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तो क्या पकड़ में आते-आते रह गया टीम इंडिया का टॉप 'फिक्सर' खिलाड़ी!

2013 आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग की जांच करने वाले अधिकारी का खुलासा

Updated On: Nov 02, 2018 11:09 PM IST

Bhasha

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तो क्या पकड़ में आते-आते रह गया टीम इंडिया का टॉप 'फिक्सर' खिलाड़ी!
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आईपीएल 2013 में स्पॉट फिक्सिंग मामले की जांच करने वाली जस्टिस मुकुल मुद्गल समिति के सदस्य पूर्व आईपीएस अधिकारी बीबी मिश्रा ने कहा है कि वह खिलाड़ियों और सट्टेबाजों के बीच के बीच के साठगांठ को ‘सबूतों के अभाव’ में साबित नहीं कर सके.

मुद्गल पैनल के सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मिश्रा एक टॉप भारतीय खिलाड़ी के एक सटोरिये के साथ संपर्क होने की जांच कर रहे थे. मिश्रा ने से कहा, ‘हां, मुझे ऐसे मामले की बारे में जानकारी मिली थी जिसमें टॉप भारतीय खिलाड़ी सट्टेबाज से संपर्क में था. मेरा पास हालांकि ज्यादा सबूत नहीं थे.’ उन्होंने कहा, ‘मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि इस मामले की जांच में समय की बाध्यता नहीं थी. सुप्रीम कोर्ट का रवैया भी काफी मदद करने वाला था. अगर हम और अधिक समय मांगते तो हमे और समय मिलता. लेकिन जिस सट्टेबाज पर सवाल उठ रहा था वह साक्ष्य का हिस्सा नहीं बनना चाहता था. मेरे पास जांच रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.’

मिश्रा ने दावा किया कि जांच के समय वह सट्टेबाज के संपर्क में थे और सट्टेबाज ने सबूत मुहैया कराने का वादा भी किया था. उन्होंने कहा, ‘जब मैंने उससे सबूत मांगा तो वह पीछे हट गया. उसने कहा कि इस मामले में कई खतरनाक लोग जुड़े हुए है जिससे उसकी जान को खतरा है. उसने सबूत मुहैया कराने से मना कर दिया जिसके बाद मुझे जांच बंद करना पड़ा.’

मिश्रा से पूछा गया कि क्या उन्होंने आरोपी खिलाड़ी से बात की या सट्टेबाज से खुद जाकर मिले तो इस सवाल को टाल गए. मिश्रा ने कहा कि इस मामले में उन नौ खिलाड़ियों के होने का अनुमान नहीं लगाया जाना चाहिए जो मुद्गल समिति ने सुप्री कोर्ट को सीलबंद लिफाफे में सौपा है.

उन्होंने कहा कि वह इस मामले की जानकारी बीसीसीआई भ्रष्टाचार रोधी इकाई के प्रमुख अजीत सिंह से साझा करेंगे, जो उनके संपर्क में है.

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