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बीसीसीआई 2018-19 के घरेलू सीजन में करेगा 2000 से ज्यादा मैचों का आयोजन

घरेलू कैलेंडर की शुरुआत 13 से 20 अगस्त तक महिला चैलेंजर ट्रॉफी के साथ होगी. पुरुष कैलेंडर की शुरुआत 17 अगस्त से नौ सितंबर तक चलने वाली दलीप ट्रॉफी के साथ होगी

FP Staff Updated On: Jul 18, 2018 08:26 PM IST

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बीसीसीआई 2018-19 के घरेलू सीजन में करेगा 2000 से ज्यादा मैचों का आयोजन

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) आगामी 2018-19 घरेलू सीजन में पुरुष और महिला टूर्नामेंट्स को मिलाकर सभी आयु वर्ग में कुल 2,017 मैचों का आयोजन करेगा. बीसीसीआई ने बुधवार को एक बयान जारी कर इस बात की जानकारी दी. घरेलू कैलेंडर की शुरुआत 13 से 20 अगस्त तक महिला चैलेंजर ट्रॉफी के साथ होगी. पुरुष कैलेंडर की शुरुआत 17 अगस्त से नौ सितंबर तक चलने वाली दलीप ट्रॉफी (गुलाबी गेंद से डे-नाइट टूर्नामेंट) के साथ होगी.

एक नवंबर से छह फरवरी तक खेली जाएगी रणजी ट्रॉफी

इसके बाद विजय हजारे (राष्ट्रीय वन टूर्नामेंट) टूर्नामेंट का आयोजन 19 सितंबर से 20 अक्टूबर तक होगा और इस दौरान 160 मैच खेले जाएंगे. रणजी ट्रॉफी एक नवंबर से छह फरवरी तक खेली जाएगी और इस टूर्नामेंट के दौरान भी 160 मैच खेले जाएंगे.

140 मैच खेले जाएंगे सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में

सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के लिए राष्ट्रीय टी-20 चैंपियनशिप में 140 मैच खेले जाएंगे. पुरुष अंडर 23 वर्ग में दो प्रारूप में 302 मैच (प्रत्येक प्रारूप में 151) खेले जाएंगे, जबकि अंडर-19 लड़कों के वर्ग में दो प्रारूप में 286 मैच (प्रत्येक प्रारूप में 143) होंगे. सीनियर महिला सत्र में 295 मैच, जबकि अंडर 23 वर्ग में 292 मैच होंगे.

रणजी ट्रॉफी में नौ नई टीमें शामिल

बीसीसीआई ने इस बार रणजी ट्रॉफी में नौ नई टीमों को शामिल किया है जिससे टीमों की संख्या 37 हो गई है. इन सभी टीमों को तीन इलीट ग्रुप-ए,बी,सी में बांटा जाएगा. ग्रुप-सी में 10 टीमें होंगी. नौ नई टीमों में अरुणाचल प्रदेश, बिहार, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, पुडुचेरी, सिक्किम और उत्तराखंड हैं. इन नौ टीमों को प्लेट ग्रुप में रखा गया है. इन टीमों में जो क्वार्टर फाइनल में जगह बनाएगी उसे अगले सीजन में ग्रुप-सी में रखा जाएगा. ग्रुप-सी से क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने वाली टीमें अगले सीजन में ग्रुप-ए और बी में खेलेंगी. सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में भी 37 टीमें होंगी.

लोढा सुधारों ने सभी को परेशानी में डाला

बीसीसीआई में कई अधिकारी चाहते थे कि पूर्वोत्तर के राज्यों को मजबूत जूनियर कार्यक्रम के जरिए शामिल किया जाए, लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों के रणजी ट्रॉफी में शामिल करने को लेकर लोढा सुधारों ने सभी को परेशानी में डाल दिया है.

बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘यह साजों सामान और उपकरणों को लेकर बुरे सपने की तरह होगा. अंपायर और मैच रेफरी जैसे मैच अधिकारियों से हमें अतिरिक्त काम कराना होगा जिन्होंने प्रत्येक दौर के बाद उबरने का समय नहीं मिलेगा. उन्हें लगातार यात्रा करनी होगी.’

मैच अधिकारियों की पड़ेगी कमी 

फिलहाल बीसीसीआई के पास इस व्यस्त कार्यक्रम की जरूरत के अनुसार पर्याप्त संख्या में मैच अधिकारी (अंपायर, मैच रेफरी, स्कोरर) नहीं हैं. इसके अलावा एक अन्य बड़ा मुद्दा पूर्वोत्तर के क्रिकेट मैदान हैं.

पूर्वोत्तर राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,‘ शिलांग में मेघालय के मैदान और दीमापुर (नगालैंड) में एक प्रथम श्रेणी स्तर के मैदान को छोड़ दिया जाए तो अन्य राज्य अपनी सुविधाओं के पुनर्गठन और सुधार की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं. साथ ही हमें मौसम और रोशनी को भी ध्यान में रखना होगा.’

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