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जब स्टालिन ने अपने विरोधी त्रॉत्सकी की मैक्सिको में करवा दी थी हत्या

20 अगस्त 1940 को त्रॉत्सकी ने जैक्सन को एक लेख पर विचार विमर्श के लिए एकांत में बुलाया और जैक्सन को इसी दिन का इंतजार था

Surendra Kishore Surendra Kishore Updated On: Sep 18, 2017 10:33 AM IST

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जब स्टालिन ने अपने विरोधी त्रॉत्सकी की मैक्सिको में करवा दी थी हत्या

सोवियत तानाशाह जोसेफ स्टालिन के कट्टर विरोधी त्रॉत्सकी की हत्या करने में सोवियत जासूसों ने छल-कपट का इस्तेमाल किया था. उनकी हत्या मैक्सिको में 20 अगस्त 1940 को हुई. उनके सिर पर फावड़ा मार कर हत्या की गई थी.

1879 में जन्मे लियोन त्रॉत्सकी एक मार्क्सवादी, क्रांतिकारी और सिद्धांतवादी सोवियत राजनीतिज्ञ थे. पर वे स्टालिन के विरोधी थे.

स्टालिन ने अपने जासूसों को यह सख्त निर्देश दिया था कि ‘किसी भी नीति-रणनीति का पालन क्यों न करना पड़े. कोई कार्य पद्धति क्यों न अपनानी पड़े. पर त्रॉत्सकी को जल्द से जल्द खत्म कर दो.’

त्रॉत्सकी एक जिद्दी किस्म के इंसान थे. पहले तो उन्होंने सोवियत संघ में रहकर ही स्टालिन का विरोध किया. पर जब स्टालिन ने एक-एक करके अपने राजनीतिक विरोधियों का सफाया शुरू किया तो प्राण रक्षा के लिए त्रॉत्सकी विदेश भाग गए. कई देशों से होते हुए त्रॉत्सकी मैक्सिको पहुंचे थे.

वहां भी वे स्टालिन की सख्त आलोचना करते हुए, यूं कहें कि गालियां देते हुए अखबारों में लेख लिखने लगे. स्टालिन उस पर आग बबूला था.

सोवियत शासन उसे कैसे बर्दाश्त करता!

सोवियत कम्युनिस्ट सरकार के अच्छे गुणों को उभार कर जहां पूरी दुनिया में पोलेटेरिएट की तानाशाही कायम करने का सपना देखा जा रहा था,वहीं त्रॉत्सकी एक नए तरह के शासन और उसके शासक के खिलाफ अभियान चलाने में लगे थे. सोवियत संघ और स्टालिन को यह कैसे बर्दाश्त होता !

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मैक्सिको में जाकर बसने से पहले त्रॉत्सकी सोवियत संघ से भाग कर तुर्की चले गए थे. स्टालिन के जासूसों ने जब उनका तुर्की में भी पीछा किया तो वह नार्वे चले गए. पर सोवियत संघ ने नार्वे सरकार पर दबाव डाल कर उन्हें उस देश से निकलवा दिया.

उसके बाद ही उन्होंने मैक्सिको में शरण ली. उन्होंने सोचा होगा कि शायद स्टालिन के लिए मैक्सिको दूर पड़ेगा. पर यह त्रॉत्सकी की गलतफहमी थी. सोवियत जासूसों ने उनकी हत्या के लिए वहां भी एक छल के जरिए पक्का प्रबंध करा दिया.

जासूसों के लिए पहले यह जानना जरूरी था कि त्रॉत्सकी का वहां कौन भक्त है? किस भक्त की बात त्रॉत्सकी सुनते हैं. पता चला कि वह एक लड़की है.

सोवियत जासूसों को पता था कि त्रॉत्सकी किसी भोले-भाले दिखने वाले व्यक्ति पर शीघ्र विश्वास कर लेते हैं. जासूसों को इस कमजोरी का लाभ मिला. जैक्सन नामक भोला- भाला दिखने वाले व्यक्ति की जासूसों ने उस लड़की से दोस्ती करवा दी. उस लड़की को जैक्सन के खतरनाक इरादे की कोई भनक तक नहीं थी. फिर जैक्सन का परिचय उस लड़की ने त्रॉत्सकी से करवा दिया.

उस लड़की का त्रॉत्सकी के यहां अकसर आना-जाना था. त्रॉत्सकी ने जैक्सन पर भी विश्वास कर लिया. उधर मैक्सिको के अखबारों में त्रॉत्सकी सोवियत संघ और स्टालिन के खिलाफ स्टालिन के अत्याचारों और ज्यादतियों की जो झूठी-सच्ची कहानियां लिखते थे, उससे मैक्सिको में भी त्रॉत्सकी का एक समर्थक वर्ग तैयार हो गया था.

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लेनिन के साथ ट्राटस्की (बाएं)

लेनिन के साथ त्रॉत्सकी (बाएं)

त्रॉत्सकी मैक्सिको के एक किलेनुमा घर में भारी सुरक्षा के बीच रहते थे. उस लड़की से दोस्ती के कारण जैक्सन का उस घर में आना जाना शुरू हो गया. जैक्सन की रुचि भी लेख लिखने की थी.

त्रॉत्सकी अपने लेख के विषयों पर उससे विचार विमर्श करते थे. पर फिर भी जैक्सन की एकांत में त्रॉत्सकी से मुलाकात नहीं हो पा रही थी. जैक्सन को एकांत में मुलाकात का इंतजार था.

त्रॉत्सकी पर पीछे से जैक्सन ने फावड़े से किया था वार

संयोगवश 20 अगस्त 1940 को त्रॉत्सकी ने जैक्सन को एक लेख पर विचार विमर्श के लिए एकांत में बुलाया. जैक्सन को उसी दिन का इंतजार था. उस दिन वह रेनकोर्ट पहन कर गया.

संतरी ने जब पूछा तो जैक्सन ने बताया कि आज बारिश की संभावना है. उसने अपने रेनकोट में कटार, रिवाल्वर और फावड़ा छिपा रखा था. जैक्सन त्रॉत्सकी के पास बैठक कर उचित पल का इंतजार करने लगा.

त्रॉत्सकी लेख पढ़ रहा था. उस समय उसका ध्यान सिर्फ उसी काम में था. जैक्सन त्रॉत्सकी की निगाह बचा कर उनके पीछे की ओर गया.उसने अपनी फावड़ा निकाला और त्रॉत्सकी के सिर पर जोर से वार कर दिया. इस वार से त्रॉत्सकी के सिर पर तीन इंच गहरा घाव बन गया.

बुरी तरह घायल त्रॉत्सकी चिल्लाने लगे.चीख सुनकर घर के लोग अध्ययन कक्ष में जुट गए. लोगों ने देखा कि त्रॉत्सकी जमीन पर पड़े छटपटा रहे थे.

लोगों ने जैक्सन के हाथ में फावड़ा देख उसे  बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया. थोड़ी ही देर की मार से जैक्सन बुरी तरह घायल हो गया. पर वह मरा नहीं. कुछ घंटे में त्रॉत्सकी के प्राण पखेरू उड़ गए.

मैक्सिको की अदालत में जैक्सन पर मुकदमा चला. पुलिस ने यह साबित कर दिया कि जैक्सन रूसियों का खुफिया एजेंट था. जाली पासपोर्ट के आधार पर वह मैक्सिको आया था.

जैक्सन को बीस साल की सजा हुई. उस देश के कानून के अनुसार वह सबसे बड़ी सजा थी. सजा पूरी करने के बाद वह सोवियत संघ लौट गया. पर जब तक वह मैक्सिको में रहा,अपने बारे में किसी को कुछ नहीं बताया.

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