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अगली बार बकरे का मांस खाने से पहले इसे जरूर पढ़ लीजिए

आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस तरह पालूत कुत्ते हम इंसानों के साथ कम्युनिकेट कर सकते हैं वैसे ही बकरे-बकरियां भी कर सकते हैं

Updated On: Feb 19, 2019 08:30 AM IST

Maneka Gandhi Maneka Gandhi

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अगली बार बकरे का मांस खाने से पहले इसे जरूर पढ़ लीजिए

किसी ने कसाईखाने से एक बकरे की जान बचाई और उसे संजय गांधी एनिमल केयर सेंटर ले आया. हमने बकरे को छुट्टा घूमने की आजादी दे दी और जल्दी ही यह बकरा कुत्तों के एक झुंड का नेता बन बैठा. कुत्ते बकरे से एक सम्मानजनक दूरी बनाकर उसके पीछे-पीछे चलते थे. किसी खिड़की के नीचे ऊंची जगह बैठकर बकरा जब आराम की मुद्रा बैठकर नींद लेने लगता तो कुत्ते उसे चारो तरफ से घेरे रहते मानो उसकी रखवाली कर रहे हों.

ओपीडी में अपने जानवरों के उपचार का इंतजार करते लोग आपस में गपशप करते तो बकरा मनुष्यों की इस जमात में भी शामिल हो जाता. एक दफे बकरा ऐसे ही गपशप करते एक समूह के बीच खड़ा था तो मैने उसे पुचकारने के ख्याल से माथे पर थपकी दी, लेकिन यह मेरी गलती थी. बकरे ने गर्दन मोड़ी, मुझे अपनी पीली आंखों से घूरकर देखा और धक्का मारा. अस्पताल के कर्मचारियों ने मुझे बताया कि हमलोग आप जैसे ही कुछ ‘भोले-भाले’ लोगों की तलाश में रहते हैं जो इस बकरे को कुत्ता समझकर उसे दुलार करने की भूल करें और बकरे की ओर से मिलने वाली झिड़की के शिकार हों.

क्या बकरे-बकरियां कुत्तों की तरह स्मार्ट होते हैं? अभी हाल तक वैज्ञानिकों का मानना था कि जिन जानवरों को मनुष्य अपने साहचर्य में पालता है यानि जो पशु पालतू होते हैं, जैसे कुत्ते, बिल्ली और घोड़े सिर्फ वे ही पशु बुद्धिमान होते हैं और मनुष्यों के साथ रिश्ता बना पाते हैं. इस सोच के कारण लोग बाकी जानवरों को अपने भोजन या फिर मनोरंजन के लिए जान से मार डालते हैं. भारत में मटन यानी बकरे का मांस लोगों का एक पसंदीदा भोजन है.

अब शोध से यह साबित हो चला है कि कुत्ते और घोड़े ही की तरह बकरे-बकरियां भी लोगों के साथ संवाद कायम करने की कोशिश करते हैं.

बायोलॉजी लेटर्स में प्रकाशित एक शोध-ऋंखला में रिसर्चर्स ने कहा है कि बकरे-बकरियां जब किसी ऐसी समस्या का सामना करते हैं जिन्हें वे खुद से ना सुलझा पायें तो ऐसी दशा में वे मदद के लिए किसी व्यक्ति की तरफ टकटकी बांधकर देखते हैं. शोधकर्ताओं ने अपने प्रयोग में यह भी देखा कि व्यक्ति के व्यवहार को भांपकर बकरे-बकरियां अपना बरताव बदल लेते हैं.

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क्वीन मैरी, लंदन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है, 'पहले के रिसर्च के आधार पर हम यह बात तो जानते ही हैं कि आमतौर पर बकरे-बकरियों को जितना समझदार माना जाता है उससे वे कहीं ज्यादा बुद्धिमान होते हैं, लेकिन हाल के प्रयोगों से पता चला है कि उन्हें घरेलू पशु या फिर काम में सहायक जानवर के तौर पर ना भी पाला गया हो तब भी वे अपने संग-साथ के व्यक्ति के साथ संवाद कायम कर लेते हैं, साथी व्यक्ति के इशारों को समझकर अपना बरताव निर्धारित करते हैं.'

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बकरे-बकरियों के संवाद-कौशल की परीक्षा के लिए शोधकर्ताओं ने उन्हें एक बक्से के ऊपर पड़ा ढक्कन हटाने का प्रशिक्षण दिया. ढक्कन हटाने पर इनाम दिया जाता था. बाद में बक्से पर पड़ा ढक्कन हटाना मुश्किल कर दिया ताकि ईनाम आसानी से हासिल ना हो सके. इस प्रयोग के दौरान बकरे-बकरियों की प्रतिक्रियाएं देखी गईं और उन्हें दर्ज किया गया. देखा गया कि किन बकरे-बकरियों ने प्रयोगकर्ताओं की तरफ पीठ कर रखा है और ऐसे कौन-से बकरे-बकरी प्रयोगकर्ता की तरफ मुंह करके खड़े हैं और क्या प्रतिक्रिया कर रहे हैं.

निष्कर्ष ये निकला कि जब प्रयोगकर्ता बकरियों के एकदम सामने था तो बकरियों ने उसकी तरफ टकटकी बांधकर देखा, बिल्कुल कुछ उसी तरह जैसे कि कुत्ते अपने लिए कुछ भोजन मांगने के समय किया करते हैं.

प्रयोगकर्ता के पीठ मोड़े रहने की स्थिति में बकरियों ने ऐसी प्रतिक्रिया नहीं दिखायी, उन्हें पता था कि सामने खड़ा व्यक्ति किसी दूसरी तरफ देख रहा है. कुछ मामलों में यह भी नजर आया कि प्रयोग के लिए रखे गये बक्से की तरफ जाने से पहले बकरियां सामने खड़े और सीध में देख रहे व्यक्ति की तरफ मुड़ती थीं.

शोधकर्ताओं के मुताबिक इस परीक्षण से पता चलता है कि बकरे-बकरियों 'मनुष्य से जटिल संवाद स्थापित करने में सक्षम हैं और इस मामले में उनका संवाद-कौशल बहुत कुछ वैसा ही है जैसा कि कुत्ते सरीखे पालतू जानवर या फिर घोड़े जैसे कामकाजी जानवर का.'

बकरी में बुद्धिमत्ता की मौजूदगी या फिर इसके अभाव के बारे में शोध कर रहे वैज्ञानिकों का निष्कर्ष है कि बकरियां इस पृथ्वी पर मौजूद खुर वाले कुछ सबसे समझदार प्राणियों में एक हैं. स्विट्जरलैंड में इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर साइंस के वैज्ञानिकों को लंबे समय से यह अभास था कि बकरियों को जितना समझदार माना जाता है, वे उससे कहीं ज्यादा बुद्धिमान होती हैं. मिसाल के लिए, बकरियां जटिल ताने-बाने वाले समूहों में रहती हैं, भोजन की किसी चीज को हासिल करना कितना भी कठिन क्यों ना हो, बकरियां उस तक पहुंच ही जाती हैं.

मिसाल के लिए, मोरक्कों में स्वादिष्ट स्पिंग्स की तलाश में बकरियां 30 फुट ऊंचे आर्गन वृक्ष पर भी जा चढ़ती हैं. बकरियां अपने परिचय की वस्तु, व्यक्ति तथा हुनर को याद रखती हैं. खाने-पीने के मामले में बकरियां बड़ी नफासत-पसंद होती हैं. कंटीली झाड़ियों में से नर्म मुलायम पत्ते बड़ी बारीकी से चुन लेती हैं. घास की नर्म कलगी चुनने में भी बकरियां माहिर होती हैं.

शोधकर्ताओं ने बुद्धिमत्ता को आंकने के एक अन्य प्रयोग में बकरियों को एक 'आर्टिफिशियल फ्रूट चैलेंज' हल करने के लिए दिया. बुद्धि-कौशल को जानने का यह खेल दरअसल लंगूरों के लिए तैयार किया गया था. इस खेल में, फलों को एक बॉक्स में रखा जाता था और इस बॉक्स तक पशु तभी पहुंच सकता था जब वह पहेली को हल कर दे. पहली कुछ इस तरह की थी कि बकरियों को एक लीवर को सक्रिय करना होता था. इसके लिए उन्हें रस्सी को अपने दांतों से खींचना था और अपने थूथन से लीवर को ऊपर उठाना था.

ज्यादातर बकरियों ने इस पहेली को चार प्रयासों में हल कर दिया. कुछ बकरियां पहेली ना सुलझा पाईं. दरअसल इन बकरियों ने शॉर्टकट अपनाया और अपनी सींग का इस्तेमाल करके फल वाले बक्से तक पहुंचने की कोशिश की. इस कारण इन बकरियों को प्रयोगकर्ताओं ने असफल घोषित कर दिया.

प्रयोग में कामयाब घोषित की गई बकरियों को 10 घंटे के अंतराल से फिर से वही पहेली हल करने को दी गई. मंशा यह जानने की थी कि दोबारा बकरियां पहेली को हल करने में कितना समय लेती हैं. सारी बकरियों को याद था कि पहले किस तरह सुलझाना है. बकरियों ने एक मिनट से भी कम समय में पहेली सुलझा ली और फल के डिब्बे तक पहुंच गईं. इससे पता चलता है कि बकरियों में किसी बात को देर तक याद रखने की अच्छी क्षमता होती है.

बकरी पालने वाले बताते हैं कि बकरियां शांत स्वभाव की होती हैं और किसी चीज को बड़ी खोजी निगाह से परखती हैं. बकरियां जो कुछ कर सकती हैं, उनमें से कुछ बातों को यहां नीचे दर्ज किया जा रहा है...

भले ही कोई व्यक्ति अलग-अलग कपड़ों में सामने आए, लेकिन बकरियां उसे पहचान लेती हैं, यानी वे दो व्यक्तियों के बीच फर्क कर सकती हैं.

प्रतीकात्मक फोटो रॉयटर्स से

बकरियों को याद होता है कि उन्हें दिन में किस वक्त खाना मिलता है, अगर उस वक्त खाना न मिले तो वे अपने हाव-भाव से इसकी शिकायत करती हैं.

चाहे किसी खास जगह पर गये तीन महीना ही क्यों ना हो जाय- बकरियों को याद होता है कि वहां उन्हें स्वादिष्ट भोजन हासिल हुआ था.

लंबे डंठल वाले घास के बीच अगर खाने की कोई चीज मौजूद हो और कोई अंगुली या आंख के इशारे से इस चीज की तरफ संकेत करे तो बकरियां ऐसे संकेत को समझ लेती हैं.

बकरियों को कुछ करतब इशारों के जरिये सिखाये जा सकते हैं. मसलन आप हाथ के इशारे से उन्हें किसी ऊंची जगह पर खड़े होने को कहें या पिछली टांग पर खड़े होने को कहें तो वो ऐसा करना सीख लेती हैं.

आप चाहें तो बकरियों को अलग-अलग नाम दें और उन्हें उनके खास नाम से पुकारें- बकरी अपने नाम से पुकारे जाने पर प्रतिक्रिया जाहिर करती है.

अगर किसी पौधे को खाने से बकरियों को बीमारी लगी हो तो वो इसे याद रखती हैं, और दोबारा फिर कभी उस पौधे को नहीं खातीं.

किसी वांछित जगह पर जाने के लिए कौन सा रास्ता ठीक होगा- ये बात बकरियों को पता होती है. मिसाल के लिए, अगर खाने की जगह और बकरी के बीच को कोई जलधारा बह रही हो तो बकरी जलधारा के बहाव के विपरीत दिशा में और बहाव की दिशा में कुछ दूर तक जाकर मुआयना करती है और देखती है कि खाने की जगह पर किस रास्ते पहुंचा जाए.

कंटीली बाड़ में कोई तार बाहर की तरफ निकला हो तो बकरी इसे एक वांछित ऊंचाई तक लाने के लिए मोड़ सकती है- ऐसा करके वह अपनी सींगों के बीच की जगह तार से रगड़कर खुजली मिटाती है.

बकरी क्लिप-हुक को खोल सकती है. वह अपने मुंह से डोरनॉब को खोल सकती है. बकरी को आईना देखना अच्छा लगता है. कुत्ते और घोड़े की तरह बकरी को भी झुंड से अलग रहने में सकून महसूस होता है.

बकरियों को कुछ कठिन काम करना सिखाया जा सकता है. मिसाल के लिए आप उन्हें यह सिखा सकते हैं कि पानी पीना हो तो वे किस संकेत चिन्ह को चुनें. अगर बकरी को पता हो कि लंबा रास्ता चुनने पर उन्हें स्वादिष्ट भोजन खाने को मिलेगा तो वे नजदीक नजर आ रहे भोजन को छोड़ देती हैं, भले ही वहां तक पहुंचने का रास्ता छोटा हो.

लंदन के शोधकर्ताओं ने अपने प्रयोग में देखा कि बकरियां अपने करीबी दोस्तों की आवाज को पहचान लेती हैं, वे अपने जोड़े के हल्की मिमियाहट को सुनकर उसकी तरफ देखती हैं. अगर पास में कोई जान-पहचान की बकरी ना हो या कोई अपरिचित मिमियाहट सुनाई पड़े तो वे अपरिचय के भाव से देखती हैं, ऐसा जताती हैं मानो उन्हें पता हो किस बकरी ने आवाज निकाली है. बकरियां अपने झुंड के साथियों के चेहरे के हाव-भाव के प्रति संवेदनशील होती हैं. फ्रांस की बकरियों के सामने उनकी जान-पहचान की किसी ऐसी बकरी की तस्वीर रखी गई जो परेशानी की हालत में थी तो उन्होंने इस तस्वीर पर ज्यादा ध्यान दिया लेकिन अपनी साथी बकरी की शांत और आराम की मुद्रा वाली तस्वीर की तरफ उन्होंने खास ध्यान नहीं दिया.

बकरियां जिज्ञासु और स्वतंत्र स्वभाव की होती हैं, वो अक्सर शरारत करती हैं और हमेशा भागने की ताक में होती हैं. आप चाहें तो यूट्यूब पर देख सकते हैं कि बकरियां कैसी अजीबोगरीब जगहों पर चली जाती हैं. साल 2016 के मार्च में ग्रीस में एक बकरी बिजली के तार में अपने सींग फंसाकर बीस फीट की ऊंचाई पर झूलती हुई पाई गई जबकि तार तक उछाल लगाने की आस-पास कोई जगह नजर नहीं आ रही थी. स्थानीय अधिकारियों को अब भी ठीक-ठीक नहीं पता कि बकरी आखिर उतनी ऊंची तार पर पहुंची कैसे? बकरी को बिजली के तार से उतारने के लिए लंबी सीढ़ी और रस्सी का सहारा लेना पड़ा. बचा लिए जाने के बाद बकरी खुशी में छलांग मारते हुये रफूचक्कर हो गई.

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कोलोरेडो में सिक्योरिटी कैमरे ने बकरी को खिड़की के शीशे तोड़ते हुए दर्ज किया. वीडियो में दिखता है कि एक बकरी शीशे के बने दरवाजे की तरफ जा रही है और अपनी सींग से उसपर टक्कर मार रही है. शीशा टूट जाने पर बकरी भाग जाती है. बकरी एक बार फिर से लौटती है और अगले दरवाजे के शीशे को अपना निशाना बनाती है. जाहिर है, बकरी मस्ती कर रही थी.

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किन्डर गॉट ब्रीडर्स एसोसिएशन का कहना है कि कुत्ते की तरह बकरी भी मनुष्य के सुख-दुख का साथी हो सकती है. एसोसिएशन के मुताबिक, 'बकरियां समझदार और स्नेही स्वभाव की होती हैं, उन्हें प्रशिक्षित करना आसान होता है- आप चाहें तो उन्हें दूध निकालने या फिर किसी छोटी गाड़ी को खींचने के लिए प्रशिक्षित कर सकते हैं. बकरियों को अपने पालनहार के साथ रहना अच्छा लगता है, वो वाकिंग, हाइकिंग और कैम्पिंग में अच्छा साथ निभाती हैं. वो स्वभाव से शरारती होती हैं और खूब मजे करती हैं.'

कुछ पालतू बकरियों का इस्तेमाल थेरेपी गोट्स के रूप में होता है. ये बकरियां किसी जरूरतमंद व्यक्ति के साथ स्कूल, असिस्टेड लीविंग-फैसेलिटिज( ऐसे केंद्र जहां किसी जरूरतमंद व्यक्ति को चलने-फिरने सरीखे कामों में मदद दी जाती है) तथा सामुदायिक केंद्रों में जाती हैं. डेल्टा सोसायटी नाम का एक संगठन चिकित्सीय देखभाल के काम के लिए पालतू जानवरों का परीक्षण और पंजीकरण करता है.

इस संगठन ने जिन जानवरों का थेरेपी-वर्क के लिए पंजीकरण किया है उनमें बकरियां शामिल हैं. पेट-थेरेपिस्ट बनने के लिए बकरी को एक जांच-परीक्षा पास करनी होती है. इस परीक्षा को पास करने वाली बकरी को भरोसेमंद माना जाता है, यानी आप जान सकते हैं कि बकरी कब क्या बरताव करेगी और उससे किस तरह काम लेना है. थेरेपिस्ट बकरी को सार्वजनिक जगहों पर शिष्ट बर्ताव करना आना चाहिए और उसमें अजनबी लोगों के साथ रिश्ता बनाने का सामाजिक हुनर भी होना चाहिए.

हमलोग नगाओं को अच्छा नहीं मानते क्योंकि वे कुत्ते का मांस खाते हैं. लेकिन मुझे लगता है, बकरी का मांस खाना भी इसी किस्म का विचित्र काम है.

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