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नेहरा ने उतारा सेहरा, कतार में और भी कई चेहरे

नेहरा के रिटायरमेंट ने कई खिलाड़ियों के करियर पर सवाल खड़े कर दिए हैं

Updated On: Nov 04, 2017 02:33 PM IST

Neeraj Jha

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नेहरा ने उतारा सेहरा, कतार में और भी कई चेहरे

आशीष नेहरा ने आखिरकार क्रिकेट को अलविदा कह दिया. उन्होंने रवि शास्त्री और विराट कोहली को बताया कि वह एक नवंबर से आगे नहीं खेलना चाहते. नेहरा को पता था की भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह बेहतरीन फाॉर्म में हैं और उनका रिटायरमेंट टीम हित में उचित होगा. इस तरह का निर्णय लेने वाला खुद खिलाड़ी से कोई और बेहतर नहीं हो सकता है.

उन्होंने मन की बात सुनी और सोच लिया की अब वक्त आ चुका है की आने वाले खिलाड़ियों की राह आसान की जाए. जो लोग उन्हें जानते हैं उन्हें पता है की वह बेहद ही शालीन क्रिकेटर हैं. उनमे एक तेज गेंदबाज होने के भले ही वो सारे गुण मौजूद ना हो, लेकिन अपने पूरे करियर में बतौर गेंदबाज उन्होंने दिग्गज बल्लेबाजों को तंग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

धोनी और कोहली ने नेहरा को भेंट की 'खास ट्रॉफी'

विराट कोहली और महेंद्र सिंह धोनी ने उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए उनके आखिरी मैच से पहले अपनी तरफ से एक फेयरवेल ट्रॉफी दी, जिसे देखकर क्रिकेट प्रशंशकों को वो तस्वीर याद आ गई जब आशीष नेहरा ने विराट को एक स्कूल मैच में अच्छे प्रदर्शन के लिए अवार्ड दिया था. जब नेहरा ने इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखा था तब कोहली सिर्फ 11 साल के थे.

2003 वर्ल्ड कप के प्रदर्शन ने बनाया हीरो

कौन भूल सकता है 2003 वर्ल्ड कप का वो मंजर जब उन्होंने सिर्फ 23 रन देकर 6 विकेट लेकर इंग्लैंड की बखिया उधेड़ दी थी. मैच में बोलिंग करने के दौरान नेहरा एक वक्त इतना ज्यादा थक गए कि उन्हें मैदान में ही उल्टी आ गई. ऐसा लगने लगा कि भारतीय टीम का सबसे शानदार गेंदबाज शायद अपना स्पैल पूरा नहीं कर पाएगा. लेकिन नेहरा हार मानने वाले नहीं थे, उन्होंने मैदान में वापसी की और टीम इंडिया को जीत दिलवाकर ही दम लिया. कप्तान सौरव गांगुली, जो उन्हें प्यार से पोपट पुकारा करते थे, ने मैच के बाद प्रेस कांफ्रेंस में बताया की वह पिछले दो दिन से एड़ी की चोट से परेशान चल रहे थे और उसके बाद भी जो प्रदर्शन दिखाया है वो उन्होंने अपने पूरे करियर में नहीं देखा है. ये बाॉलिंग फिगर आज भी किसी भारतीय द्वारा वर्ल्ड कप में किए गए सबसे अच्छे प्रदर्शन की लिस्ट में सबसे ऊपर है.

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दो साल बाद ही नेहरा ने श्रीलंका के खिलाफ फिर से 6 विकेट लेकर अपनी काबिलियत को साबित कर दिया. वर्ल्ड कप 2011 का सेमीफाइनल का वो स्पेल कौन भूल सकता है जिसकी मदद से भारत ने पाकिस्तान को हार की तरफ ढकेल दिया था. मोहम्मद अजहरुद्दीन के नेतृत्व में 1999 में भारत की ओर से अपना पहला मैच खेलने वाले नेहरा ने 17 टेस्ट, 120 वनडे और 27 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं. उन्होंने टेस्ट मैचों में 44, वनडे में 157 वनडे और टी20 अंतरराष्ट्रीय में 34 विकेट लिए है.

जेंटलमैन बॉलर

आशीष नेहरा ने कभी तेज गेंदबाज वाला स्वभाव दिखाया ही नहीं. उनके कोच तारक सिन्हा कहते हैं की वह एक जेंटलमैन बॉलर थे जो कभी भी ग्लैमर के चक्कर में नहीं पड़े और कई युवा खिलाडियों की मदद करने में सबसे आगे रहे. किसी की मदद भी करनी होती थी तो वह बिना किसी को बताए कर देता था. तारक सिन्हा के मुताबिक जब कड़ी मेहनत करने के बावजूद उनका दिल्ली अंडर-19 टीम में चयन नहीं हुआ तो वह क्रिकेट से मुंह मोड़ना चाहा, लेकिन हमने उसे संभाला और समझाया. वह भारत के उन गिने-चुने खिलाड़ियों में हैं, जिन्होंने पहले रणजी खेला और उसके बाद अंडर-19 टूर्नामेंट में सेलेक्शन हुआ.

चोटों से प्रभावित करियर

"कम बैक किंग” नाम से मशहूर पूरे करियर में उन्होंने कुल 12 सर्जरी कराई, लेकिन उसके बावजूद वह अपनी मेहनत और जूनून की बदौलत अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में करीब 19 साल टिके रहे. उन्हें सात कप्तानों के अंदर खेलने का मौका मिला. इतना टिकना इतना आसान नहीं होता है खासकर भारत में जहां हर एक मैच में आपके प्रदर्शन को मापा और तौला जाता है. अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में वो भले ही लगातार टीम का हिस्सा नहीं रहे, लेकिन समय-समय पर उन्होंने अपने बेहतरीन और सटीक गेंदबाजी से सबको चौंकाया है. उन्होंने अपने क्रिकेट करियर के अधिकतर समय में पूरा ध्यान लाइन-लेंथ पर लगाया.

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रणनीति में माहिर

नेहरा की काबिलियत सिर्फ बोलिंग नहीं रही है, बल्कि वह रणनीति बनाने में भी माहिर रहे हैं. उन्हें उनकी डेथ ओवर में किफायती गेंदबाजी के लिए जाना जाता है. मैच के अंतिम ओवरों में नेहरा रन रोकने और विकेट निकालने में माहिर रहे हैं. आपको अगर याद हो तो पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कई मैचों के आखिरी ओवर्स में उनके अनुभव का फायदा उठाया है. और ये कोई चौंकानेवाली बात नहीं होगी अगर उन्हें बीसीसीआई आनेवाले दिनों में बतौर टीम इंडिया के बॉलिंग कोच के तौर पर रख लें.

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दूसरे खिलाड़ियों के लिए संकेत

नेहरा ने रिटायरमेंट का एलान कर कई लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश छोड़ा है. बाकी कई और पूर्व खिलाड़ियों की तरह नेहरा चाहते तो भारत के लिए कुछ और साल खेल सकते थे, लेकिन उन्हें पता था की उनका समय समाप्त हो चुका है. ये समझ हमारे कई दिग्गजों को समय पर नही आई. सचिन तेंदुलकर या फिर वीवीएस लक्ष्मण सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ कुछ हद तक इस मामले में पेशेवर रहे. लेकिन वीरेंद्र सहवाग जब तक ये फैसला लेते तब तक काफी देर हो चुकी थी.

कई और खिलाड़ी रिटायरमेंट की कतार में

भारतीय क्रिकेट जगत में कई और भी खिलाड़ी हैं जिनकी समय अवधि खत्म हो चुकी है, लेकिन फिर भी वे आस लगाए बैठे हैं. इसमें सबसे पहले जिस खिलाड़ी का नाम आता है वह हैं हरभजन सिंह. पता नहीं उन्हें किस दिन का इंतजर है. ऐसा भी नहीं है की वह घरेलु क्रिकेट खेल रहे हों सुरेश रैना की तरह. ऐसा ही कुछ हाल उनके परम मित्र युवराज सिंह का भी है जो 2019 वर्ल्ड कप में खेलने का सपना संजोये बैठे हैं.

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पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी ने हाल फिलहाल इन दोनों खिलाड़ियों के रणजी मैचों में हिस्सा ना लेने के लिए जमकर लताड़ा है. इसके अलावा गौतम गंभीर और इरफान पठान के लिए भी अब फैसला लेने का समय आ गया है. उन्हें अब सोचना पड़ेगा की आगे क्या है उनके लिए. टीम इंडिया में जिस तरह युवा खिलाड़ी प्रदर्शन कर रहे है उस हिसाब से तो इनकी टीम में वापसी संभव नहीं दिख रही है. इरफान को तो रणजी टीम से भी बतौर कप्तान और खिलाड़ी बाहर कर दिया गया है.

कुछ और भी खिलाड़ी हैं जो ना जाने रिटायरमेंट के लिए किस वक्त का इंतजार कर रहे हैं, इसमें आरपी सिंह, प्रवीण कुमार और अमित मिश्रा हैं जिन्हें अब अपने आगे के करियर के बारे में गंभीरता से सोचने की जरूरत है.

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