S M L

बनारस की होलीः जहां हवाएं भी शरारत पर उतर जाती हैं

कबीर के शब्‍दों में कहा जाए, 'लाली मेरे लाल की जित देखूं तित लाल/लाली देखन मैं गई, मैं भी हो गई लाल'...अर्थात बनारस की होली जिसने देखी वह होली के रंग बिना रंगे नहीं रहता !!

Updated On: Mar 02, 2018 08:21 AM IST

Shivaji Rai

0
बनारस की होलीः जहां हवाएं भी शरारत पर उतर जाती हैं

पवन के पांव में यह किसने डाल दी पायल,

हरेक झोंके में घुघरू छनक रहे हैं आज . 

शरारतों पर तुली हैं हवाएं फागुन की,

संभालने पर भी आंचल सरक रहे हैं आज.

बनारस की होली पर लिखी गई मशहूर शायर नजीर बनारसी की ये पंक्तियां वहां की होली को बताने के लिए काफी हैं. कबीर की उलटबांसी की तरह बनारस का समाजशास्‍त्र अलहदा है. यहां की अपनी संस्‍कृति है. अपने मेले-तमाशे हैं. अपना संगीत है और अपनी होली भी है. भाव-भंगिमा के लिहाज से कहा जाए तो बनारस शहर से अधिक‍ मिजाज का नाम है.

शहर की तासीर अलग होने से यहां पर्व-त्‍योहारों की रंगत भी अनूठी है. बात अगर होली की हो तो फक्‍कड़पन से रचे बसे शहर में मस्‍ती का ग्राफ चौगुना होना लाजिमी है. यहां होली में शरीर ही नहीं मन भी इंद्रधनुषी हो जाता है. भगवान अवधूत की नगरी में होली सिर्फ रंग-गुलाल, अबीर तक सीमित नहीं होती. यहां तो रंग-भंग, गारी (गाली) और लोक संगीत की जुगलबंदी का नाम होली है. मृत्‍यु उत्‍सवी शहर में कोई ऐसी जगह नहीं होती जहां होली की रंगत न दिखती हो.

घाटों, मंदिरों, संकरी गलियों से लेकर श्‍मशान तक हर जगह होली की धूम सहज दिखती है. तभी तो पद्मभूषण पंडित छन्‍नूलाल मिश्र गाते हैं...' होली खेले मसाने में...' छन्‍नूलाल मिश्र कहते हैं कि काशी में होली में कौन सराबोर नहीं होता..काशी में नाथ से, राख से, भस्म से, भभूत से, रेत से, प्रेत से सबसे होली खेली जाती है. यहां विधवाएं भी होली खेलती हैं और वेश्‍याएं भी रंग और भांग में खुद को सराबोर करती हैं. किसी को रंगे बिना नहीं छोड़ने वाली बनारस की होली अपने आप में तीनों लोक में न्‍यारी है.

मुंह में पान घुलाए अवधु गुरु भी आवाज में जोर देते हुए कहते हैं, 'ई बनारस हौ राजा होली में किस बात का परहेज, होली में भांग व्‍यसन नहीं, व्‍यंजन हो जात हौ...भांग, पान और ठंडई के बिना होली का क्‍या मजा?

अवधू गुरु की बात सामाजिक धरातल पर भले गलत प्रतीत होती हो पर बनारस की सामाजिक पृष्‍ठभूमि में इसकी सहज स्‍वीकृति है. बनारस के बेनजीर शायर नजीर बनारसी भी भांग को लेकर फरमाते हैं. ठंडई में क्‍या घोल दिया था पंडित, हम रात भर उड़ते रहे नभमंडल में ...होली में भांग और ठंडई को यहां 'प्रसाद' की संज्ञा दी गई है फिर प्रसाद की स्‍वीकारोक्ति होना लाजमी है.

मुस्‍कराहट के साथ रस से भरी गाली और मर्यादित हुल्‍लड़बाजी बनारस में ही संभव है. फागुन का सुहानापन जहां एक तरफ यहां के लोगों की उत्‍सवधर्मिता का बोध कराता है, वहीं भारतीय संस्‍कृति में पर्व-त्‍योहार के मूलभाव से भी लोगों को रूबरू कराता है. संकरी गलियों में उठने वाली होली के गीतों की सुरीली धुन हो या चौराहों पर सजने वाले होली मिलन समारोह सभी आपसी सौहार्द के नजरिए से बेजोड़ हैं. मटका फोड़ होली और हुरियारों के ऊर्जामयी लोकसंगीत आमसे लेकर खास तक सभी को एक रंग में रंग देती है जोगीरा , सारा, रा, रा, रा, की हुंकार पर कौन अपनी सुध-बुध संभाल पाता है.

हुरियारों की वाह-वाही की बात तो दूर विदेशी सैलानी भी वाह-वाही और सारा, रा..रा...बोलने से खुद को रोक नहीं पाते हैं. इसी अनूठेपन से बनारस की होली श्‍लील-अश्‍लील, वर्जनाओं के दायरे से बाहर होकर भी मर्यादा और संस्‍कार को कायम रखती है. यहां होली में हंसी-ठिठोली के साथ, रस पगी गाली दुर्भावना नहीं, अपनत्‍व को दर्शाती है. या ये कहें तो ज्‍यादा सटीक होगा कि बनारस की होली में हम उम्र, चुलबुल और स्‍नेहिल रिश्‍तों के बीच हंसी-ठिठोली और रस भरी गाली ना हो तो यह शहर का अपमान है. तभी तो 'होली में बुढ़वा देवर लागे' वाला गीत अपनी कालजयिता के साथ साथ अपनी प्रासंगिकता को भी सहज बरकरार रखे हुए है.

कन्हैया के नंदगांव में शुरू हुआ होली का उत्सव. (फोटो: पीटीआई)

प्रतीकात्मक तस्वीर

स्‍थानीय कथाकार और विद्वान भी मानते हैं कि समय के दबाव में बनारस में भी बहुत कुछ बदलाव आया. फिर भी सात वार-नौ त्‍योहार वाले बनारस में पर्व-परंपराएं और मान्‍यताएं बहुत हद तक यथावत हैं. काशीनाथ सिंह कहते हैं कि बनारस की आत्‍मा में उत्‍सवधर्मिता है. यही उत्‍सवधर्मिता और मस्‍ती बनारस की पहचान है. अल्‍हड़पन और मस्‍ती ही बनारस की होली को सबसे अल्‍हदा और अनूठा बनाती है.

आधुनिकता की दौड़ में भी लोकजीवन का हस्‍तक्षेप यहां आज भी कमावेश जिंदा है. कबीर के शब्‍दों में कहा जाए, 'लाली मेरे लाल की जित देखूं तित लाल/लाली देखन मैं गई, मैं भी हो गई लाल'...अर्थात बनारस की होली जिसने देखी वह होली के रंग बिना रंगे नहीं रहता !!

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Ganesh Chaturthi 2018: आपके कष्टों को मिटाने आ रहे हैं विघ्नहर्ता

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi