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बीसीसीआई ने कुंबले को क्यों नहीं बताया था कोहली वाला ‘राज’

अनिल कुंबले के बयान की एक लाइन बीसीसीआई पर बहुत से सवाल उठाती है

Shailesh Chaturvedi Shailesh Chaturvedi Updated On: Jun 21, 2017 03:29 PM IST

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बीसीसीआई ने कुंबले को क्यों नहीं बताया था कोहली वाला ‘राज’

भारतीय समय से मंगलवार की देर रात अनिल कुंबले का बयान आया. उसमें उन्होंने बताया कि कोच पद से हटने की वजह क्या है. उस बयान को गौर से पढ़िए. उसमें एक लाइन है. कुंबले ने अंग्रेजी में जो लिखा है, उसका हिंदी में मतलब कुछ यूं है – कल रात पहली बार मुझे बीसीसीआई की तरफ से बताया गया कि कप्तान को मेरे स्टाइल और हेड कोच के तौर पर जारी रहने पर कुछ आपत्ति है.

इसका क्या मतलब है? ऑस्ट्रेलिया सीरीज के दौरान ही चर्चा होने लगी थी कि कुंबले और विराट कोहली के बीच कुछ गड़बड़ है. उसके बाद भी कुछ-कुछ बातें ‘लीक’ होती रहीं. फिर ठीक चैंपियंस ट्रॉफी से पहले चर्चाएं हुईं. विराट कोहली से प्रेस कांफ्रेंस में सवाल पूछा गया. उन्होंने कुछ बातों पर असहमत होने की बात मानी. वीरेंद्र सहवाग से बीसीसीआई के एक अधिकारी ने कोच पद के लिए अप्लाई करने को कहा गया.

ये सब होता रहा. लेकिन अनिल कुंबले को कुछ नहीं बताया गया. कम से कम उनके बयान से यही साफ होता है. यह सही है कि कुंबले को वो सारी बातें पता चल ही रही होंगी. विराट कोहली की नाखुशी उनसे किसी भी हालत में छुपी नहीं रह सकती. ऐसे में उन्होंने क्यों लिखा कि उन्हें एक रात पहले पहली बार बताया गया कि विराट नाखुश हैं!

कुंबले की उस एक लाइन में ‘बिटवीन द लाइन’ काफी कुछ है. कुंबले की इस लाइन को पूरी तरह सच मानें, तो सीएसी ने कुंबले से पद पर बने रहने के लिए कहा. उसके बाद बीसीसीआई ने उन्हें बताया कि कोहली नहीं चाहते कि आप बने रहें. क्या बीसीसीआई के अधिकारी चुपचाप ये देखना चाहते थे कि सीएसी का फैसला क्या होता है? क्या उन्हें ये उम्मीद थी कि सीएसी ही उन्हें हटने के लिए कह देगी? या ये उम्मीद थी कि कुंबले खुद हट जाएंगे? और जब ये दोनों बातें नहीं हुईं, तब बीसीसीआई ने कोहली वाला ‘राज’ कुंबले के सामने खोला.

लगातार चर्चा में है कि जब कोच पद के लिए आवेदन मांगे गए, तो बीसीसीआई के एक अधिकारी ने वीरेंद्र सहवाग से अप्लाई करने को कहा. आवेदन मांगे जाने के समय को लेकर भी विवाद था कि आखिर इसे चैंपियंस ट्रॉफी के बाद कर लेने में क्या दिक्कत थी. विवाद बढ़ता गया, तब बीसीसीआई के कार्यकारी अध्यक्ष सीके खन्ना ने चिट्ठी लिखकर पूरी प्रक्रिया टालने को कही.

सवाल यही है कि जिसने प्रक्रिया शुरू करवाई, उसी ने क्यों टालने की बात की? ..और टालने की कोशिश थी या कुंबले को हटाने की कोशिश का हिस्सा था. माना जा रहा है कि जबसे कुंबले ने खिलाड़ियों के पैसे बढ़ाने की बात की है, तबसे बीसीसीआई का एक हिस्सा उनसे खुश नहीं है. उन्हें हटाए जाने की कोशिश क्या उसी नाखुशी का हिस्सा है, जिसके लिए विराट के कंधे का इस्तेमाल किया गया?

इन अटकलों को किनारे भी लगा दें, तो कम से कम इतना तो माना जाएगा कि जब दो दिग्गजों में विवाद चल रहा हो, उस वक्त पैरेंट बॉडी को दखल देना चाहिए. कुंबले के बयान की एक लाइन बताती है कि बीसीसीआई से किसी ने कोशिश नहीं की. बल्कि मामले को बिगड़ने दिया गया. क्या बीसीसीआई सिर्फ अपने पावर की लड़ाई लड़ने के लिए है? क्या उसका काम सिर्फ सुप्रीम कोर्ट या लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लेकर बोर्ड रूम में रणनीति बनाने तक रह गया है? कुंबले के पूरे बयान में विराट को लेकर काफी कुछ है. उसके जवाब भी मांगे जाने चाहिए. लेकिन उस एक लाइन में बीसीसीआई के बारे में जो कुछ है, क्या उसके जवाब भी मांगे जाएंगे?

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