S M L

जन्मदिन विशेष: हर मुश्किल से लड़कर बेहतरीन 'कमबैक' करते थे मोहिंदर अमरनाथ

66 साल के हो गए भारत के महान बल्लेबाज मोहिंदर अमरनाथ

Updated On: Sep 24, 2017 12:52 PM IST

Rajendra Dhodapkar

0
जन्मदिन विशेष: हर मुश्किल से लड़कर बेहतरीन 'कमबैक' करते थे मोहिंदर अमरनाथ

मोहिंदर अमरनाथ ने अपना पहला टेस्ट मैच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ साल 1969 में खेला. तब वे उन्नीस साल के थे और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र थे.

मोहिंदर तब वैसे ऑलराउंडर थे, जैसे ऑलराउंडर भारत की टीम में अक्सर आते-जाते रहते थे यानी मध्यम गति गेंदबाज़ और ठीकठाक बल्लेबाज़. याद पड़ता है कि मोहिंदर की पहले ही टेस्ट में चर्चा इसलिए हो गई क्योंकि दूसरी इनिंग में उन्होंने दस रन के अंदर ही ऑस्ट्रेलिया के दो बल्लेबाज़ों, ओपनर कीथ स्टैकपोल और इयान चैपल को क्लीन बोल्ड कर दिया था. यह उस दौर में किसी भी भारतीय मध्यम तेज़ गेंदबाज़ के लिए बड़ी बात थी क्योंकि उनसे विकेट लेने की अपेक्षा नहीं की जाती थी. उस इनिंग में इरापल्ली प्रसन्ना ने छह विकेट लिए और ऑस्ट्रेलिया की पारी डेढ़ सौ रनों के आसपास सिमट गई थी.

भारत वह टेस्ट मैच फिर भी हार गया क्योंकि उसकी बल्लेबाज़ी दोनों इनिंग में खास नहीं चली. मोहिंदर ने आठवें नंबर पर बल्लेबाज़ी की और तब किसी को नहीं लगा था कि भविष्य में वो ऐसे बल्लेबाज़ बनेंगे जिनकी मिसाल दी जाएगी.

मोहिंदर उसके बाद टीम में आते-जाते रहे और यह आने-जाने का सिलसिला तब भी चलता रहा जब वो भारतीय टीम के सफलतम बल्लेबाज़ों में गिने जाने लगे. लेकिन शुरुआती सालों में भी उनके वो गुण दिखने लगे थे जिनके लिए आज भी उनकी मिसाल दी जाती है यानी साहस,जुझारूपन और हर नाकामी के बाद लौटने का जज़्बा.

मोहिंदर का अंतरराष्ट्रीय करियर लगभग उन्नीस बरस लंबा है. ये उनके इन्हीं गुणों का प्रमाण है.

हर खूंखार गेंदबाज का डट कर किया सामना

मोहिंदर का लगभग आधा करियर उस दौर में गुज़रा है जब बल्लेबाज़ हेल्मेट नहीं पहनते थे और भारत छोड़कर लगभग हर देश के पास खूंखार गेंदबाज़ थे. लिली, थॉमसन, इमरान खान और वेस्टइंडीज़ में एंडी रॉबर्ट्स, माइकल होल्डिंग, वैन डैनियल्स, जोएल गार्नर, मैलकम मार्शल, सिल्वेस्टर क्लार्क जैसे गेंदबाज़ उस दौर  में थे. किसी भी बल्लेबाज़ की श्रेष्ठता का एक सर्वमान्य पैमाना है कि अपने देश और विदेशी धरती पर उसके बल्लेबाज़ी औसत में कितना अंतर है. सचमुच बड़ा बल्लेबाज़ वह माना जाता है जिसके अपने देश और विदेश के प्रदर्शन में ज़्यादा फर्क न हो. मोहिंदर के आंकड़ों को देखकर लगता है कि उनका प्रदर्शन चुनौती के हिसाब से तय होता था यानी जितनी मुश्किल चुनौती उतना बेहतर प्रदर्शन.

यह भी पढ़े- पुण्यतिथि विशेष: जिसे देख गावस्कर ने सीखा तेज गेंदबाजी का सामना करना

उनका घरेलू टेस्ट मैचों में औसत 30 के आसपास है और देश के बाहर 51 से कुछ ऊपर. ऐसे आंकड़े क्रिकेट इतिहास में किसी के नहीं होंगे. उसमें भी उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन उन देशों में है जिनकी गेंदबाज़ी सबसे अच्छी थी यानी वेस्टइंडीज़, ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान. जिस वेस्टइंडीज़ के तूफानी आक्रमण के खिलाफ अच्छे-अच्छे बल्लेबाज़ एक अर्द्धशतक बनाने को तरस गए थे उसके खिलाफ उन्हीं के मैदानों पर मोहिंदर ने लगभग 55 के औसत से रन बनाए थे. और इससे कुछ बेहतर प्रदर्शन पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनका रहा है.

हर चोट के बाद मोहिंदर ने की शानदार वापसी

मोहिंदर अमरनाथ जितनी चोटें भी शायद ही किसी बल्लेबाज़ को लगी हों. लेखक रॉब बागची ने 'द गार्डियन' में उनके सिर पर लगी कुछ चोटों का ज़िक्र किया है. वे लिखते हैं, 'रिचर्ड हेडली ने उनके सिर को फ्रैक्चर कर दिया, इमरान खान ने भी उनका सिर चटकाया, मैल्कम मार्शल ने उनके दांत तोड़े,थॉमसन की गेंद ने उनका जबड़ा तोड़ा और माइकल होल्डिंग की गेंद ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया.'

इनमें से किसी भी चोट से किसी बल्लेबाज़ का करियर खत्म हो सकता था लेकिन अमरनाथ इन चोटों के बाद लौट कर आए और कई बेहतरीन पारियां तभी खेलीं. यह इंसान की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है कि कोई चीज अगर तेजी से उसकी ओर आए तो वह उसकी राह से हटने की कोशिश करता है. तेज गेंद खेलने की तकनीक इस स्वाभाविक प्रतिक्रिया के विपरीत होती है, उसमें आपको गेंद की लाइन में आना होता है. होता यह है कि अमूमन बल्लेबाज़ अपनी सुरक्षा के लिए तकनीक की उपेक्षा करने में ही भलाई समझता है.

कमजोरी को ताकत बनाकर गेंदबाजों को छकाया

अमरनाथ को बार-बार चोट लगने की वजह यह थी कि शुरुआती वर्षों में शॉर्ट गेंद के खिलाफ उनकी तकनीक कुछ कमजोर थी लेकिन थे वो लाला अमरनाथ के ही बेटे, गेंद की लाइन से हटना उनके उसूलों के खिलाफ था, चाहे चोट लग जाए.

धुन के पक्के मोहिंदर ने अपनी इस कमजोरी को दूर करने की ठानी. उन्हें मदद की पिता लाला अमरनाथ ने. मोहिंदर ने अपने स्टांस में बदलाव किया और घंटों हुक शॉट खेलने का अभ्यास किया. इस बीच क्रिकेट में हेल्मेट आ चुका था वह भी उनके लिए मददगार साबित हुआ.

साल 1982 - 83 के पाकिस्तान दौरे पर इमरान खान की टीम के खिलाफ वो भारत के सबसे कामयाब बल्लेबाज़ रहे. उन्होंने तीन शतक और तीन अर्धशतक लगाए. उसके बाद भारत की विश्वकप विजय में वो सेमीफाइनल और फाइनल में 'मैन ऑफ द मैच' रहे .

lala amarnath 2

उसके बाद भारत का वेस्टइंडीज़ दौरा हुआ जिसमें वेस्टइंडीज़ ने भारत पर विश्वकप हारने का गुस्सा उतारा. उस सीरीज में वेस्टइंडीज़ के गेंदबाज़ आग उगल रहे थे लेकिन अमरनाथ का प्रदर्शन इतना शानदार था, जितना उस पेस अटैक के खिलाफ कभी किसी बल्लेबाज़ का नहीं रहा.

उस दौरे पर उन्होंने दो शतक और चार अर्धशतक के साथ 594 रन 66.44 की औसत से बनाए. बार्बाडोस टेस्ट में मोहिंदर की ठुड्डी पर मैल्कम मार्शल की गेंद लगी और उन्हें अस्पताल जाना पड़ा. तब उन्होंने अठारह रन बनाए थे और भारत का स्कोर था एक विकेट पर 91 रन. अस्पताल से छह टांके लगवा कर मोहिंदर लौटे. भारत के छह विकेट पर 135 रन के स्कोर पर वे फिर बल्लेबाज़ी करने गए और बाउंसरों का मुकाबला करते हुए अस्सी रन बनाए. यह मोहिंदर की शैली थी.

मैदान के बाहर रहकर भी नहीं किया उसूलों से समझौता

मोहिंदर ने यह साहस अपने पिता से पाया था और साथ ही क्रिकेट के इतिहास , परंपराओं और मर्यादाओं का सम्मान करना भी सीखा था. लाला में जैसे समझौतापरस्ती नहीं थी और सही बात पर अड़ने का जज़्बा था, वह स्वभाव भी मोहिंदर को मिला है. लाला और अपने इस स्वभाव का नुकसान भी उन्होंने उठाया है, अपने खेल करियर में और उसके बाद भी. चयन समिति मे रहते हुए जब भारतीय टीम की लगातार हार के बाद उन्होंने महेंद्र सिंह धोनी को हटाना चाहा तो तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष एन श्रीनिवासन  के दबाव में उन्हें खुद हटना पड़ा. मोहिंदर जब खेल रहे थे तो इस बात की बड़ी चर्चा हुई थी कि उन्होंने चयनकर्ताओं को 'ए बंच ऑफ जोकर्स ' कहा था. जब वे खुद चयनकर्ता हुए तो उन्होंने साबित किया कि चयनकर्ता को कैसा होना चाहिए.

जो इंसान मार्शल की गेंद पर चोट खाकर छह टांके लगवा कर फिर मैदान में डट सकता है, वही ऐसी हिम्मत भी कर सकता है.

 

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Ganesh Chaturthi 2018: आपके कष्टों को मिटाने आ रहे हैं विघ्नहर्ता

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi