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पाकिस्तान के रिफ्यूजी कैंपों से चिन्नास्वामी के ड्रेसिंग रूम तक, यह कहानी हट के है

दुखदाई है कि यह टीम अपनी पिच पर अपने लोगों के बीच किसी अंतरराष्ट्रीय टीम के खिलाफ शायद ही कभी क्रिकेट खेल पाए.

Jasvinder Sidhu Jasvinder Sidhu Updated On: Jun 13, 2018 12:24 PM IST

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पाकिस्तान के रिफ्यूजी कैंपों से चिन्नास्वामी के ड्रेसिंग रूम तक, यह कहानी हट के है

आईपीएल में अपने पेशेवर प्रदर्शन के कारण हिंदुस्तान के घरों में पहुंचे राशिद खान जलालाबाद के नानगरहार इलाके से आते हैं. यह वही इलाका है जहां अमेरिका पिछले साल अप्रैल में इस्लामिक स्टेट के आतंकियों के खात्में के लड़ाई में अब तक से सभी बमों का बाप ‘जीबीयू-43 बी’ भी फेंक चुका है. दस साल की उम्र में राशिद ने लैंडमाइंस भी देखी और क्लाशिनकोव गन भी.

एक देश जिसका खुद का कोई भविष्य न हो, वहां से निकल कर पहचान बनाना एक ऐसी कहानी है जिसे हर कोई बार बार सुनना चाहेगा. असल में 14 जून को चिन्नास्वामी स्टेडियम में अफगानिस्तान की टीम क्रिकेट की दुनिया से सबसे बड़े स्टारों के खिलाफ नहीं खेलने उतरेगी. बल्कि इसका हर एक सदस्य हॉलीवुड की फिल्म की उस कहानी और पटकथा की तरह होगा जो ऑस्कर जीतने का क्षमता रखती है.

यह टीम जब चिन्नास्वामी स्टेडियम के ऐतिहासिक व आलीशान ड्रेसिंग रूम में कदम रखेगी तो शायद पाकिस्तान के पेशावर में रिफ्यूजी कैंपों में जिंदगी को हर दिन झकजोर देने वाले वे दिन पीछे छूट जाएं.

इस टीम के अधिकतर सदस्यों का सफर पाकिस्तान में टेपबॉल क्रिकेट से शुरू हुआ और यह कल टॉस के बाद उसका प्रदर्शन उनके खुद के देश में इस खेल के भविष्य को राह दिखाने में कारगर साबित होगा.

जंग के कारण हर दिन बर्बाद होने वाले मुल्क में जिंदगी बचपन से ही अनियमित मोड़ पर खड़ी थी. शायद इसलिए राशिद अपनी गेंदबाजी में संतुलित उछाल, स्पीड और टर्न की इज्जत करते हैं.

सिर्फ राशिद ही सुनने वाली कहानी नहीं है. कइयों के लिए यह किसी नए कलाकार की पहली फिल्म रिलीज होने जैसा है. कई ऐसे भी हैं जो चंद मिनटों के रोल में अपनी पहचान हमेशा के लिए जहन में चिपका देने का माद्दा रखते हैं.

दो दिन पहले कप्तान असगर स्तानिकजई ने कहा कि उनके पास भारतीय टीम से भी बेहतर स्पिनर हैं. असगर अनुभवी और समझदार हैं और उन्हें अंदाजा है कि वह क्या बोल रहे हैं.

Bengaluru: Afghanistan's Mujeeb Ur Rahman bowls bowls during a practice session ahead of the maiden cricket test match between India and Afghanistan, in Bengaluru on Tuesday, June 12, 2018. (PTI Photo/Shailendra Bhojak) (PTI6_12_2018_000057B)

अफगानिस्तान के खोस्त इलाके ने भी दशकों में बहुत कत्लोगारत देखी है.  17 साल के मुजीब उर रहमान वहीं से आते हैं. जो क्रिकेट प्रेमी स्पिन बॉलिंग समझते और उसका आनंद उठाना जानते हैं, उन्हें अंगुलियों गेंद को अपने इशारों पर नचाने वाले इस युवा गेंदबाज के स्पेल मिस नहीं करने चाहिए क्योंकि हैरान करने में उन्हें मजा आता है. फिर लेफ्ट आर्म स्पिनर जहीर खान भी हैं.

यह याद रखना जरूरी है कि इस टीम के टी-20 और वनडे क्रिकेट के रास्ते टेस्ट के लिए अपनी जगह बनाई है और भारतीय टीम के स्तर के बारे में दोहराने के कोई मायने नहीं हैं. लेकिन अगर उसके टॉप से चार बल्लेबाज मैच के चार-पांच सत्र तक विकेट पर बने रहते हैं तो यह बड़ी शुरुआत होगी.

दुखदाई है कि यह टीम अपनी पिच पर अपने लोगों के बीच किसी अंतरराष्ट्रीय टीम के खिलाफ शायद ही कभी क्रिकेट खेल पाए. हालात इसकी इजाजत नहीं देते. फिर भी उसकी यहां तक यात्रा प्रेरित करने वाली है. इस टीम के साथ सब ठीक हो रहा है.

बस एक मलाल रहेगा. अफगानिस्तान के इस पहले और ऐतिहासिक टेस्ट मैच का जिक्र होगा तो यह भी चर्चा होगी कि इसमें दुनिया के सबसे नायाब बल्लेबाजों में से एक विराट कोहली नहीं खेले थे.

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