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एशेज : बल्लेबाजों पर होगा इंग्लैंड का दारोमदार, ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज लेंगे अग्निपरीक्षा

इंग्लैंड अगर एशेज जीतने का सपना पाले बैठा है तो उसे दुआ करनी चाहिए कि इस बार उसके बल्लेबाज अच्छा प्रदर्शन करें

Peter Miller Updated On: Nov 21, 2017 10:15 PM IST

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एशेज : बल्लेबाजों पर होगा इंग्लैंड का दारोमदार, ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज लेंगे अग्निपरीक्षा

ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच 23 नवंबर से एशेज सीरीज शुरू होने जा रही है. एशेज के दौरान कहने को तो दोनों देशों की टीम क्रिकेट खेलती हैं, लेकिन उनका मुकाबला किसी जंग से कम नहीं होता है. क्रिकेट जगत के सबसे पुराने और चिर प्रतिद्वंद्वी इन दोनों टेस्ट खेलने वाले देशों के खिलाड़ी एशेज सीरीज पर कब्जे के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देते हैं. एशेज सीरीज का जितना इंतजार ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के खिलाड़ियों को होता है, उतनी बेसब्री से दुनियाभर के क्रिकेट प्रेमी भी इस सीरीज का इंतजार करते हैं. इस वक्त हर क्रिकेट प्रेमी के जेहन में एक ही सवाल है कि इस बार एशेज सीरीज कौन जीतेगा.

इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की टीम के हालिया प्रदर्शन पर नजर डालें, तो एशेज में इस बार कंगारू टीम का पलड़ा भारी नजर आ रहा है. लिहाजा इंग्लैंड अगर एशेज जीतने का सपना पाले बैठा है, तो उसे दुआ करनी चाहिए कि इस बार उसके बल्लेबाज अच्छा प्रदर्शन करें, वहीं ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों का प्रदर्शन फीका रहे. सीरीज में ऑस्ट्रेलिया के सामने टिके रहने के लिए इंग्लैंड को इन दोनों चमत्कारों की सख्त जरूरत है.

जीत की दावेदार नजर आ रही है कंगारू टीम

इस एशेज सीरीज में ऑस्ट्रेलिया की टीम बेहद मजबूत, संतुलित और जीत की दावेदार नजर आ रही है. ऐसे में आने वाले दिनों में अगर दुनिया भर के क्रिकेट प्रशंसकों का ध्यान ऑस्ट्रेलिया की ओर हो जाए तो हैरत की बात नहीं होगी. क्रिकेट की लगभग सारी शक्तियां, सत्ता और ग्लैमर भले ही खिसक कर भारतीय उप महाद्वीप में आ गए हों, लेकिन टेस्ट क्रिकेट की सबसे पुरानी प्रतियोगिता यानी एशेज की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है.

फिर भी आश्चर्यचकित कर सकती है कोई एक टीम

क्रिकेट के मैदान पर इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच जब भी कोई भिड़ंत होती है, उस जैसा रोमांच कहीं और कम ही देखने को मिलता है. ऐसा देखा गया है कि, एशेज के दौरान अक्सर कोई टीम ऐसा अप्रत्याशित प्रदर्शन कर देती है कि, क्रिकेट प्रेमी हैरत में पड़ जाते हैं. ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की क्रिकेट टीमों के कट्टर समर्थक और अंधे अनुयायी तक अपनी टीम के प्रदर्शन के बारे में सही-सही अनुमान लगाने में नाकाम रहते हैं. फिलहाल ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के समर्थकों के बीच वाकयुद्ध अपने चरम पर है, जिसका दुनियाभर के क्रिकेट प्रेमी जमकर लुत्फ उठा रहे हैं. लेकिन याद रखने वाली बात यह है कि, हमेशा की तरह इस बार भी एशेज में कोई एक टीम हमें आश्चर्यचकित कर सकती है.

 मेजबान टीम रही है फायदे में 

पिछली कई सीरीज में ऐसा देखने को मिला है कि, एशेज में घरेलू टीम फायदे में रही है, यानी जीत मेजबान टीम के हिस्से में आई. ऐसे में एशेज 2017-18 का संस्करण भी पिछली कुछ सीरीज से अलग नजर नहीं आ रहा है. पिछली एशेज सीरीज में मिचेल जॉनसन ने इंग्लैंड की बल्लेबाजी को उसके ही घर में तबाह कर दिया था. अब वही जॉनसन कंगारू टीम के लिए नई भूमिका निभा रहे हैं. जॉनसन ही वह शख्स हैं, जिनकी देखरेख में हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की ज्यादातर पिचों का निर्माण किया गया है. जाहिर हैं, जॉनसन ऑस्ट्रेलिया की तेज और उछाल भरी पिचों पर इंग्लैंड के बल्लेबाजों की कड़ी परीक्षा लेना चाहते हैं.

इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी की बात करें तो, दोनों टीमों के पास दो विश्व स्तरीय बल्लेबाज हैं. इंग्लैंड के पास जहां एलिस्टेयर कुक और जो रूट हैं, वहीं ऑस्ट्रेलिया के पाले में डेविड वार्नर और स्टीव स्मिथ जैसे धुरंधर बल्लेबाज हैं. वहीं अगर गेंदबाजी की बात करें तो, दोनों पक्षों की गेंदबाजी इस बार थोड़ी कमजोर नजर आ रही है. ऑस्ट्रेलिया की टीम जहां अपने गेंदबाजों की चोट की समस्या परेशान है, वहीं इंग्लैंड के गेंदबाज हमेशा की तरह फिटनेस और विदेशी परिस्थितियों की समस्या से जूझ रहे हैं.

मजबूत जोड़ीदार के लिए तरस रहे हैं ओपनर कुक  

साल 2013 में इंग्लैंड में हुई एशेज सीरीज की तरह इस बार भी परिस्थितियां घरेलू टीम के पक्ष में हैं. इंग्लैंड की तरह ऑस्ट्रेलिया की टीम भी अपने बल्लेबाजों के प्रदर्शन से थोड़ा चिंतित है, लेकिन फिर भी सीरीज में कंगारुओं का ही पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है. इंग्लैंड की बल्लेबाजी 2012 के बाद से ही बड़ी समस्या में घिरी हुई है. दरअसल एंड्रयू स्ट्रॉस और कुक की सलामी जोड़ी बरसों तक इंग्लैंड टीम के लिए पारी की शुरुआत करने उतरती रही. इस दौरान कुक के साथ किसी और सलामी बल्लेबाज को एक बार भी नहीं आजमाया गया.

जिसका नतीजा ये रहा कि स्ट्रॉस के संन्यास लेने के बाद से कुक एक अदद मजबूत जोड़ीदार के लिए तरस रहे हैं. इंग्लैंड अब तक 13 अलग-अलग सलामी बल्लेबाजों को कुक के साथ ओपनिंग करने के लिए उतार चुका है, लेकिन कोई भी बल्लेबाज स्ट्रॉस की भरपाई नहीं कर पाया है. हालांकि बतौर ओपनर जोस बटलर ने अपने प्रदर्शन से सभी को काफी प्रभावित किया है. लेकिन इंग्लैंड का यह नव नियुक्त कप्तान ओपनिंग करने के बजाए नंबर चार पर बल्लेबाजी करना ज्यादा पसंद करता है.

युवा बल्लेबाज मार्क स्टोनमैन पर होंगी निगाहें

फिलहाल सबकी निगाहें इंग्लैंड के युवा बल्लेबाज मार्क स्टोनमैन पर टिकीं हैं, जिन्होंने वार्म अप मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया है. स्टोनमैन के नाम हर चौथे मैच में अर्धशतक दर्ज है, वहीं क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया इलेवन के खिलाफ खेले गए हालिया मैच में उन्होंने शानदार शतक भी जड़ा है. स्टोनमैन ने वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में संतोषजनक प्रदर्शन किया था. स्टोनमैन ऑस्ट्रेलिया में कई प्रथम श्रेणी मैच खेल चुके हैं. यानी उनके पास ऑस्ट्रेलिया की उछाल भरी तेज पिचों पर बल्लेबाजी करने का पर्याप्त अनुभव भी है. ऐसे में उनके पास अच्छा प्रदर्शन कर खुद को साबित करने का बेहतरीन मौका है.

इंग्लैंड नंबर तीन बल्लेबाज को लेकर परेशान

इंग्लैंड की टीम सिर्फ सलामी बल्लेबाजों की समस्या से ही परेशान नहीं है, बल्कि अंग्रेज टीम के पास कोई भी ऐसा खिलाड़ी नहीं है, जो निरंतर नंबर तीन पर बल्लेबाजी कर सके. इंग्लैंड टीम में नंबर तीन पर खेलने के लिए जिन दो बल्लेबाजों में होड़ लगी है, उनमें से एक हैं जेम्स विंस और दूसरे बल्लेबाज हैं गैरी बैलेंस. लेकिन इन दोनों बल्लेबाजों का टेस्ट करियर काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है. जेम्स विंस ने पिछली गर्मियों में छह टेस्ट मैच खेले थे, जिनमें उन्होंने 19.27 के औसत से रन बनाए, जबकि उनका उच्चतम स्कोर 42 रहा. यही नहीं विंस काउंटी क्रिकेट में भी खास प्रदर्शन नहीं कर पाए. हैंपशर के लिए खेलते हुए विंस ने 35.14 के औसत से महज 738 रन ही बनाए.

वहीं, गैरी बैलेंस को काफी अरसे बाद इस साल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले दो मैचों के लिए टेस्ट टीम में शामिल किया गया था. बैलेंस फिलहाल काफी अच्छी फॉर्म में हैं और काउंटी क्रिकेट के इस सीजन में खासे कामयाब रहे हैं. यॉर्कशर के लिए खेलते हुए बैलेंस ने 67.93 के औसत से 951 रन बनाए हैं. बैलेंस ने अपने टेस्ट करियर की शुरूआत शानदार ढंग से की थी, लेकिन बाद में उनके प्रदर्शन में काफी गिरावट आई. जिसके चलते उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. फिलहाल बैलेंस अपने करियर के आगाज वाला प्रदर्शन दोहराने के लिए संघर्ष करते नजर आ रहे हैं. बैलेंस ने अपने पहले 10 टेस्ट मैचों में 70 की औसत से रन बनाए थे, लेकिन बाद के 13 टेस्ट मैचों में उनका औसत 40 से भी नीचे चला गया.

बैलेंस और विंस शानदार खिलाड़ी हैं, लेकिन तकनीक स्तर पर दोनों ही लड़खड़ाते दिखाई देते हैं. ऐसे में ऑस्ट्रेलिया की पिचों पर मिशेल स्टार्क, पैट कमिंस और जोश हैज़लवुड जैसे तूफानी गेंदबाजों के सामने दोनों को खासी मुश्किल पेश आ सकती है. बैलेंस और विंस ने अगर वक्त रहते अपनी बल्लेबाजी की तकनीक में सुधार नहीं किया तो, ये एशेज सीरीज उनके लिए बुरा सपना भी साबित हो सकती है.

बेयरस्टो के कंधों पर मध्य क्रम की जिम्मेदारी

वहीं, अगर इंग्लैंड टीम के मध्य क्रम की बात की जाए तो, बेन स्टोक्स की गैरमौजूदगी में जॉनी बेयरस्टो के कंधों पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी होगी. हालांकि बतौर बल्लेबाज बेयरस्टो का कद उस स्तर का नहीं है, जिस श्रेणी में कुक और रूट आते हैं. लेकिन इस बात से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है कि बेयरस्टो अपनी बल्लेबाजी को लगातार निखारते हुए इंग्लैंड की महान बल्लेबाजी परंपरा की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं. टेस्ट क्रिकेट में बेयरस्टो अब तक लगभग 3000 रन बना चुके हैं. खराब शुरुआत के बाद अब रन बनाने का उनका औसत धीरे-धीरे सुधर रहा है. इंग्लैंड को अगर एशेज में जीत का परचम लहराना है तो, बेयरस्टो को सीरीज में ढेर सारे रन बनाने होंगे.

ऑस्ट्रेलिया की पिचों पर खेलने का लुत्फ लेते हैं  मलान

डेविड मलान इस सीरीज़ में इंग्लैंड के लिए पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी कर सकते हैं. उन्होंने वार्म अप मैचों में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है. मलान ऐसे खिलाड़ी नजर आते हैं जिन्हें ऑस्ट्रेलिया की पिचों पर खेलने में मजा आता है. लेकिन सिर्फ वार्म अप मैचों के आधार पर मलान के प्रदर्शन के बारे में भविष्यवाणी करना बड़ी गलती होगी. ऐसा इसलिए क्योंकि मलान ने वार्म अप मैचों में जिन खिलाड़ियों के खिलाफ क्रिकेट खेला है, उन्हे विश्वस्तरीय नहीं माना जा सकता है. यानी मलान ने वार्म अप मैचों में अपेक्षाकृत कमजोर टीमों के खिलाफ अपने बल्ले से रन बरसाए हैं. लिहाजा उनकी अग्निपरीक्षा तो ऑस्ट्रेलिया की पेस बैटरी के सामने ही होगी. वैसे मलान की बल्लेबाजी हमेशा से अनिश्चितता से भरी रही है.

एंडरसन और ब्रॉड का विकल्प नहीं

दोनों ही टीमों ने अपनी बल्लेबाजी पर खासा ध्यान दिया है. लिहाजा असमानता सिर्फ गेंदबाजी के क्षेत्र में नजर आती है. इंग्लैंड टीम में स्टोक्स तो गैरहाजिर हैं ही, साथ ही टोबी रोलैंड-जोंस, स्टीवन फिन और मार्क वुड भी टीम से बाहर हैं. ऐसे में ऑस्ट्रेलियाई शीर्ष क्रम से निबटने की सारी जिम्मेदारी जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड पर होगी. दोनों ही गेंदबाज किसी भी टीम की बल्लेबाजी तहस-नहस करने का माद्दा रखते हैं. लेकिन पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के दौरान अगर इन दोनों गेंदबाजों में से कोई एक चोटिल हो गया तो, इंग्लैंड टीम के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है. उन हालात में जैक बॉल, क्रेग ओवरटन या टॉम करन को टीम में शामिल किया जा सकता है. हालांकि इन तीनों गेंदबाजों के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का ज्यादा तजुर्बा नहीं है.

 मोइन अली की महत्वपूर्ण भूमिका

स्विंग और सीम गेंदबाजी की बेंच स्ट्रैंथ में कमी के चलते इंग्लैंड टीम में मोइन अली की भूमिका बढ़ गई है. इंग्लैंड को सीरीज की रेस में बनाए रखने के लिए मोइन अली को हर हाल में अच्छा प्रदर्शन करना होगा. अगर मोइन अली ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को बांधने में नाकाम रहे तो, इंग्लैंड की तेज गेंदबाजों पर बोझ बढ़ जाएगा और उन्हें ज्यादा ओवर फेंकने पड़ेंगे. वहीं मोइन के नाकाम होने पर इंग्लैंड टीम अगर किसी अनुभवहीन गेंदबाज पर भरोसा करेगी, तो ये फैसला उसे काफी महंगा भी पड़ सकता है.

दमदार है ऑस्ट्रेलिया का गेंदबाजी आक्रमण

वहीं स्टार्क, कमिंस, हेजलवुड और नाथन लियोन जैसे गेंदबाजों के रहते ऑस्ट्रेलिया का गेंदबाजी आक्रमण काफी खतरनाक नजर आ रहा है. घरेलू माहौल और पिचों पर कंगारू गेंदबाजों का यह दस्ता इंग्लैंड टीम के लिए और भी घातक साबित हो सकता है. लिहाजा एशेज पर कब्जे के लिए इंग्लैंड को न सिर्फ अपने बल्लेबाजों से अच्छे प्रदर्शन की दरकार है, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के घटिया प्रदर्शन की भी सख्त जरूरत है.

वैसे आप ऑस्ट्रेलिया पर 4-1 से सीरीज जीतने की शर्त लगा सकते हैं.

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