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गुंडप्पा विश्वनाथ: एक ऐसा कप्तान जिसके लिए जीत से ज्यादा खेल भावना जरूरी थी

साल1979-80 में हुए सिल्‍वर जुबली टेस्‍ट को विश्‍वनाथ की खेलभावना के लिए याद किया जाता है

Updated On: Feb 12, 2019 02:07 PM IST

FP Staff

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गुंडप्पा विश्वनाथ: एक ऐसा कप्तान जिसके लिए जीत से ज्यादा खेल भावना जरूरी थी

भारत में की ऐसे कप्तान हुए जिन्होंने देश को ऐतिहासिक जीत दिलाई. विदेशों में भारत का नाम रोशन किया और कई रिकॉर्ड अपने नाम किए. कपिल देव, सुनील गावस्कर, नवाब पटौदी और सौरव गांगुली जैसे खिलाड़ियों के बीच गुंडप्पा विश्वनाथ अपनी एक अलग जगह रखते हैं.  वह उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्हें उनकी खेल भावना के लिए जाना जाता हैं. आज (12 फरवरी) को वह अपना 71वां जन्मदिन मना रहे हैं.

साल 1979-80 में हुए सिल्‍वर जुबली टेस्‍ट को विश्‍वनाथ की खेलभावना के लिए याद किया जाता है. 1980 में मुंबई टेस्ट में इंग्लैंड के बल्लेबाज बॉब टेलर को विकेट के पीछे कैच आउट दिया गया था लेकिन वह पूरी तरह असहमत थे. भारत की कप्तानी संभाल रहे गुंडप्पा विश्वनाथ ने साथियों से सलाह कर अंपायर हनुमंता राव के पास जाकर अपील वापस ली कप्तान विश्‍वनाथ यह बात जान चुके थे कि टेलर आउट नहीं हैं. उन्होंने टेलर को दोबारा बैटिंग के लिए बुलाया. बाद में भारत यह मैच बॉब टेलर और इयान बॉथम की बल्‍लेबाजी के कारण ही हार गया.

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गुंडप्पा विश्वनाथ उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने रणजी करियर की शुरुआत डबल सेंचुरी से की. उन्होंने 1967 में मैसूर (अब कर्नाटक) की ओर से खेलते हुए आंध्र प्रदेश के खिलाफ 230 रन की पारी खेली थी. यह मैच विजयवाड़ा में खेला गया था. भारत के लिए खेलते हुए गुंडप्पा ने एक और शानदार रिकॉर्ड अपने नाम किया. विश्वनाथ ने जब भी किसी मैच में शतक लगाया भारत वह मैच कभी नहीं हारा. उन्होंने 14 मैचों में शतकीय पारी खेली जिसमें से 13 में उन्हें जीत हासिल की जबकि एक मैच ड्रॉ रहा.

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