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जन्मदिन विशेष: संगीत का ‘वसंत’, जिसके लिए हर सरहद खुद-ब-खुद खुल गई

वसंत देसाई एक ऐसा नाम हैं, जिसके साथ विरोधाभास या अजब संयोग भरे पड़े हैं

Shailesh Chaturvedi Shailesh Chaturvedi Updated On: Jun 09, 2018 09:23 AM IST

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जन्मदिन विशेष: संगीत का ‘वसंत’, जिसके लिए हर सरहद खुद-ब-खुद खुल गई

एक ऐसा नाम है, जिसके साथ विरोधाभास या अजब संयोग भरे पड़े हैं. वो गरीब घर से नहीं था. लेकिन ऑफिस बॉय के तौर पर करियर शुरू किया. वो संगीतकार बना. लेकिन काफी कुछ और करने के बाद. वो बहुत ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं था. लेकिन अपने करियर में कुछ ऐसे काम कर दिए, जिन्हें चमत्कार ही कहा जा सकता है. उसकी धुन को एमएस सुब्बलक्ष्मी ने आवाज दी, तो अशोक कुमार की आवाज भी उसी की बनाई संगीत पर सुनाई दी. उसका गीत प्रार्थना बनकर भारत के तमाम स्कूलों में गूंजता है, तो एक और गीत पाकिस्तान के स्कूल में गाया जाता है. गुलजार के शब्दों में यह नाम संगीत के दुर्लभ लोगों में है. लेकिन संगीत जगत के बड़े नामों को लेते हुए तमाम लोग वह नाम भूल जाते हैं.

वसंत देसाई. यह नाम ऐसा है, जो शायद आज की पीढ़ी को उस तरह समझ न आए. वो खुद को ‘कनेक्ट’ न कर पाएं. लेकिन फिर उन्हें बताइए कि क्या स्कूल में हमको मन की शक्ति देना.. सुना या गाया है. यकीनन याद आएगा. फिर बताइए कि ऐ मालिक तेरे बंदे हम... क्या यह प्रार्थना सुनी है. यकीनन हर पीढ़ी को इन प्रार्थनाओं की शक्ति समझ आएगी.

क्या इत्तेफाक या संस्कृति है इस मुल्क की. कोई शकील बदायूंनी एक गीत लिखते हैं, नौशाद संगीत देते हैं, रफी गाते हैं तो वो देश के सबसे लोकप्रिय भजनों में यानी मन तड़पत हरि दर्शन को आज  बन जाता है. भरत व्यास एक गीत लिखते हैं, वसंत देसाई संगीत देते हैं, लता मंगेशकर गाती हैं और वो पाकिस्तान के स्कूल की प्रार्थना बन जाती है. ऐ मालिक तेरे बंदे हम  पाकिस्तान के स्कूलों में गाया जाता है. यह संगीत की ताकत है.

9 जून 1912 को महाराष्ट्र सतारा जिले में पैदा हुए वसंत देसाई ने वी. शांताराम के साथ काम करना शुरू किया था. संगीतकार के नहीं, ऑफिस बॉय के तौर पर. उन्होंने छोटे रोल के साथ एक्टिंग भी की. उसी दौरान संगीत सीखा, यहां तक कि मराठी फिल्म में गाना भी गाया. संगीतकार के तौर पर भी उनकी पहली फिल्म मराठी ही थी. फिर तो वी. शांताराम के साथ एक के बाद एक फिल्में आईं. चाहे वो डॉक्टर कोटनिस की अमर कहानी हो, दो आंखें बारह हाथ या झनक झनक पायल बाजे. दो आंखें बारह हाथ की प्रार्थना ऐ मालिक तेरे बंदे हम देश के कई स्कूलों की प्रार्थना बनी. यहां तक कि पाकिस्तान के स्कूल की भी. एक इंटरव्यू में अभिनेत्री और नेत्री जयललिता ने भी अपने पसंदीदा गीतों में इस प्रार्थना को शामिल किया था. उसके करीब डेढ़ दशक बाद गुड्डी फिल्म की प्रार्थना हमको मन की शक्ति देना अब भी बहुत से स्कूलों में गाई जाती है.

वसंत देसाई के साथ तमाम दिलचस्प तथ्य जुड़े हुए हैं. फिल्म गूंज उठी शहनाई में उनके लिए बिस्मिल्लाह खां ने शहनाई बजाई थी. एमएस सुब्बलक्ष्मी ने वसंत देसाई की धुन पर बना गीत यूएन हेडक्वार्टर्स में गाया था. पंडित शिव कुमार शर्मा ने झनक झनक पायल बाजे में उनके लिए संतूर बजाया.

यही गीत जो तुम तोड़ो पिया को शिव कुमार शर्मा और हरि प्रसाद चौरसिया ने फिल्म सिलसिला में इस्तेमाल किया, जहां उन्होंने शिव-हरि के नाम से संगीत दिया. दोनों बार गायिका लता मंगेशकर ही थीं. इन महान संगीतज्ञों से अलग उन्होंने अशोक कुमार को आम लोगों के सुर और आवाज में फिल्म आशीर्वाद के लिए गाना गवाया. बच्चों में वो गीत रेलगाड़ी छुक-छुक छुक-छुक... बहुत लोकप्रिय हुआ था. इस गाने में वसंत देसाई ने बहुत कम साज़ों का इस्तेमाल किया था.

इन सबके अलावा, वसंत देसाई ही उन शुरुआती संगीतकारों में थे, जिन्होंने गाने में इको का इस्तेमाल किया. मराठी किताब माझ़े संगीत में केशवराव भोसले ने इस पर बात की है. जोहरा बाई की आवाज में परबत पे अपने डेरा हो या रफी का गाया बेमिसाल गीत कह दो कोई ना करे यहां प्यार... वसंत देसाई ने इको को बेहतरीन इस्तेमाल किया है. कई गीत ऐसे हैं, जहां उन्होंने कोरस को किसी इंस्ट्रुमेंट की तरह इस्तेमाल किया है. लता मंगेशकर के तमाम यादगार गीत वसंत देसाई की धुन से ही निकले हैं. वाणी जयराम की आवाज का उन्होंने बेहतरीन इस्तेमाल किया. गुड्डी फिल्म में बोले रे पपीहरा अब भी याद किया जाता है.

इस तरह के करियर के बावजूद वसंत देसाई को वो पहचान नहीं मिली, जिसके वो हकदार थे. उनके प्रयोग सराहे गए. शास्त्रीय संगीत को लेकर उनकी समझ पर किसी को संदेह नहीं रहा. गाने सुपर-डुपर हिट रहे. उसके बावजूद वैसा नाम, काम नहीं मिला, जो शायद इतने हिट गाने देने के बाद किसी और को मिलता. महज 63 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. वो भी बड़े ही दुखद तरीके से.

22 दिसंबर का दिन था. वो अपने घर से निकले. नीचे जाने के लिए लिफ्ट में घुस ही रहे थे कि लिफ्ट ऊपर चल पड़ी. वसंत देसाई उसमें फंस गए. उन्हें अस्पताल ले जाया गया. लेकिन तब तक वो दुनिया छोड़ चुके थे. उनकी मौत को चार दशक से ज्यादा हो गए हैं. लेकिन अब भी सुबह किसी स्कूल से ऐ मालिक तेरे बंदे हम या हमको मन की शक्ति देना  की आवाज आती है, तो संगीत की ताकत का अहसास होता है. ऐसा लगता है कि बच्चों के सुर सीधे ईश्वर तक पहुंच रहे हैं.

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