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एक ‘घातक’ इंसान कैसे बना बीसीसीआई अध्यक्ष

जहां साल्वे, सिंधिया, बिंद्रा, डूंगरपुर, डालमिया बैठे... वहां अब कौन

Updated On: Apr 01, 2017 05:42 PM IST

Manoj Chaturvedi

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एक ‘घातक’ इंसान कैसे बना बीसीसीआई अध्यक्ष

एनकेपी साल्वे, माधवराव सिंधिया, आईएस बिंद्रा, राजसिंह डूंगरपुर, एन. श्रीनिवासन... ये कुछ नाम हैं. ये वो नाम हैं, जो बीसीसीआई अध्यक्ष के तौर पर जुड़े रहे हैं. ये वो नाम हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति रही है. इसी में एक नाम जोड़िए सीके खन्ना. इस समय सीके खन्ना बीसीसीआई के कार्यवाहक अध्यक्ष हैं. क्या कुछ साल पहले सोचा भी जा सकता था कि सीके खन्ना अध्यक्ष बन सकते हैं?

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित खेल संगठनों में गिना जाता है. इसलिए इसके अध्यक्ष की भी बहुत प्रतिष्ठा होती है. इस बोर्ड ने पिछले कुछ दशकों में एनकेपी साल्वे, माधवराव सिंधिया, आईएस बिंद्रा, राजसिंह डूंगरपुर, जगमोहन डालमिया और एन श्रीनिवासन जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति वाले अध्यक्ष दिए हैं. पर लोढ़ा समिति की सिफारिशें लागू नहीं करने पर इसके पदाधिकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद से बीसीसीआई के हालात खराब रहे हैं.

इन हालात ने सीके खन्ना जैसे व्यक्ति को इसका कार्यवाहक अध्यक्ष बना दिया. हालात कितने खराब हुए हैं, आप खुद ही समझ सकते हैं. लोढ़ा समिति की सिफारिशें लागू नहीं होने पर अध्यक्ष और सचिव को हटने के लिए मजबूर होना पड़ा और सीके खन्ना बीसीसीआई के सबसे सीनियर उपाध्यक्ष होने के नाते कार्यवाहक अध्यक्ष बन बैठे हैं.

जस्टिस मुद्गल ने अपनी रिपोर्ट में खन्ना को बताया था 'पर्निशस'

अदालत ने कुछ समय पहले डीडीसीए की जांच के लिए मुद्गल समिति का गठन किया था. मुद्गल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सीके खन्ना बहुत ही पर्निशस (यानी घातक) व्यक्ति हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि वे पर्दे के पीछे रहकर काम करते हैं और किसी मामले में कभी हस्ताक्षर नहीं करते हैं. इसलिए उनका कहीं नाम नहीं आता है. वैसे भी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पदाधिकारियों में उपाध्यक्ष का कोई मायने नहीं होता.

बीसीसीआई में सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व रखने के लिए ही क्षेत्र से एक उपाध्यक्ष चुना जाता है. खासतौर से अध्यक्ष चुनाव में समर्थन देने वाले राज्य पदाधिकारियों को यह पद दिया जाता है और सीके खन्ना ने भी इसी तरह यह पद प्राप्त किया था. यह उनकी किस्मत थी कि बीसीसीआई के सभी उपाध्यक्षों में वह सबसे वरिष्ठ थे, इसलिए कार्यवाहक अध्यक्ष बनने की उनका लाटरी लग गई है.

प्रॉक्सी सिस्टम की वजह से 'किंग' हैं खन्ना

सीके खन्ना लगभग तीन दशक से भी ज्यादा समय से डीडीसीए से जुड़े हुए हैं. इस राज्य क्रिकेट एसोसिएशन में चुनाव परिणामों पर प्रॉक्सी सिस्टम का बहुत असर रहता है. इन प्रॉक्सी के बूते ही खन्ना डीडीसीए में जमे रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि डीडीसीए के किसी भी गुट के दबदबे के पीछे सीके खन्ना का समर्थन जरूर होता है. पर अदालत ने प्रॉक्सी सिस्टम को खत्म करने के लिए कहा है. इसके बाद प्रॉक्सी किंगों का क्या हश्र होगा, आप समझ सकते हैं.

वैसे खन्ना साहब बहुत ही मृदभाषी हैं और मीडिया के लोगों से उनका जुड़ाव देखने के काबिल है. मीडिया जगत में अक्सर यह चर्चा सुनने को मिलती है कि खन्ना साहब को उद्घाटन करने और उसकी तस्वीर और खबर छपवाने का बहुत शौक है. वह जब भी कोई उद्घाटन वगैरह करते हैं, तो मीडिया वालों का फोन खड़कना चालू हो जाता है.

हर फोटो में दिखने और अखबारों में छपवाने का है शौक

सीके खन्ना के बारे में कहा जाता है कि वह डीडीसीए में होने वाले मैचों के प्रजेंटेशन समारोह में खड़े होने का शौक रखते हैं. आर्टिकल के साथ जो तस्वीर है, उसमें शहरयार खान और चेतन चौहान के साथ नजर आ रहे तीसरे शख्स सीके खन्ना ही है.

इस संदर्भ में एक किस्सा मशहूर है. पिछले साल भारत ने फिरोजशाह कोटला मैदान पर एक टेस्ट खेला. डीडीसीए के मैचों का संचालन कर रहे जस्टिस मुद्गल ने मैच के प्रजेंटेशन समारोह के लिए दो नामों को तय किया. पर सीके खन्ना भी प्रजेंटेशन समारोह में खड़ा होना चाहते थे. उन्होंने मुद्गल से कहा कि वह बीसीसीआई के प्रतिनिधि के तौर पर खड़े होंगे. इसके लिए बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष शशांक मनोहर ने कहा है. जस्टिस मुद्गल ने इस मामले में तत्काल शशांक मनोहर से मेल करके पुष्टि करने का कहा. बताया जाता है कि इस पर शशांक ने कहा कि मैंने तो ऐसी कोई अनुमति नहीं दी है. इसके बाद खन्ना साहब मैच में नजर आए ही नहीं.

बीसीसीआई में ज्यादातर वो लोग अध्यक्ष बनते हैं, जिनका एक ‘विजन’ होता है. ऐसे लोगों ने अपने इस विजन का इस्तेमाल करके क्रिकेट खेल को देश में नई ऊंचाइयां दिलाई हैं. लेकिन सीके खन्ना ने पिछले तीन दशक में ऐसा कुछ नहीं किया है, जिससे लगता कि उनका भी कोई विजन है. इस सूरत में तो बीसीसीआई को कोई फायदा मिलता नही दिखता है. पर मौजूदा हालात की वजह से सितम्बर में चुनाव होने तक इस जिम्मेदारी का निभाते नजर आएंगे.

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