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वर्ल्ड एड्स डे: सिर्फ जानकारी ही बचाव का एकमात्र रास्ता है

एक रिपोर्ट के मुताबिक अब तक लगभग 4 करोड़ लोग इस बीमारी के साथ जी रहे है

Updated On: Dec 01, 2017 01:03 PM IST

Aditi Sharma

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वर्ल्ड एड्स डे: सिर्फ जानकारी ही बचाव का एकमात्र रास्ता है

एक दिसंबर यानी आज का दिन खास है क्योंकि यह एड्स के प्रति जागरूकता को समर्पित है. आज कई जगह पर कई तरह की बातें होंगी. कोई ट्वीट कर इस बीमारी से लड़ने की बात कहेगा,तो कोई भेदभाव ना करने की सलाह देगा और न जाने क्या क्या.. पर वास्तविकता हम सबके सामने है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक 2016 के अंत तक तकरीबन 3 करोड़ 60 लाख लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं.

जांच में सामने आया है कि ज्यादातर लोग अज्ञानता के कारण इसकी चपेट में आ जाते हैं. कइयों को पता भी नहीं होता कि उन्हें एड्स जैसी खतरनाक बीमारी है. और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस विषय को लेकर लोगों में जितनी जागरूकता होनी चाहिए उतनी है नहीं. 90 के दशक से लेकर अब तक समाज में इस बीमारी को लेकर केवल हिचक का ही रूप ही नहीं बदला, बल्कि कई और स्तर में भी ये बदलाव आया है. मिसाल के तौर पर विज्ञापनों को लेते हैं.

90 के दशक में एक बड़ा मोड़ तब आया जब टीवी और एचआईवी एड्स एक साथ आए. और ये तब हुआ जब भारत में एड्स का पहला केस 1986 में चेन्नई से सामने आया. इस केस की पुष्टि करने वाले थे डा.सुनील सोतोमोन और डा. सेल्लापन निरमला जिन्होंने चेन्नई के एक सेक्स वर्कर में पहली बार ये बीमारी पाई. इसके बाद सन 1987 तक भारत में एड्स के 135 केस और सामने आए. तब से आज तक ये आकंड़ा बढ़ता ही जा रहा है. इसके बाद वो दौर आया जब कंडोम के विज्ञापनों में एचआईवी एड्स का प्रचार होने लगा.

लोगों को ये बताया जाने लगा कि भारत में एड्स नाम की बीमारी ने कदम रखा है जो धीरे-धीरे अपने आकार को बड़ा स्वरूप देने में लगी है. 21वीं शताब्दी का दौर आते-आते 90 के दशक के ये विज्ञापन धीरे-धीरे पीछे जाने लगे और सामने आने लगे फ्लेवर और प्लेजर से भरे कंडोम.

एक रिपोर्ट के मुताबिक अब तक लगभग 4 करोड़ लोग एड्स के साथ जी रहे है. हालांकि 2 करोड़ लोग अब इस बीमारी का ट्रीटमेंट करा रहे है लेकिन वो भी तब फायदेमंद सिद्ध होगी जब उसका नियमित तौर पर उपचार किया जाए.

ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि एड्स के लक्षण खुद में इतने ही अजीब होते है कि लोग उसको अपने अंदर पहचान ही नहीं पाते. तो चलिए आज हम ही आपको बताते हैं एड्स के कुछ ऐसे लक्षण जो शायद ही आपने सुने हों.

ओरल सेक्स से फैलता है एड्स

ये शायद सुनने में अजीब लगे लेकिन ओरल सेक्स से भी एचआईवी का वायरस फैलता है. हालांकि इसकी संभावना सामान्य सेक्स के मुकाबले कम होती है लेकिन खत्म नहीं होती.

एचआईवी पॉजिटिव का मतलब ही एड्स नहीं होता.

आमतौर पर लोग एचआईवी पॉजिटिव होने का मतलब ही एड्स समझने लगते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. एचआईवी के शरीर में दाखिल होने के बाद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है और शरीर पर तरह-तरह की बीमारियां और इन्फेक्शन पैदा करने वाले वायरस अटैक करने लगते हैं. एचआईवी पॉजिटिव होने के करीब 8 से 10 साल बाद इन तमाम बीमारियों के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं. इस स्थिति को ही एड्स कहा जाता है.

ये लक्ष्ण है तो करा ले जांच

अगर किसी को नीचे बताए गए लक्षण एक महीने से भी ज्यादा समय तक हों तो उसे एचआईवी का टेस्ट कराना चाहिए :

1. बिना किसी वजह के बुखार बने रहना

2. बिना किसी वजह के लगातार डायरिया बने रहना

3. लगातार सूखी खांसी रहना

4. मुंह में सफेद छाले जैसे निशान होना.

5 बिना किसी वजह के लगातार थकान बने रहना और तेजी से वजन गिरना.

6. यादाश्त में कमी, डिप्रेशन में चले जाना.

हांलाकि ये सारे लक्ष्ण आम बीमारियों में भी होते हैं इसलिए डरने की जरूरत नहीं है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब तक एचआईवी का कोई इलाज नहीं खोजा जा सका है. हालांकि दवाओं की मदद से एचआईवी पॉजिटिव होने से लेकर एड्स होने तक के गैप को बढ़ाया जा सकता है.

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