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आग़ाज़-ए-2018: आज से एडल्ट हो गई 21वीं सदी

क्या आप भी उस पीढ़ी से हैं जो मानती थी कि मोबाइल समय के साथ छोटे होते जाएंगे और वाय2के से दुनिया खत्म हो जाएगी

Updated On: Jan 01, 2018 04:05 PM IST

FP Staff

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आग़ाज़-ए-2018: आज से एडल्ट हो गई 21वीं सदी

2018 शुरू हो गया है. इसका मतलब हुआ कि 21वीं शताब्दी अब वयस्क हो गई. सन 2000 में जो बच्चे पैदा हुए हैं वो अब वोट डाल सकते हैं, लड़कियां शादी कर सकती हैं और ड्राइविंग लाइसेंस के साथ गाड़ी चला सकते हैं.

इन 18 सालों में लोगों ने बहुत सी बातें हुईं. मिलेनियल पीढ़ी यानी 1980 के आखिर और 1990 में पैदा हुई पली-बढ़ी पीढ़ी को 20 साल पहले की बात करते हुए अक्सर 1990 के दशक की बात करने लगती है. ऐसे में बहुत सारी चीजें हैं जिनकी उम्र आपकी सोच से ज्यादा पुरानी है.

मसलन अगर देश से जुड़े मुद्दों की बात करें तो अब देश के नए वोटर वो हैं जिन्होंने कारगिल की जंग नहीं देखी. वाजपेयी को बस में लाहौर जाते नहीं देखा. हिंदुस्तान में मोबाइल नेटवर्क जिसकी पैदाइश के समय मौजूद था.

वैसे साल 2000 शुरू होने और 1999 खत्म होने में भी बहुत कुछ खत्म और शुरू हुआ. जैसे कि 1999 ही वो अद्भुत साल था जब फिल्म लाल बादशाह रिलीज़ हुई थी. वो फिल्म जिसमें अमिताभ बच्चन बतौर हीरो आखिरी बार देखे गए थे.

साल 1999-2000 में कई ऐसे गाने आए थे जो अभी भी याद किए जाते हैं. वैसे 2017 में टॉप के लगभग सारे गाने पुराने ही थे. चाहे आपने रश्के कमर सुना हो, ऊंची है बिल्डिंग या तू चीज़ बड़ी है मस्त-मस्त पर डांस किया हो. इस साल के चार्टबस्टर पुराने गाने ही थे.

1999 में ताल रिलीज हुई थी. इसी साल आमिर खान-मनीषा कोईराला की फिल्म मन के गाने भी आए थे जो सुपर हिट हुए. हालांकि नशा ही प्यार का नशा है जैसे तमाम गाने विदेशी गानों की सीधी नकल थे.

अगर आपको 'कहो न प्यार है' का इक पल का जीना पसंद है, अगर आपने मोहब्बतें के शाहरुख खान को वायलन बजाते देखा है तो आप के बाद की एक पीढ़ी जवान हो चुकी है. 2000 में कहो न प्यार है, मोहब्बतें, मिशन कश्मीर और रिफ्यूजी जैसी तमाम फिल्में रीलीज हुई थीं.

अगर आपने अभी-अभी महसूस किया हो कि ह्रितिक रौशन और अभिषेक बच्चन को फिल्म इंडस्ट्री में 2 दशक हो गए हैं तो आप अकेले नहीं हैं.

खैर 2018 में वयस्क हुई पीढ़ी वो पीढ़ी है जिसने मोबाइल फोन को अपनी पैदाइश से पहले मौजूद पाया है. नोकिया का सबसे मजबूत माना जाने वाला 3310 मॉडल 2000 में रिलीज़ हुआ था.

हालांकि इन 18 सालों की बात करें तो हम सबने बहुत कुछ बदलते देखा है. जो फंतासियां हम साइंस फिक्शन कहानियों में देखा-सुना करते थे वो अब आम हैं. मसलन टीवी पतले होकर दीवार पर टंग गए. तस्वीरें, गाने, वीडियो तमाम चीजें बिना तार के एक जगह से दूसरी जगह भेजना आम चीज़ हो गई.

1999-2000 में जो जीपीएस सेना की खास टेक्नोलॉजी थी उससे अब टैक्सियां चलती हैं. अब बिना किसी इंसान की मदद के तमाम काम होने लगे हैं. आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस ने आपके कैब बुक करने से लेकर सॉफ्टवेयर बनाने तक तमाम काम करना शुरू कर दिए हैं.

वैसे एक मजेदार बात है. 2000 में लोग मानते थे कि आने वाले समय में फोन छोटे होते चले जाएंगे. हो सकता है गायब हो जाएं. उसी दौर में 24 घंटे चलने वाले चैनल अपनी रफ्तार पकड़ रहे थे और माना जा रहा था कि देखते ही देखते टीवी अखबारों को खा जाएगा. वाईटूके के चलते दुनिया तबाह हो जाएगी. इसी के साथ लोगों को लगता था कि मोबाइल कंपनी नोकिया को कोई नंबर वन से हटा नहीं पाएगा.

18 साल की उम्र यूं तो कुछ ज्यादा नहीं होती मगर 2018 में जो लोग वयस्क हो रहे हैं उन्होंने दुनिया के कुछ सबसे बड़े बदलाव देखे हैं. वो भी वोट डालने का अधिकार पाने से पहले!

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