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चैंपियंस ट्रॉफी 2017: क्या आमिर की शानदार पारी से धुल गए फिक्सिंग के दाग?

मोहम्मद आमिर ने सरफराज से साथ मिलकर पाकिस्तान को सेमीफाइनल में पहुंचाया

Updated On: Jun 13, 2017 11:23 AM IST

Sumit Kumar Dubey Sumit Kumar Dubey

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चैंपियंस ट्रॉफी 2017: क्या आमिर की शानदार पारी से धुल गए फिक्सिंग के दाग?

चैंपियंस ट्रॉफी में ग्रुप बी के मुकाबले में श्रीलंका के खिलाफ पाकिस्तान के बल्लेबाज फाहिम अशरफ रन आउट हुए तो पाकिस्तान समर्थकों की उम्मीदें धुंधली हो गई थी. सेमीफाइनल में एंट्री के लिए अब भी 75 रन की दरकार थी. कप्तान सरफराज जरूर क्रीज पर मौजूद थे लेकिन उनका साथ देने के लिए कोई विशेषज्ञ बल्लेबाज बचा नहीं था. और क्रीज मोहम्मद आमिर पहुंचे.

क्रिकेट के मैदान पर मोहम्मद आमिर को उनकी गेंदबाजी के लिए जाना जाता है. अपना दिन होने पर आमिर बड़े से बड़े बल्लेबाजी क्रम की बखिया उधेड़ने का माद्दा रखते हैं लेकिन बल्लेबाजी में  कमजोर ही हैं. लेकिन कार्डिफ के मैदान पर आमिर ने अपने कप्तान के साथ मिलकर जो पारी खेली उसने पाकिस्तान को चैंपिंयस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में पहुंचा दिया. आठवें विकेट के लिए सरफराज के साथ हुई 75 रन की साझेदारी में आमिर ने 28 बेशकीमती रनों का योगदान दिया.

क्रीज पर आमिर अपने कप्तान से ज्यादा समर्पित दिख रहे थे. सरफराज ने तो इस दौरान कुछ गैरजिम्मेदार शॉट खेल कर दो कैच भी उछाले लेकिन आमिर की बल्लेबाजी बेदाग रही. आमिर के खेल ने पाकिस्तान को आठ साल बाद एक बार फिर से चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में पहुंचा दिया. और इसके साथ इंग्लैंड में मौजूद पाकिस्तान समर्थकों को भी खुश कर कर दिया जो भारत के खिलाफ पहले मैच में मिली करारी हार से निराश हो गए थे.

जब फिक्सिंग कांड में फंसा 17 साल का ये गेंदबाज

अब जरा घड़ी की सुइयों को सात साल पीछे घुमाते  हैं. इंग्लैड की इसी धरती पर साल 2010 में पाकिस्तान की टीम टेस्ट सीरीज खेल रही थी. क्रिकेट की दुनिया में स्पॉट फिक्सिंग का भंडाफोड़ हुआ. पाकिस्तान के जो तीन खिलाड़ी इसमें शामिल थे, आमिर उनमें से एक थे. इस खुलासे से जेंटलमेन गेम कहे जाने वाले इस खेल की गरिमा को तो नुकसान हुआ ही साथ ही पाकिस्तानी क्रिकेट फैन्स का सर भी शर्म से झुक गया. उस वक्त आमिर महज 17 साल के थे. सलमान बट और मोहम्मद आसिफ के साथ उन्हें भी स्पॉट फिक्सिंग को दोषी पाया गया. उन पर पैसे लेकर नो बॉल पेंकने का आरोप था. आमिर को जेल भी जाना पड़ा. और आईसीसी ने उन पर पांच साल तक की पाबंदी भी लगा दी.

आमिर से साथ इस फिक्सिंग-कांड में शामिल बट और आसिफ का करियर तो खत्म हो गया लेकिन आमिर ने एक बार फिर से वापसी की. पाबंदी का वक्त पूरा होने के बाद आमिर ने पहले घरेलू क्रिकट में जोरदार प्रदर्शन किया और फिर साल 2016 में नेशनल टीम में जगह हासिल की. आमिर ने महज 17 साल की उम्र में ही टेस्ट क्रिकेट में 50 विकेट हासिल कर लिए थे. क्रिकेट के इतिहास ऐसा करने वाले वो सबसे कम उम्र के गेंदबाज बने थे. और छह साल बाद मैदान पर वापसी करने के बाद भी वह लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. आमिर ने जो किया उसकी सजा उन्हें मिल चुकी है. ब्रिटेन के कानून के मुताबिक भी और आईसीसी के नियमों के मुताबिक भी.

आमिर जैसे गेंदबाज के पांच-छह साल तक मैदान से दूर रहने का सबसे ज्यादा नुकसान तो क्रिकेट का चाहने वालों का हुआ. आमिर अगर लय में हो तो उन्हें गेंदबाजी करते देखना सबसे सुखद अनुभव होता है.  लेकिन जब जब आमिर मैदान पर उतरते हैं तब तब फिक्सिंग का साया मैदान पर उनके साथ हमेशा चलता रहता है. और आमिर को भी यह बात पता है.शायद यही वजह है कि कार्डिफ में बल्लेबाजी के दौरान आमिर अपने कप्तान सरफराज से भी ज्यादा संजीदा दिखे. इस उम्मीद में कि शायद वो उन दागों को धो सकें जो उनके दामन पर अब भी बरकरार हैं.

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