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लोढ़ा पैनल की सिफारिशों पर मन में सवाल हैं तो इसे पढ़िए

किसी पदाधिकारी ने राज्य संघ में नौ साल पूरे कर लिए हैं, तो वह क्रिकेट प्रशासन में वापसी नहीं कर सकता

FP Staff Updated On: Jan 12, 2017 07:29 PM IST

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लोढ़ा पैनल की सिफारिशों पर मन में सवाल हैं तो इसे पढ़िए

लोढ़ा कमेटी की तरफ से कुछ ऐसे सवालों के जवाब दिए गए हैं, जो लगातार पूछे जा रहे हैं. बीसीसीआई में सुधारों के लिए बनी कमेटी ने ऐसे तमाम सवालों पर अपनी राय साफ की है. आप भी जानिए-

कमेटी ने पहले कहा था कि अगर किसी पदाधिकारी को नौ साल हो गए हैं, तो वह बीसीसीआई या राज्य संघ में अलग तरीके से लागू होंगे. क्या दो जनवरी और फिर तीन जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यही स्थिति है?

-हालात बदल गए हैं. दो जनवरी के आदेश और फिर तीन जनवरी को उसमें बदलाव के बाद कोई बीसीसीआई या किसी राज्य संघ का पदाधिकारी नौ साल पूरे करने के बाद वापसी नहीं कर सकता. उदाहरण के लिए अगर किसी पदाधिकारी ने राज्य संघ में नौ साल पूरे कर लिए हैं, तो वह क्रिकेट प्रशासन में वापसी नहीं कर सकता. चाहे वह बीसीसीआई में हो या राज्य संघ में. इसी तरह, अगर किसी ने पांच साल राज्य संघ और फिर चार साल बीसीसीआई में बिताए हैं, तो वह भी अयोग्य है.

क्या अयोग्य पदाधिकारी किसी संघ या बीसीसीआई का प्रतिनिधि हो सकता है? क्या ऐसा कोई व्यक्ति संघ या बीसीसीआई की तरफ से कोई काम कर सकता है?

माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले की भावनाओं को देखते हुए कोई भी अयोग्य व्यक्ति किसी भी तरह से क्रिकेट प्रशासन का हिस्सा नहीं हो सकता. वह सदस्य संघ या बीसीसीआई का प्रतिनिधि नहीं हो सकता. ऐसा व्यक्ति किसी संघ में पैट्रन या सलाहकार की हैसियत से भी नहीं रह सकता. न ही किसी कमेटी या काउंसिल का सदस्य हो सकता है.

क्या किसी सदस्य संघ की तरफ से चुनाव कराए जा सकते हैं? यह देखते हुए कि अदालत के फैसले के बाद उन्हें अपने संविधान में संशोधन करना पड़ सकता है?

चुनाव पर कोई रोक नहीं है. अगर कमेटी की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनेजर  लेकर कोई कमी पाई जाती है, तो चुनाव वैध नहीं माना जाएगा.

अगर कोई व्यक्ति किसी राज्य संघ का दो साल सदस्य रहा है, तो क्या वह बिना तीन साल के कूलिंग ऑफ पीरियड के अगला चुनाव लड़ सकता है? अगर हां, तो उसका टर्म क्या होगा?

अगर चुनाव के समय किसी पदाधिकारी के तीन साल पूरे नहीं हुए हैं, तो वह चुनाव लड़ सकता है. हालांकि उसे पूरा टर्म नहीं मिलेगा. उसे लगातार तीन साल पूरे होने के बाद पद छोड़ना पड़ेगा.पद के दुरुपयोग की आशंकाओं के मद्देनजर ऐसा फैसला लिया गया है. उदाहरण के लिए, अगर ऐसी रोक न हो तो कोई पदाधिकारी दो साल, नौ महीने में इस्तीफा देकर अगले चुनाव के लिए खड़ा हो सकता है. इस पॉइंट के मुताबिक सौरव गांगुली भी बीसीसीआई में फिलहाल चुनाव लड़ रहे हैं.

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