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अलविदा 2017: हम बोलेगा तो बोलोगे कि बोलता है...

मणिशंकर राजनीति के मंच के मंझे हुए कलाकार हैं लेकिन उनके डायलॉग ही उनका पार्टी में रोल काटने का काम करेंगे ये कभी सोचा नहीं होगा

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Dec 31, 2017 06:31 PM IST

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अलविदा 2017: हम बोलेगा तो बोलोगे कि बोलता है...

कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर पीएम मोदी के लिए ‘लकी मैस्कट’ कहे जा सकते हैं. अय्यर के ही ‘चायवाला’ बयान से सियासत की प्याली में ऐसा उबाल आया कि कांग्रेस को साल 2014 के चुनाव में पानी मांगना पड़ गया. अब यही कारनामे उन्होंने ऐन गुजरात चुनाव में भी दोहरा दिए. ऐसे बयान दिए कि कांग्रेस बैकफुट पर धड़ाम हो गई और पीएम मोदी ने गुजरात भी जीत कर पार्टी को समर्पित कर दिया.

मणिशंकर अय्यर ने पीएम मोदी के लिए अभद्र शब्द का इस्तेमाल किया. बाद में अपने बयान पर माफी भी मांगी. बयान के मायने समझाने की कोशिश की. कहा कि अंग्रेजी के ‘नीश’ शब्द का इस्तेमाल करना चाहता था. लेकिन झूठ के पुलिंदे में लिपटी उनकी सफाई किसी काम की नहीं थी. उनकी मन की बात कांग्रेस के लिए घात का काम कर गई थी. मणिशंकर ने जो कहा वो किसी भी राजनीतिज्ञ से उम्मीद नहीं की जा सकती है. लेकिन राजनीति में नेताओं की फिसलती जुबान गिरते गिरते अब जमीन छूने लगी है और ये दुर्भाग्य हर चुनाव के वक्त जरूर दिखाई देता है.

Rahul Gandhi-Sonia Gandhi

मणिशंकर पुराने कांग्रेसी हैं. राजनीति के मंच के मंझे हुए कलाकार हैं. लेकिन उनके डायलॉग ही उनका रोल काटने का काम करेंगे ये कभी सोचा नहीं होगा. नतीजतन उनके बयान के बाद पार्टी ने ही उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया. पार्टी को डर था कि कहीं भविष्य में फिर किसी मामले में अय्यर के बोल बीजेपी की ‘भरपूर’ मदद न कर बैठे.

पता नहीं कि मणिशंकर अय्यर की कुंडली में ऐसा कौन सा ग्रहदोष लगा हुआ है कि वो जो भी करते हैं उसका फायदा बीजेपी उठा ले जाती है. राहुल गांधी की जब कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर ताजपोशी होनी थी तो किसी सवाल पर उन्होंने कहा कि ‘मुगलों में क्या गद्दी को लेकर चुनाव होते थे? सब जानते थे कि एक दिन औरंगजेब, अकबर वगैरह को बादशाह बनना है’. बस ये भी मुद्दा बन गया. अय्यर के बयान से गांधी परिवार और सियासत का वंशवाद मुगल दरबार से गुजरते हुए औरंगजेब के तख्तो-ताउस तक जा पहुंचा.

manimodi

हाल ही में मणिशंकर के यहां पाकिस्तान उच्चायुक्त और पूर्व विदेश मंत्री के लिए एक बड़ी दावत पार्टी रखी गई थी जिसमें पूर्व पीएम मनमोहन सिंह भी मौजूद थे. अचानक मिला ये मौका गुजरात चुनाव में बड़ा मुद्दा बन गया. वैसे भी गुजरात चुनाव में पाकिस्तान हमेशा से मुद्दा रहा है. उधर अय्यर ने सोचा ‘पार्टी यूं ही चलेगी’ लेकिन बीजेपी ने कांग्रेस की शामत ही बुला दी. चुनावी मुद्दा ऐसा उछला कि संसद तक गूंज हुई. लेकिन अब क्या जब चिड़िया चुग गई खेत. गुजरात चुनाव में अय्यर की 'पाक-पार्टी' खूब चली. फायदा बीजेपी को हुआ. अय्यर फिर बीजेपी के लिए वरदान साबित हुए. अय्यर के बयानों की वजह से कांग्रेस के ही खेतों को चुगने का काम सियासत की चिड़िया कर रही है.

अय्यर आज अकेले हो गए हैं. ऐसा नहीं कि बिल्कुल ही अकेले हो गए हैं. उन्हें अकेले दिखने की नई भूमिका मिली है जिसे वो निभा रहे हैं. साल 2017 को लोग भले ही भूल जाएं लेकिन मणिशंकर शायद नहीं भूल सकेंगे कि उनके बोल को बीजेपी किस तरह तौलने का काम करती है.

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