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धोनी पर क्या कहना है उनके दोस्त चिटटू और छोटू भइया का!

धोनी बेस्ट कैप्टन रहे हैं. उनका ये फैसला उनके जीवन से क्रिकेट का अंत नहीं है

Updated On: Jan 06, 2017 07:59 AM IST

Swati Arjun Swati Arjun
स्वतंत्र पत्रकार

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धोनी पर क्या कहना है उनके दोस्त चिटटू और छोटू भइया का!

अपनी कप्तानी का दुनियाभर में लोहा मनवा चुके भारतीय क्रिकेट टीम के सफलतम कप्तानों में से एक महेंद्र सिंह धोनी ने मंगलवार को वन-डे की कप्तानी छोड़ने का ऐलान करके सबको चौंका दिया.

धोनी की कप्तानी छोड़ने की खबर ने एक बार फिर से हर किसी को उनके फैसलों का मुरीद बना दिया. फ़र्स्टपोस्ट हिंदी ने बात की धोनी के संघर्ष के दिनों के उनके साथी रहे परमजीत सिंह और सीमांत लोहानी से. उनसे धोनी के इस फैसले की पहली प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की.

रांची में खेल के सामानों की दुकान चलाने वाले परमजीत सिंह के अनुसार, 'धोनी कभी भी कुछ भी कर सकता है और शायद इसलिए उसके जैसा दूसरा कोई नहीं है. उसके दिमाग में क्या चलता रहता है इसके बारे में उसके अलावा किसी और को कुछ पता नहीं होता. लेकिन अगर उसने फैसला लिया है तो जाहिर है सही ही होगा. उसने कप्तानी छोड़ी है, क्रिकेट खेलना नहीं और मुझे पूरा यकीन है कि वो अगला विश्वकप भी जरूर खेलेगा.'

धोनी का महत्व कभी कम न होगा

परमजीत सिंह यानी धोनी छोटू भइया कहते हैं, 'धोनी कप्तान रहे या न रहे, उसकी जगह जो भी कप्तान होगा, वो कोई भी फैसला लेने से पहले धोनी से जरूर सलाह करेगा. हो सकता है कि धोनी कप्तानी छोड़ने के बाद टीम को आगे ले जाने में अलग तरह से योगदान दे.'

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छोटू भइया उर्फ परमजीत सिंह के साथ धोनी और साथ में है स्कूल के स्पोर्ट्स टीचर रंजन बनर्जी

परमजीत का कहना है वे हर हाल में धोनी के फैसले के साथ हैं.

'निजी तौर पर मैं उसके हर फैसले से सहमत हूं क्योंकि मुझे पता है कि खेल के बारे वो मुझसे ज्यादा जानता है और उसका कोई भी फैसला कभी भी गलत नहीं हो सकता है. एक चैप्टर बंद हुआ है जो बहुत सफल रहा, हो सकता है अगला चैप्टर इससे भी ज्यादा सफल हो.'

महेंद्र सिंह धोनी के बचपन के दोस्त सीमांत लोहानी उर्फ चिटटू कहते हैं, 'ये उसका निजी फैसला है, इसमें हम लोग भला क्या कह सकते हैं. वो कभी भी कुछ भी फैसला ले सकता है तभी उसका नाम धोनी है और उसके जैसा कोई दूसरा न है न होगा. लेकिन वो अगले वर्ल्ड कप में जरूर खेलेगा ऐसा मेरा विश्वास है.'

टीम की बेहतरी के लिए फैसला लिया

चिटटू के मुताबिक, 'धोनी के इस फैसले के पीछे भी कोई निजी वजह नहीं है, उन्होंने ऐसा देश और टीम के लिए किया है. ताकि उनके बाद जो भी टीम में आए उसे मौका मिले, युवाओं को देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिले शायद इसलिए उन्होंने ये फैसला लिया है. उनके लिए देश और क्रिकेट से बढ़कर दूसरा कुछ नहीं है.'

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सीमांत लोहाणी के साथ देवड़ी मंदिर से लौटते हुए एम एस धोनी

धोनी के स्कूल जवाहर विद्या मंदिर में रहे उनके पहले स्पोर्ट्स टीचर केशव रंजन बनर्जी को श्रेय जाता है धोनी को क्रिकेट में लाने का. बनर्जी ही वो टीचर थे जिन्होंने स्कूल में फुटबॉल खेल रहे धोनी को क्रिकेट टीम में विकेट कीपिंग के लिए प्रेरित किया.

फ़र्स्टपोस्ट से बात करते हुए बनर्जी सर कहते हैं उन्हें धोनी पर पूरा भरोसा है.

'धोनी एक बहुत ही समझदार आदमी है, उसका ये फैसला विराट कोहली के लिए है. कोई जोर-जबरदस्ती से उसे टीम से बाहर निकाले, उससे पहले उसने खुद ही अपना रास्ता चुन लिया. मुझे उम्मीद है कि वो 2019 के वर्ल्ड कप तक खेलें, पर उसका कुछ पता नहीं है. वो कब अपनी किसी नए फैसले से हम सबको चौंका दे..ये पता नहीं.'

ट्रेनिंग एकेडेमी से नई शुरुआत

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परमजीत सिंह की स्पोर्ट्स की दुकान पर एम एस धोनी

बनर्जी सर के अनुसार, 'धोनी का प्रदर्शन अब तक सर्वश्रेष्ठ रहा है, वे बेस्ट कैप्टन रहे हैं. उनका ये फैसला उनके जीवन से क्रिकेट का अंत नहीं है. वे आगे जो कुछ भी करेंगे वो क्रिकेट की बेहतरी के लिए ही होगा. जिस तरह से वे लगातार बोकारो, रांची और पूरे झारखंड में युवा खिलाड़ियों के साथ समय बिता रहे हैं उससे उनकी आगे की योजनाओं के बारे में पता चलता है.'

धोनी जल्द ही रांची में एक क्रिकेट ट्रेनिंग एकेडेमी भी खोलने जा रहे हैं जहां वो नए खिलाड़ियों की खेल में उनकी मदद करेंगे.

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