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नहीं रहे अजित वाडेकर, जिनकी कप्‍तानी में भारत ने इंग्‍लैंड में पहली बार जीती थी सीरीज

1971 में अजित वाडेकर की अगुआई में भारत ने इंग्‍लैंड में पहली बार सीरीज में जीत दर्ज की थी

Updated On: Aug 16, 2018 08:30 PM IST

FP Staff

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नहीं रहे अजित वाडेकर, जिनकी कप्‍तानी में भारत ने इंग्‍लैंड में पहली बार जीती थी सीरीज
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भारत को क्रिकेट की दुनिया में अलग पहचान दिलाने वाले पूर्व क्रिकेट कप्तान अजीत वाडेकर का बुधवार रात निधन हो गया. वह काफी समय से कैंसर से जूझ रहे थे. उन्होंने मुंबई के जसलोक अस्पताल में अंतिम सांस ली. वह 77 वर्ष के थे. उनके परिवार में पत्नी रेखा के अलावा दो बेटे और एक बेटी है. 1971 में अजित वाडेकर की अगुआई में भारत ने इंग्‍लैंड में पहली बार सीरीज जीती थी.

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाडेकर को महान बल्लेबाज, शानदार कप्तान और प्रभावी क्रिकेट प्रशासक बताते हुए उनके निधन पर शोक जताया है. प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, ‘अजित वाडेकर को भारतीय क्रिकेट में उनके महान योगदान के लिए याद किया जाएगा. महान बल्लेबाज और शानदार कप्तान जिन्होंने हमारी टीम को क्रिकेट के इतिहास की कुछ सबसे यादगार जीत दिलाईं. वह प्रभावी क्रिकेट प्रशासक भी थे. उनके जाने का दुख है. ‘

 

 

लगातार तीन सीरीज में टीम को जीत दिलाई

वाडेकर की गिनती भारत के सफल कप्तानों में होती है. वह बाएं हाथ के बल्लेबाज व कुशल फील्डर थे. उनका अंतरराष्ट्रीय करियर आठ वर्ष का रहा.  वाडेकर भारतीय क्रिकेट टीम के एकमात्र ऐसे कप्तान थे, जिन्होंने लगातार तीन सीरीज में टीम को जीत दिलाई. इनमें इंग्लैंड और वेस्टइंडीज की धरती पर भारत की सीरीज जीत शामिल है.

37 टेस्ट मैच खेले अपने करियर में

उन्होंने 37 टेस्ट मैच खेले, जिनमें 31.07 की औसत से 2113 रन बनाए. उन्होंने एकमात्र शतक (143 रन) 1967-68 में न्यूजीलैंड के विरुद्ध लगाया था. वाडेकर चार बार 90 या अधिक रन बनाकर आउट हुए, पर शतक पूरा नहीं कर सके थे. वह भारतीय एकदिवसीय क्रिकेट टीम के पहले कप्तान थे. उन्होंने हालांकि दो मैच ही खेले. दो वनडे में एक अर्धशतक की बदौलत 73 रन बनाए.

टीम मैनेजर और चयन समिति के अध्यक्ष भी रहे

वाडेकर 1990 के दशक में मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी के दौरान भारतीय टीम के मैनेजर भी रहे थे. वह बाद में चयन समिति के अध्यक्ष भी रहे. वाडेकर को भारत सरकार ने 1967 में अर्जुन अवॉर्ड और 1972 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया था.

323 रन था उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर

घरेलू क्रिकेट में भी उनका प्रदर्शन काफी अच्छा रहा था. उन्होंने 1966-67 के रणजी ट्रॉफी मैच में 323 का सर्वश्रेष्ठ स्कोर मैसूर के विरुद्ध बनाया था. वाडेकर ने कुल 18 दलीप ट्रॉफी मैच खेले जिनमें छह में वह वेस्ट जोन के कप्तान रहे. उन्होंने छह बार बंबई टीम की कप्तानी भी की. उनके खाते में 237 प्रथम श्रेणी मैच भी है, जिसमें उन्होंने 15,380 रन बनाए. वाडेकर ने इंग्लैंड के 1967 के दौरे पर काउंटी मैचों में 835 रन बनाए.

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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