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गिर में शेरों की जान बचाने के लिए अमेरिका और इंग्लैंड से मदद

एशियाटिक लायंस यानी शेर को बचाने की जद्दोजहद चल रही है. इन्हें सुरक्षा देने के लिए अमेरिका से खास वैक्सीन मगाई गई है, ताकि 500 से ज्यादा शेरों की जान बचाई जा सके.

Updated On: Oct 04, 2018 09:05 PM IST

Ajay Suri, Asif Khan

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गिर में शेरों की जान बचाने के लिए अमेरिका और इंग्लैंड से मदद

एशियाटिक लायंस यानी शेर को बचाने की जद्दोजहद चल रही है. इन्हें सुरक्षा देने के लिए अमेरिका से खास वैक्सीन मंगाई गई हैं, ताकि 500 से ज्यादा शेरों की जान बचाई जा सके. गुजरात वन विभाग के अधिकारी मुंबई इन वैक्सीन को लेने मुंबई पहुंच गए हैं. इनके शुक्रवार दोपहर तक गिर पहुंचने की उम्मीद है. गिर में पिछले कुछ समय से शेरों की लगातार मौत हुई है, जिसके बाद उनके अस्तित्व को लेकर सवाल उठाए गए हैं.

इसी तरह की और भी घटना हुई है, जिससे गिर में शेरों पर छाए संकट से जूझने का जज्बा वन विभाग में दिखाई देता है. इस जज्बे में दूरी और सीमाओं की दीवारें गिर रही हैं. वन विभाग ने इंग्लैंड से भी मदद मांगी है. चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (वाइल्डलाइफ सर्कल, जूनागढ़) डीटी वासवडा ने कहा कि उन्होंने रॉयल वेटेरिनरी कॉलेज, लंदन के विशेषज्ञों से मदद मांगी है. वन विभाग ने इन विशेषज्ञों को गिर नेशनल पार्क के प्रभावित इलाकों का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया है.

वासवडा ने इस बात इनकार किया है कि ऐसी धारणा बनाना गलत है कि गुजरात के शेर खत्म होने की कगार पर हैं. उन्होंने कहा, ‘सच्चाई यह है कि सिर्फ 25 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र इस बीमारी से प्रभावित हुआ है, जिससे 23 शेरों की मौत हो गई है. लेकिन शेर नेशनल पार्क में दूर तक फैले हुए हैं. वे पूरी तरह सुरक्षित हैं.’

जिन प्रभावित क्षेत्रों की बात वासवडा कर रहे हैं, वे गिर के दलखानिया रेंज में आते हैं. यह नेशनल पार्क के पूर्वी हिस्से में है. खास बात यह है कि इस क्षेत्र में बड़ी तादाद में रिजॉर्ट बन गए हैं, जो जंगल ट्रैक के काफी नजदीक है. गिर के शेर इसके आसपास नियमित तौर पर विचरण करते हैं.

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बड़ी तस्वीर तब साफ होती है, जब दलखानिया रेंज के नजदीक दो मामलों पर ध्यान दिया जाए. पहला, सभी 23 शेर, जिनकी मौत हुई, इसी रेंज के थे. दूसरा, मौत के वायरस सीडीएस से बचाने के लिए लगभग सभी शेरों को दलखानिया से बचाव केंद्र शिफ्ट कर दिया गया है. इन सभी शेरों को मेडिकल एक्सपर्ट्स की निगरानी में रखा जा रहा है.

अभी तक यह साफ नहीं है कि अमेरिका से आए वैक्सीन को गिर में कैसे इस्तेमाल में लाया जाएगा. यह बात समझनी जरूरी है कि सभी शेर नेशनल पार्क के अंदर नहीं रहते. नर शेर आदतन लंबी दूरी की वॉक करते हैं. ऐसे में वे कई बार एक दिन में पचास किलोमीटर से तक दूर चले जाते हैं. कई बार शेरों को इस रीजन से बाहर देखा गया है, इनमें सोमनाथ जिने का सूत्रपद, भावनगर, जूनागढ़ और सावरकुंडला राजुला का एरिया है.

पिछले कुछ दिनों में ऑनलाइन डाले गए तमाम गैर पेशेवर वीडियो में देखा गया है कि शेर जूनागढ़ शहर के नजदीक इंसानों के रहने की जगह के आसपास से गुजरे हैं. ऐसे में संभव है कि वायरस शेरों तक न पहुंचा हो, बल्कि शेर वायरस तक पहुंच गए हों.

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