S M L

‘मक्कारों’ की भीड़ से स्टीव स्मिथ और बेनक्रॉफ्ट को क्यों अलग करती  उनकी ‘ईमानदारी’ ! 

आज तक बॉल टेंपरिंग के मामले में फंसे किसी भी क्रिकेटर कभी अपनी गतली नहीं मानी वहीं स्मिथ और बेनक्रॉफ्ट ने मीडिया का सामने अपना गुनाह कबूला है

Jasvinder Sidhu Jasvinder Sidhu Updated On: Mar 27, 2018 01:18 PM IST

0
‘मक्कारों’ की भीड़ से स्टीव स्मिथ और बेनक्रॉफ्ट को क्यों अलग करती  उनकी ‘ईमानदारी’ ! 

सबसे पहली और साफ बात. ऑस्ट्रेलियन कप्तान स्टीव स्मिथ और ओपनर केमरन बेनक्रॉफ्ट ने केपटाउन टेस्ट मैच में गेंद से रिवर्स स्विंग हासिल करने के लिए, उसे खराब करने की शर्मनाक करतूत की. उसके लिए आईसीसी के नियमों के तहत दोनों के कड़ी सजा मिलनी चाहिए.

जाहिर है, इस हरकत से ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कभी नहीं होने वाली. भविष्य में जब भी ऐसा विवाद होगा और इतिहास के पन्ने पलटे जाएंगे, स्मिथ और बेनक्रॉफ्ट का नाम सबसे पहले पेज पर दिखाई देगा.

भारतीय क्रिकेटरों पर भी लगे हैं आरोप

भारत में इन दोनों की हरकत को लेकर काफी कड़ी प्रतिक्रिया हुई है. मीडिया का एक वर्ग आईसीसी को निशाना बना रहा है. तर्क दिया जा रहा है कि आईसीसी ने इन दोनों को सस्ते में छोड़ दिया. स्मिथ पर ताउम्र प्रतिबंध लगाने की मांग हो रही है. भारतीय मीडिया बॉल टेंपरिंग को मैच फिक्सिंग के साथ जोड़ रहा है.

आलोचक शायद भूल गए हैं कि यह गेंद के साथ छेड़छाड़ करने का पहला मामला नहीं है. ऐसा भी नहीं है कि किसी भारतीय खिलाड़ी पर ऐसे इल्जाम नहीं लगे. अभी 17 महीने पहले की ही बात है.

राजकोट में इंग्लैंड के खिलाफ राजकोट टेस्ट मैच में भारतीय कप्तान विराट कोहली पर आरोप लगा कि उन्होंने च्युइंगम के सलाइवा को गेंद चमकाने के लिए इस्तेमाल किया. आरोपों को दावे में यू-ट्यूब पर उस कथित घटना के वीडियो आज भी मौजूद है. लेकिन तकनीकी कारणों से भारतीय कप्तान के खिलाफ न कोई शिकायत हुई और न ही कोई कार्रवाई.

आईसीसी के नियम कहते हैं कि इस तरह की किसी भी जालसाजी की शिकायत मैच के दौरान या मैच खत्म होने के पांच दिन के भीतर होनी चाहिए. विराट के मामले में दिन ज्यादा हो गए थे.

कभी किसी ने नहीं कबूला गुनाह

2001 में पोर्टएलिजाबेथ टेस्ट मैच में सचिन तेंदुलकर पर भी गेंद की सिलाई उखाड़ने के आरोप में एक मैच का प्रतिबंध लगा. खुद दक्षिण अफ्रीकी फाफ ड्यू प्लेसी दो बार गेंद के साथ कलाकारी करते पकड़े गए हैं. उन्हें सजा भी मिली.

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद आफरीदी ने तो गेंद ही चबा ली. और भी कई मामले हैं, जहां पर गेंद की शेप खराब करने के लिए खिलाड़ियों से कैमरों और अंपायरों को धोखा देने के लिए हर तरीका अपनाया. लेकिन स्टीव स्मिथ और बेनक्रॉफ्ट के मामले और बाकियों में एक बड़ा अंतर है.

India's star batsman Sachin Tendulkar tosses the ball up while bowling at the team's final training session at the Wanderers Stadium in Johannesburg 22 March 2003. India face Australia in the final of the ICC Cricket World Cup to be played tomorrow 23 March. AFP PHOTO/Adrian DENNIS / AFP PHOTO / ADRIAN DENNIS

इन दोनों ने लाइव मीडिया के सामने स्वीकार किया कि उन्होंने यह काली करतूत की है और वह इसके लिए जिम्मेदार हैं, शर्मिंदा हैं और हर सजा भुगतने के लिए तैयार हैं. इससे पहले ऐसा आरोप झेलने वाले खिलाड़ियों ने कभी नहीं माना और हर कानून और अपील का सहारा लिया.

भारतीयों के मामले में तो आईसीसी को एक टेस्ट मैच का दर्जा ही खारिज करना पड़ा, क्योंकि भारतीय बोर्ड में सचिन पर आरोप लगाने वाले अंपायर माइक डेनेस को स्वीकर करने से इनकार कर दिया.

रही बात इस प्रकरण को मैच फिक्सिंग से जोड़ने की, तो उसे सिर्फ एक ही संदर्भ में जोड़ा जा सकता है. 2000 के मैच फिक्सिंग कांड में साउथ अफ्रीकी कप्तान हैंसी क्रोनिए ने चर्च में मत्था टेकने के बाद जनता में स्वीकार कर लिया कि उन्होंने भारत के खिलाफ वनडे मैच में 20 से भी कम रन बनाने के लिए भारतीय बुकी से करीब 15 हजार डॉलर लिए थे.

क्रोनिए ने साउथ अफ्रीका में जांच कर रहे किंग कमीशन के सामने खुलासा किया था कि भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुदीन ने ही उसे उक्त बुकी से मिलवाया  था. अकेले अजहर ही नहीं थे जो फिक्सिंग की जांच के दायरे में आए.

The front pages of the South African morning newspapers all show, 12 April 2000, the face of Hansie Cronje, former captain of the national Cricket team, during his press conference in Cape Town yesterday, in which he admitted to have received illegal sums of money. (ELECTRONIC IMAGE) / AFP PHOTO / YOAV LEMMER

सीबीआई के पास ऑडियो रिकॉर्डिंग्स हैं जिनमें भारत के स्टार क्रिकेटरों ने स्वीकार किया था कि उन्होंने डॉलरों के लिए देश को बेचा दिया था. वह बात अलग है कि उन्होंने कोर्ट में अपने ऊपर लगे आरोपों को मानने से इनकार कर दिया भारतीय न्याय प्रणाली में खामियां उनके पाक-साफ निकलने में मददगार साबित हुईं.

लेकिन शर्मनाक पहलू यह है कि आज वही दागी भारतीय टीवी चैनलों पर क्रिकेट के एक्सपर्ट के तौर पर स्मिथ और बेनक्रॉफ्ट की लानत-मलानत कर रहे हैं. जाहिर है कि स्मिथ और बेनक्रॉफ्ट ने बेइमानों की भीड़ में शामिल हो जाने के बाद भी अपनी जालसाजी को ईमानदारी से स्वीकार कर खुद का बाकियों से अलग कर लिया है. दुनिया का कोई भी धर्म हो या सभ्यता, सभी के दरवाजे क्षमा के लिए हमेशा खुले हैं. इसलिए स्मिथ पर आजीवन प्रतिबंध की मांग शर्मनाक है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
गोल्डन गर्ल मनिका बत्रा और उनके कोच संदीप से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi