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अब बिछेगी बीसीसीआई की बिसात, आसान नहीं होगी 'दादागीरी'

बोर्ड का नया अध्यक्ष बनने के लिए सौरव गांगुली को कड़ी टक्कर दे सकते हैं जेटली के करीबी रजत शर्मा, बृजेश पटेल के पीछे है एन श्रीनिवासन की ताकत

Updated On: Aug 10, 2018 04:24 PM IST

Sumit Kumar Dubey Sumit Kumar Dubey

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अब बिछेगी बीसीसीआई की बिसात, आसान नहीं होगी 'दादागीरी'

बीसीसीआई में सुधार के लिए बना लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने एक ऐसी राह खोली है जिसपर चलकर कोई नया चेहरा बोर्ड का अध्यक्ष बनने का सफर तय कर सकता है और उनमें सबसे आगे टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली नजर आ रहे हैं.

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के कूलिंग ऑफ पीरियड में जो बदलाव किया है उसस सबसे अधिक फायदा क्रिकेट ऐसोसिएशन ऑफ बंगाल के अध्यक्ष सौरव गांगुली को होता दिख रहा है.

बोर्ड का अधिकारी बनने की 70 साल की समयसीमा को मंजूरी मिलने के बाद शरद पवार, एन श्रीनिवासन और निरंजन शाह जैसे पुराने और दिग्गज प्रशासकों के लिए तो बीसीसीआई के रास्ते हमेशा के लिए बंद हो ही गए हैं साथ ही राजीव शुक्ला, अमिताभ चौधरी, अनिरुद्ध चौधरी और सीके खन्ना जैसे मौजूदा अधिकारी भी कूलिंग ऑफ पीरियड के दायरे में आ गए हैं.

क्या है कूलिंग ऑफ पीरियड

लोढ़ा कमेटी ने सिफारिश की की थी किसी भी पदाधिकारी के स्टेट ऐसोसिएशन या बीसीसीआई में तीन साल के एक कार्यकाल के बाद तीन साल तक उसके कोई दूसरा पद लेने पर पाबंदी होगी. तीन साल बाद वह फिर से कोई पद ले सकता है. यह तीन साल की पाबंदी ही कूलिंग ऑफ पीरियड है. अब सुप्रीम कोर्ट ने इस कूलिंग ऑफ पीरियड को तीन-तीन साल के दो कार्यकाल( बीसीसीआई या स्टेट ऐसोसिएशन या दोनों) के बाद अनिवार्य कर दिया है. यानी एक अधिकारी को लगातार छह साल काम करने का मौका मिल गया है.

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बोर्ड के तमाम मौजूदा दिग्गज अधिकारी अपने दो-दो कार्यकाल पूरे कर चुके हैं लेकिन सौरव गांगुली अभी बंगाल क्रिकेट में अपने पहले कार्यकाल में ही हैं. यानी बोर्ड के मौजूदा ताकतवर अधिकारियों में गांगुली ही ऐसे हैं जो इस छह साल बाद के कूलिंग ऑफ पीरियड वाली लाइफ लाइन का फायदा उठा सकते हैं.

आसान नहीं है राह

हालांकि ऐसा नहीं है कि गागुंली को बीसीसीआई के अध्यक्ष का पद थाली में परोस कर मिलने वाला हो. बोर्ड की अंदरूनी राजनीति से पार पाकर ही उन्हें जीत नसीब हो सकती है. गांगुली की दावेदारी को सबसे बड़ी चुनौती हाल ही क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेशन में आए रजत शर्मा से मिल सकती है. एक टीवी चैनल के मालिक रजत शर्मा को केन्द्रीय मंत्री और बीसीसीआई की राजनीति के पुराने खिलाड़ी अरुण जेटली का खासमखास माना जाता है. रजत शर्मा ने हाल ही में जेटली खेमे के कंधो पर सवार होकर ही डीडीसीए के अध्यक्ष का चुनाव जीता है.

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लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक अब अध्यक्ष पद की दावेदारी के लिए दो एजीएम में भागीदारी करने की बाध्यता भी खत्म हो गई है यानी कोई नया आदमी भी सीधे बोर्ड अध्यक्ष बनने की ताल ठोक सकता है और रजत शर्मा इसके लिए एकदम फिट कैंडीडेट हैं.

इन दोनों के अलावा साउथ जोन से पूर्व क्रिकेटर ब्रजेश पटेल भी अध्यक्ष पद के लिए अपना दावा ठोक सकते हैं.

कर्नटक क्रिकेट ऐसोसिएशन से जुड़े भारत के पूर्व क्रिकेटर बृजेश पटेल को पहले गांगुली के ही मेंटोर जगमोहन डालमिया के गुट का माना जाता था लेकिन 2015 के बाद से वह एन श्रीनिवासन गुट में शामिल हो गए हैं. श्रीनिवासन गुट पिछले काफी वक्त से बृजेश पटेल के पक्ष में लॉबिंग करने में जुटा हुआ है.

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तो गांगुली के सामने अरुण जेटली और एन श्रीनिवासन जैसे बोर्ड के पुराने दिग्गजों के कैटीडेट्स की चुनौती तो होगी ही साथ ही अनुराग ठाकुर और अनिरुद्ध चौधरी जैसे कद्दावरों ने भी पूरी तरह से हार नहीं मानी है. दरअसल इन दोनों के दो-दो कार्यकाल तो पूरे हो चुके हैं लेकिन ये कार्यकाल कुल छह साल के नहीं रहे हैं लिहाजा ये दोनों भी सुप्रीम कोर्ट से इस मसले पर कुछ रियायत मांग सकते हैं .

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वहीं अनुराग ठाकुर तो पहले ही खुद को अयोग्य ठहराने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार यचिका दायर कर चुके हैं.

बहरहाल इन समीकरणों के अलावा प्रॉक्सी कैंडीडेट की संभावना को भी नहीं नकारा जा सकता. हाल ही में डीडीसीए में हुए चुनाव में तमाम पदाधिकारियों ने अपनी पत्नी,बच्चों या रिश्तेदारों को प्रत्याशी बना कर इसकी झलक दिखा दी थी.

यानी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीसीसीआई की राजनीति बिछने का वक्त आ गया है और ‘दादागीरी’ का राह आसान नहीं दिख रही है.

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