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बीसीसीआई के बचाव में केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार की अपील

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से बीसीसीआई मामले में अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील

Updated On: Jan 21, 2017 10:57 AM IST

FP Staff

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बीसीसीआई के बचाव में केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार की अपील

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को हटाकर साफ कर दिया था कि बीसीसीआई को लोढ़ा कमेटी की सारी सिफारिशें माननी होगी. लेकिन अब इस मामले में केंद्र सरकार भी बीसीसीआई के बचाव में उतर गई है.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से बीसीसीआई मामले में अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है. इस मामले में अगली सुनवाई 24 जनवरी को होगी और हो सकता है कि इसी दिन सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना दे.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को उनके पद से बर्खास्त कर दिया था.

बीसीसीआई में प्रशासक की नियुक्ति के मामले में एमिक्स क्यूरी गोपाल सुब्रमण्यम और अनिल दीवान ने सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को नौ नाम सौंपे हैं. इन नामों में पूर्व क्रिकेटर भी शामिल हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रशासक कमेटी में नौ लोगों को शामिल करना मुश्किल है.

जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए.एम खानवेलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो मैच चल रहे हैं, उम्मीद है कि उनमें कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि हमारे आदेश से CEO काम कर रहे हैं.

Although BCCI is a private body, but partially affects Govt too.Urging the Court to reconsider its decision: Attorney General Mukul Rohatgi

— ANI (@ANI_news) January 20, 2017

अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 'भले ही बीसीसीआई एक प्राइवेट संस्था है, लेकिन इसका कुछ हिस्सा सरकार को भी प्रभावित करता है. कोर्ट का आदेश है कि कोई भी सरकारी अफसर क्रिकेट एसोसिएशनों में शामिल नहीं हो सकता. लेकिन इसमें रेलवे, सशस्त्र बल और विश्वविद्यालयों की टीमें भी हैं जो सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं.'

Attorney General is appearing for 3 bodies - associations of railways,services, and universities #BCCI

— ANI (@ANI_news) January 20, 2017

सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने अपना पक्ष रखा कि 'फैसले से टीम के अधिकारों पर असर पड़ रहा है क्योंकि उनका वोट करने का अधिकार चला गया है और वे पूर्व सदस्य से एसोसिएट मेंबर बन गए हैं... इसलिए सुप्रीम कोर्ट अपने आदेशों पर पुनर्विचार करे.'

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