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किताब पढ़कर विराट ने क्यों कहा- सर, यही मैं हूं

विराट के बनने की कहानी लेकर आई है किताब - ड्रिवेन, द विराट कोहली स्टोरी

Updated On: Dec 15, 2016 01:50 PM IST

Vedam Jaishankar

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किताब पढ़कर विराट ने क्यों कहा- सर, यही मैं हूं

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक अथर्टन ने कुछ समय पहले द टाइम्स, लंदन के लिए विराट कोहली का प्रोफाइल किया था. इसमें उन्होंने एड स्मिथ के हवाले से एक किस्से का जिक्र किया था. एड स्मिथ इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर हैं, जो बाद में खेल समीक्षक बन गए. उन्होंने 2016 आईपीएल के समय रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए कंसल्टेंट का रोल निभाया था.

अथर्टन ने लिखा है कि कोहली को पता चला कि उनका बॉडी फैट परसेंटेज नौ हो गया है. उन्होंने पता किया कि नोवाक जोकोविच का परसेंटेज लगभग आधा है. उन्होंने क्रिकेट से अलग बाकी एथलीटों के बारे में पता किया. फिर उन्होंने एक जुनून के साथ ट्रेनिंग शुरू की. आईपीएल जैसी जगह, जहां लेट नाइट पार्टी बड़ी आम हैं, वहां भी उन्होंने अपनी कोशिश में कोई कमी नहीं आने दी.

स्मिथ ने तमाम इंटरनेशनल खिलाड़ियों के साथ काम किया है. उन्होंने एक क्रिकेट मासिक पत्रिका बैटिंग 3.0 के लिए लिखा, ‘जितने एथलीट के साथ मैं खिलाड़ी या ऑब्जर्वर के तौर पर जुड़ा, उसमें कोहली ने अपनी कामयाबी के लिए जो काम किया है, वो सबसे ऊपर है. शायद जोकोविच ही उनसे बेहतर होंगे. वो भी बेहद करीबी मामले से.’

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स्मिथ ने कोहली के बारे में जो कुछ भी कहा, वो पत्रकार विजय लोकापल्ली की सोच के अनुसार ही है. विजय लोकापल्ली ने विराट के शुरुआती करियर को करीब से देखा है. उन्हें विश्व स्तरीय बल्लेबाज बनते देखा है. उनकी नई किताब ड्रिवेन द विराट कोहली स्टोरी का टाइटल इस कमाल के खिलाड़ी की यात्रा को दिखाता है.

कोहली के खेल से प्यार को वो जुनून का नाम देते हैं. 221 पेज की किताब में ऐसे बेहतरीन किस्से हैं, जो कोहली के बनने की कहानी बयां करते हैं. लोकपल्ली कहते हैं, ‘यह किताब जीवनी नहीं है. यह एक क्रिकेट के शौकीन बच्चे के विश्व स्तरीय बल्लेबाज बनने की कहानी है. मुझे लगता है कि मैं सही तस्वीर पेश की है. मुझे बहुत खुशी हुई, जब विराट ने कहा- सर, यही मैं हूं.’

लोकापल्ली दिल्ली में रहते हैं. द हिंदू में काम करते हैं, जिनके लिए उन्होंने पूरी क्रिकेट दुनिया में खेल कवर किया है. उन्होंने बहुत से क्रिकेटरों को करीब से देखा है. खासतौर पर दिल्ली से जुड़े. ड्रिवेन में उन्होंने एक वकील के बेटे कोहली की कहानी सुनाई है. पश्चिम दिल्ली की कहानी, जहां जगह और पहचान के लिए जबरदस्त जंग है. पश्चिम दिल्ली से वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर, आशीष नेहरा, शिखर धवन और इशांत शर्मा जैसे क्रिकेटर भी निकले हैं. गंभीर के  अलावा और कोई भी उच्च वर्गीय परिवार से नहीं था. बेहतर परिवार से ही आए अतुल वासन की कोशिश थी, जिसने कोहली की मदद की.

वासन सोनेट क्लब के लिए खेलते थे, जिसे मध्य और निम्न वर्गीय परिवार से आए बच्चों को प्रमोट करने के लिए जाना जाता था. वासन ने अपने क्लब के साथी और ऑफ स्पिनर राज कुमार की मदद कोचिंग क्लीनिक बनाने में की. नाम रखा गया वेस्ट दिल्ली क्रिकेटर एकेडमी,  यहीं पर नौ साल के विराट आए. आठ साल बाद वासन ने दिल्ली सीनियर चयन समिति के अध्यक्ष के तौर पर विराट को पहले रणजी ट्रॉफी मैच के लिए चुना.

पिता की मौत के बाद भी खेला था मैच

लेखक ने तमाम किस्से लिखे हैं. हालांकि उन्होंने रणजी ट्रॉफी के एक मैच का खासतौर पर जिक्र किया है. इस मैच ने कोहली को बच्चे से ‘विराट’ बनते देखा. मुकाबला दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में था.

कर्नाटक ने 446 रन बनाए. दिल्ली का स्कोर दिन का खेल खत्म होने पर पांच विकेट पर 103 था. विराट 40 पर बैटिंग कर रहे थे. खेल के बाद थके कोहली अपने घर गए. उसी रात उनके पिता का निधन हो गया. पूरी रात और सुबह विराट गहरी निराशा में थे. परिवार को लगा कि विराट का दिमाग इस ट्रैजेडी से हटाए जाने की जरूरत है. उनसे मैच खेलने को कहा गया.

विराट ने अपने कोच राज कुमार से सलाह मांगी, जो सिडनी में थे. कोच उनके लिए पिता जैसे ही थे. बल्कि विराट के पिता ने कहा था कि आप विराट के लिए पिता जैसे हैं. कोच ने विराट से कहा कि जाओ और मैच खेलो.

Mumbai: India captain Virat Kohli on the third day of the fourth Test match against England in Mumbai on Saturday. PTI Photo by Santosh Hirlekar(PTI12_10_2016_000211B)

दिल्ली के कप्तान मिथुन मनहास सुबह साढ़े सात बजे मैदान पर पहुंचे. उन्होंने देखा कि विराट कॉरिडोर में बैठे हैं. सिर पकड़ के. जब उन्होंने बताया कि मेरे पिता का निधन हो गया है, तो मनहास को समझ नहीं आया कि इस पर कैसी प्रतिक्रिया दें. मनहास ने कहा, ‘मैंने आसपास देखा कि शायद कोई हो, तो इस बच्चे का ध्यान रखने के लिए आया हो. लेकिन वहां कोई नहीं था.’ उन्हें झटका लगा, जब विराट ने कहा कि वो मैच खेलना चाहते हैं. विराट ने 90 रन बनाए और मैच ड्रॉ कराने में मदद की.

लोकापल्ली बताते हैं कि ड्रेसिंग रूम में वो विराट के आउट होने के बाद उनके साथ बैठे थे, ‘मैं उनके लिए बेहद दुखी था. एक बच्चा था, जो फर्स्ट क्लास क्रिकेट में आया ही था. टी ब्रेक में कर्नाटक के कोच वेंकटेश प्रसाद दिल्ली के ड्रेसिंग रूम में आए. उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या कर्नाटक के खिलाड़ी अपनी संवेदना जताने के लिए आ सकते हैं. वेंकी ने बल्कि विराट को आशीर्वाद दिया.’

कोच को गिफ्ट की कार

एक और किस्सा वो है, जब कोहली ने अपने कोच राज कुमार को स्कोडा रैपिड कार भेंट की. वो पांच सितंबर का दिन था, जो शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. उनके भाई कार लेकर कोच के घर सुबह-सुबह गए थे. कोच को कार की चाभी दी और मोबाइल पर विराट से बात कराई. विराट एक शूट के लिए अमेरिका में थे. विराट ने फोन पर कोच को शिक्षक दिवस की बधाई दी.

एक बेहतरीन क्रिकेटर का वो बेहतरीन भाव था. इस तरह के तमाम किस्से हैं, जो विजय लोकापल्ली की इस स्पेशल क्रिकेटर पर किताब को यादगार बनाते हैं.

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