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जन्मदिन विशेष, बीबी निंबालकर : उस पारी ने भारतीय क्रिकेट में अमर कर दिया निंबालकर को

भारतीय क्रिकेट इतिहास में बीबी निंबालकर की 443 रनों की पारी आज भी किसी बल्लेबाज द्वारा खेली गई सबसे बड़ी पारी है

Sachin Shankar Updated On: Dec 12, 2017 06:42 PM IST

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जन्मदिन विशेष, बीबी निंबालकर : उस पारी ने भारतीय क्रिकेट में अमर कर दिया निंबालकर को

भारतीय घरेलू क्रिकेट में किसी बल्लेबाज के तिहरे शतक जडऩे का कमाल तो हम सभी अक्सर सुनते रहते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि किसी ने कभी 400 रन का आंकड़ा भी पार किया है. जी हां, यह उपलब्धि बाबूसाहेब बाबासाहेब निंबालकर के नाम पर दर्ज है, जिन्हें बीबी निंबालकर के नाम से ज्यादा जाना जाता था. बीबी निंबालकर ने 1948 में महाराष्ट्र की ओर से नाबाद 443 रन की पारी खेली थी. यह आज भी भारतीय क्रिकेट इतिहास में किसी बल्लेबाज द्वारा खेली गई सबसे बड़ी पारी है.  इस पारी ने उन्हें भारतीय क्रिकेट में अमर बना दिया.

घरेलू क्रिकेट के सिकंदर

निंबालकर को राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रन मशीन कहा जाता था. घरेलू क्रिकेट के इस शानदार बल्लेबाज ने 26 साल मैदान पर गुजारे. इस दौरान उन्होंने घरेलू क्रिकेट में 47.93 की औसत से 4841 रन बनाए. रणजी ट्रॉफी में उन्होंने 56.72 की औसत से 3687 रन बटोरे, जो किसी भी हिसाब से बेहतरीन कहा जाएगा. अपनी रन मशीन होने की प्रतिष्ठा के अलावा वह उपयोगी मीडियम पेसर भी थे और जरूरत पड़ने पर विकेटकीपर की भूमिका भी निभा सकते थे. हर फन में माहिर निंबालकर को, लेकिन कभी टेस्ट मैच खेलने का मौका नहीं मिला. उन्हें 1948-49 में सिर्फ एक अनऑफिशियल टेस्ट खेलने का मौका मिला था, कॉमनवेल्थ टीम के खिलाफ. सेकेंड वल्र्ड वॉर की वजह से वह 1939 से लेकर 1946 तक क्रिकेट नहीं खेल सके, वरना सोचिए उनके आंकड़े और कितने बेहतरीन हो सकते थे.

1948 में महाराष्ट्र ने पूना क्लब में काठियावाड़ के खिलाफ चार दिवसीय रणजी ट्रॉफी मैच की मेजबानी की थी. मेहमान टीम 238 रन पर ढेर हो गई और महाराष्ट्र ने पहले दिन एक विकेट पर 132 रन बनाए, जिसमें निंबालकर का योगदान 24 रन था. उस समय 29 साल के दाएं हाथ के बल्लेबाज निंबालकर ने दूसरे दिन 277 रन जोड़े और उनका कुल स्कोर 301 रन हो गया. महाराष्ट्र ने तीसरे दिन की शुरुआत 587/2 से की. निंबालकर ने दो और पार्टनर (केवी भंडारकर 205 और एसडी देवधर 93) भी गंवा दिए. लेकिन उन्होंने अकेले  ही काठियावाड़ी गेंदबाजों की  बखिया उधेड़ना जारी रखा. निंबालकर ने 400 रन पूरे कर लिए और डॉन ब्रैडमैन के 452 रन की ओर बढ़ने लगे जो तब विश्व रिकॉर्ड था. चायकाल के समय वह  443 रन पर थे. स्कोर बोर्ड 826/4 दिखा रहा था. तभी काठियावाड़ ने घटिया चाल चली और मैच में हार स्वीकार कर ली. निंबालकर महज नौ रनों से ब्रैडमैन का रिकॉर्ड तोडऩे से वंचित रह गए.

ब्रैडमैन ने कहा था उनसे अच्छा खेले थे निंबालकर

वर्षों बाद निंबालकर ने खुलासा किया था कि ब्रैडमैन ने उनको एक व्यक्तिगत संदेश भेजा था. निंबालकर ने बताया कि उन्होंने कहा था कि तुम्हारी पारी मेरी पारी से ज्यादा अच्छी थी. जबकि ब्रैडमैन ने विश्व रिकार्ड बनाया था, जबकि मैंने  केवल भारतीय रिकॉर्ड. उसके बाद भी उन्होंने मेरी पारी को ज्यादा बेहतर बताया. रिकॉर्ड के लिए बताते चलें कि निंबालकर ने तब 494 मिनट बल्लेबाजी की थी और 49 चौके और एक छक्का लगाया.

निंबालकर को भारतीय टीम में खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन उनके मन में किसी को भी लेकर कोई दुर्भावना नहीं थी. एक बार उन्होंने यह जरूर कहा था कि टेस्ट टीम में खेलना शायद मेरे भाग्य में नहीं था. मुझे नहीं मालूम कि सेलेक्टर्स ने क्यों मुझे हमेशा उपेक्षित किए रखा. लेकिन यह बात मुझे वाकई दुखी करती थी कि मुझसे कम प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भी देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला.

निंबालकर इतने विनम्र थे कि अपने रिकॉर्ड को लेकर कोई जज्बात जाहिर नहीं करते थे. भारत ने भले ही कई महान बल्लेबाज पैदा किए, लेकिन निंबालकर अब भी सबसे बड़ी पारी खेलने वाले भारतीय बल्लेबाज हैं. उनकी पारी फर्स्ट क्लास क्रिकेट में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी पारी है. ब्रायन लारा (नाबाद 501, वारविकशर बनाम डरहम, 1994), हनीफ मोहम्मद (499, कराची बनाम वहावलपुर, कराची, 1958-59) और डॉन ब्रैडमैन (नाबाद 452, न्यू साउथ वेल्स बनाम क्ववींसलैंड, 1929-30) ही केवल उनसे आगे हैं. वह भले ही भारत के लिए टेस्ट नहीं खेल सके, लेकिन क्रिकेट इतिहास में हमेशा उनका नाम एक ऐसे नॉन टेस्ट क्रिकेटर के तौर पर दर्ज रहेगा जिसने फर्स्ट क्लास में सबसे बड़ी पारी खेली.

 

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