया.

साथ ही बढ़िया गेंदबाजी करके उन्होंने चार विकेट भी झटके. किसी भी खिलाड़ी के लिए करियर की इससे अच्छी शुरुआत नहीं हो सकती थी.

सिर्फ तकनीक ही नहीं, बेहतर टेम्परामेंट भी

जयंत ने अपने पहले ही मैच में अच्छा टेम्परामेंट दिखाया है. इंटरनेशनल क्रिकेट में किसी भी खिलाड़ी की कामयाबी के लिए जरूरी है कि तकनीक के साथ उसके पास अच्छा टेम्परामेंट भी हो.

जयंत ने अपनी बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग से दिखाया कि उनके पास तकनीक भी है और इंटरनेशनल क्रिकेट के लिए जरूरी मिजाज भी. हालांकि पहले ही मैच से किसी के बारे में राय कायम करना ठीक नहीं. मगर जयंत ने दबाव में भी शानदार खेल से उम्मीदें जगा दी हैं.

विदेशी दौरों में तो भारत शायद ही तीन स्पिनर्स के साथ खेले. मगर घरेलू मुकाबलों में दो ऑफ स्पिनर्स को मौका दिया गया तो जयंत पहली पसंद होंगे. अगर चोट या किसी और वजह से अश्विन अनुपलब्ध हुए तो जयंत के रूप में उनका अच्छा विकल्प भारत को मिल गया है.

जयंत के पिता जय सिंह दिल्ली में अच्छे क्लब क्रिकेटर थे. वह लेफ्ट आर्म स्पिनर थे और एयर इंडिया के लिए खेलते थे. बाद में वे टीम के मैनेजर बन गए. जय सिंह देश के बड़े खिलाड़ियों के संपर्क में रहे हैं. कभी खेल के लिए और कभी उनकी हवाई यात्राओं की जरूरतें पूरी करने के लिए. इस वजह से जयंत को भी बड़े खिलाड़ियों के साथ ढलने में दिक्कत नहीं हुई.

हरियाणा से मिला मौका

जय सिंह गुड़गांव के रहने वाले थे. उन्होंने अंडर-19 और अंडर-21 क्रिकेट हरियाणा की तरफ से खेला. फिर एयर इंडिया के कर्मचारी के तौर पर उन्हें दक्षिण दिल्ली के वसंत विहार में रहने के लिए घर मिला.

जय सिंह ने अपने बेटे जयंत को डीपीएस वसंत कुंज और हिंदू कॉलेज में पढ़ाया. साथ ही उन्होंने जयंत का दाखिला एक स्थानीय क्रिकेट क्लब में करा दिया था.

आठ साल की उम्र में जयंत को कोच आर पी शर्मा की शागिर्दी हासिल हो गई थी. फिर उन्हें अपने न्यू फ्रैंड्स क्रिकेट क्लब की तरफ से जामिया हमदर्द इंस्टीट्यूट में भी खेलने का खूब मौका मिला.

आर पी शर्मा की उम्दा ट्रेनिंग ने जयंत को अच्छा ऑफ स्पिनर बना दिया. साथ ही जयंत ने अपनी बल्लेबाजी पर भी काफी काम किया.

दिल्ली में क्रिकेट के एक तजुर्बेकार का कहना है कि जयंत बड़े मैचों के खिलाड़ी हैं. वह दबाव में अच्छा खेलते हैं. उनमें गजब का आत्मविश्वास है. उन्होंने अपनी गेंदबाजी, बल्लेबाजी और फील्डिंग पर काफी काम किया है. उनके मुताबिक जयंत को उन्होंने कई बार मुश्किल हालात में सधी हुई गेंदबाजी करते हुए देखा है.

जयंत यादव सौजन्य: बीसीसीआई

दिल्ली में क्रिकेट में कामयाबी के लिए पहुंच और सिफारिश बहुत चलती है. पिता जय सिंह को यह बात मालूम थी. इस वजह से उन्होंने बेटे जयंत को हरियाणा से खिलाने का फैसला किया.

इस वजह से जयंत को अंडर 15, 17, 19 और 22 में खेलने का मौका मिला. रणजी में भी वह हरियाणा की तरफ से ही खेले. वहां पर कोच अश्विनी कुमार ने उनके खेल को और निखार दिया.

जयंत की अंडर-15 टीम के कप्तान लेग स्पिनर यजुवेंद्र चहल थे. हरियाणा की टीम में पहले ही काफी स्पिनर थे. टेस्ट खिलाड़ी अमित मिश्रा और यजुवेंद्र भी उनमें शामिल थे.

2011 में जयंत की किस्मत से उन्हें यजुवेंद्र की जगह मौका मिल गया. उन्होंने गुजरात के खिलाफ मैच में छह विकेट झटके और हरियाणा को बाहर होने से बचा लिया. जयंत के प्रदर्शन से बीसीसीआई सचिव और हरियाणा के क्रिकेट प्रशासक अनिरुद्ध चौधरी बेहद प्रभावित हुए.

द्रविड़ की मिली शागिर्दी

इसके बाद उनका करियर तेजी से आगे बढ़ा. कर्नाटक के खिलाफ डबल सेंचुरी ने उनकी शोहरत और बढ़ा दी. कुछ सालों बाद सौराष्ट्र के खिलाफ उन्होंने एक मैच में तेरह विकेट लिए. जिसके बाद उन्हें इंडिया ए टीम के लिए चुन लिया गया.

इंडिया ए की टीम ने दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश के खिलाफ घरेलू सीरीज खेली. इसके अलावा टीम को ऑस्ट्रेलिया का दौरा करने का मौका भी मिला. इस दौरान जयंत को राहुल द्रविड़ की कोचिंग में खेलने का मौका मिल गया. द्रविड़ ने भी इस हीरे में चमक देखी और उसे निखारने में मदद की.

जयंत यादव आर अश्विन और ग्रैम स्वॉन को अपने पसंदीदा ऑफ स्पिनर मानते हैं. दोनों खिलाड़ियों की अपनी खूबियां हैं.

ईरानी ट्रॉफी में जयंत यादव ने मुंबई के खिलाफ 480 के स्कोर का पीछा करने हुए नाबाद 19 रन बनाए. मगर वो एक तरफ क्रीज पर डटे रहे. इसकी खूब तारीफ हुई.

इसके बाद उन्हें आईपीएल के लिए खेलने का मौका मिला. जहां उन्हें राहुल द्रविड़ की शागिर्दी हासिल हुई. जहां उन्हें पॉवरप्ले के दौरान गेंदबाजी का मौका मिला.

दिलचस्प बात यह है कि जयंत ने शुरुआत लेग स्पिनर के तौर पर की थी. मगर परिवार में दो और लड़के लेग स्पिनर थे. इस वजह से उन्हें सलाह दी गई कि एक ही परिवार से तीन लेग स्पिनर होंगे तो उन्हें मौका नहीं मिलेगा.

जयंत यादव के दो बहनें हैं, गार्गी और रिया. गार्गी पीआर प्रोफेशनल हैं, और रिया एक तैराक हैं. उनकी मां की 17 साल पहले एक विमान हादसे में मौत हो गई थी.

जयंत ने अपना पहला वनडे मैच विशाखापत्तनम में ही खेला था, न्यूज़ीलैंड के खिलाफ. उस मैच में सभी खिलाड़ियों ने अपनी जर्सी में मां का नाम लिखवाया था. जयंत ने भी अपनी जर्सी में मां लक्ष्मी का नाम लिखवाया था.

मैच के बाद एक टीवी इंटरव्यू के जरिए जयंत ने अपनी सौतेली मां ज्योति से उनका नाम न लिखने के लिए माफी मांगी थी. और कहा था कि उनके दिल मे हमेशा ही अपनी दूसरी मां के लिए सम्मान है.

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