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हम तेंदुआ मारकर नहीं, जंगल बचाकर सुरक्षित रह सकते हैं

हम जितना तेजी से जंगल खत्म करते रहेंगे, तेंदुआ भी उसी तेजी से हमारे नजदीक आता रहेगा.

Updated On: Nov 28, 2016 05:40 PM IST

Navin M Raheja

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हम तेंदुआ मारकर नहीं, जंगल बचाकर सुरक्षित रह सकते हैं

जिम कॉरबेट ने कहा था: ‘पूरे भारत में सबसे ज्यादा नफरत और डर उस जानवर से होती है जो इंसानों का खून बहाता है. ऐसा वो इंसान को डराने के लिए नहीं, बल्कि खुद को जिंदा रखने की जद्दोजहद में करता है. उसका यह अपराध केवल इंसानों के बनाए कानून के खिलाफ है. प्रकृति के खिलाफ कतई नहीं.’

वन्य जीवन में रुचि रखने वालों के लिए राजधानी के यमुना बॉयो-डायवर्सिटी पार्क के इलाके में तेंदुए का देखा जाना अच्छी खबर है. वन विभाग ने इस खबर की पुष्टि भी कर दी  जिसकी खबर तमाम राष्ट्रीय अखबारों 23 नवंबर को छपी.

अफसोस, इसके दो दिन बाद यानि 25 नवंबर इससे उलट एक विचलित कर देने वाली खबर आई.

इनसान बन गए जानवर! 

गुरुग्राम के सोहना में गांव वालों ने एक तेंदुए की पीट-पीट कर हत्या कर दी. घटना सोहना के मंदावर गांव की है. बताया गया कि इस वारदात के दौरान वन विभाग के अधिकारी मूक दर्शक बनें तमाशा देखते रहे. उनका तर्क था कि गांव वालों ने उन्हें कुछ करने ही नहीं दिया. इस तर्क पर किसे यकीन होगा.

तेंदुए के आठ ग्रामीणों पर हमला किया होगा इस बात से कोई इंकार नहीं कर रहा. लेकिन तेंदुए का यह हमला डर के मारे अपने बचाव में किया गया होगा. मौके पर मौजूद वन विभाग के अमले को तेंदुए को बेहोश कर उसे बचाने की कोशिश करनी चाहिए थी.

खुद वन विभाग के अधिकारियों ने माना है कि उनके बास बेहोशी की दवा से लेकर पिंजरा सब मौजूद था. इसके बावजूद तेंदुए को पकड़ा नहीं गया. यह हैरानी की बात है.

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Courtesy: Raheja Productions

यह पहला मौका नहीं है जब कोई जंगली जानवर शहरी इलाके में घुस आया हो. इससे पहले भी ऐसी घटनाएं अक्सर सुनने-देखने मिलती रहती हैं. ऐसे हालात में जंगली जीव मार दिए जाते हैं. यह जैव विविधता का नुकसान है. कई बार इंसान  भी मारे जाते हैं. नुकसान दोनो तरफ से  हो रहा है.

20 फरवरी 2015 को भी दिल्ली के लोनी इलाके में एक तेंदुआ मारा गया है. जून 2014 से फरवरी 2015 की बीच ऐसे नौ मामलों में यह चौथी मौत थी.

एक तेंदुआ अपनी जगह नहीं बदला. लेकिन हम तो अपनी आदतें बदल सकते हैं. सवाल यह उठता है कि क्या एक मांसाहारी और इंसान एक दूसरे के साथ रह सकते हैं?

जंगल घटते जा रहे हैं और वन्य जीवों के घर भी खत्म हो रहे हैं. हालांकि तेंदुए खुद ही इंसानों की आबादी से दूरी बनाए रखते हैं. लेकिन कभी कभार खाने की तलाश में वो अंजाने में इंसानी आबादी में दाखिल हो जाते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमने जंगली जानवरों के इलाके में कब्जा कर लिया है.

तेंदुओं के साथ हमारी भिड़ंत कोई नई बात नहीं है. हम इसके नतीजों से अक्सर मुंह फेर लेते हैं. इसमें नुकसान तेंदुओं का ही होता है. हमारे पास तो फिर भी रहने को जगह है. लेकिन उनकी जगह पर हमने कब्जा कर लिया है. अब वो कहां जाएंगे. तेंदुए जैसे जानवर को मारकर हम कोई बहादुरी का काम नहीं कर रहे हैं.

दिल्ली में अरावली पहाड़ियों से लगी असोला भाटी सेंचुरी है तो राजस्थान में अरावली की तलहटी पर सरिस्का टाइगर रिजर्व है. इन दोनों के बीच के अरावली पर्वत श्रृंखला हरियाणा में कोई नेशनल पार्क यहा सेंचुरी नहीं है.

असोला भाटी से लगे गुरुग्राम-फरीदाबाद हाइवे के आसपास के जंगली इलाके को वन्यजीवों के लिए संरक्षित किए जाने की संभावना है. मेरी जानकारी में यह इलाका तेंदुओं की पारंपरिक शिकारगाह रही है. यहां के बीहड़ और झाड़-झंगाड़ तेंदुए के लिए शानदार घर का काम करते हैं.

नवंबर 2014 में दिल्ली-जयपुर हाइवे पर एक गाड़ी के नींचे आने से तेंदुए की मौत हो गई थी. इलाके के तेंदुओं का दर्दनाक अंत ऐसे ही हर रोज हो रहा है.

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Courtesy: Raheja Productions

दिसंबर 2014 में भी दिल्ली से सटे गाजियाबाद में एक तेंदुए की बिजली का करंट लगने से मौत हो गई थी. इसका मृत शरीर यहां गन्ने के खेतों में मिला. कुछ दिनों पहले इसे लोनी इलाके के पछेहरा गांव में देखा गया था.

राजधानी के आसपास के इलाकों में तेंदुओं की इन सिलसिलेवार मौतों के लिए कौन जिम्मेदार है? इसका कोई ठोस जवाब किसी के पास नहीं है.

जरुरत इस बात की है कि इनके इलाकों में वन्य जीवों की सुरक्षा की जाए. इनके भोजन करने की जरुरी जानवरों को यहां फलने-फूलने दिया जाए. आवारा पशु और कुत्तों को अपना शिकार बनाने के लिए ये जानवर इंसानी आबादी के संपर्क में आकर मारे जा रहे है. इसे रोकना होगा.

इन इलाकों के गांव वालों को भी यह बताने और बकायदा शिक्षित करने की जरुरत है कि तेंदुआ उनका दुश्मन नहीं है. तेंदुआ तो अपनी भूख मिटाने आता है और खुद शिकार हो जाता है. उसे घेर कर मारने के बजाए वापस जाने का रास्ता दिया जाना चाहिए. अब समय आ गया है कि हम जैव विविधता के महत्व को पहचाने. हम जितना तेजी से जंगल खत्म करते रहेंगे, तेंदुआ भी उसी तेजी से हमारे नजदीक आता रहेगा.  जरुरत है उसके घर को बचाने की, हमारे सुरक्षित रहने के लिए जंगल सुरक्षित रहना जरुरी है.

(लेखक, टाइगर स्टेयरिंग कमेटी के पूर्व सदस्य हैं)

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