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इतिहास से अपने विरोधियों को मिटाने में माहिर था स्टालिन

स्टालिन का सोवियत की सत्ता पर एकाधिकार था और पूरी सरकार के सहयोग के साथ उसके विरोधियों को इतिहास से गायब कर देने का गंदा खेल खेला जाता था

Arun Tiwari Arun Tiwari Updated On: Sep 20, 2017 09:29 AM IST

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इतिहास से अपने विरोधियों को मिटाने में माहिर था स्टालिन

वर्तमान भारतीय राजनीति में फोटोशॉप का गेम जमकर खेला जाता है. व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया पर कई ऐसी तस्वीरें आती हैं जिनके बारे में बाद में पता चलता है कि ये फेक हैं. चुनावों के दौरान तो ऐसा खूब चलता है. कई बार इन फेक तस्वीरों का इस्तेमाल नेताओं की छवि को बर्बाद करने के लिए किया जाता है तो कई तस्वीरें छवि बनाने के लिए बनाई जाती हैं.

लेकिन ये बेहद आश्चर्यजनक बात है कि तस्वीरों के साथ खिलवाड़ का सिलसिला बेहद पुराना है. ये फोटोशॉप के आने से बहुत पहले ही शुरू हो गया था. शायद कंप्यूटर के आने के भी कई दशक पहले.

भारत में तो फेक तस्वीरों का इस्तेमाल सिर्फ राजनीतिक विरोधियों की छवि धूमिल कर देने तक सीमित है लेकिन करीब 70 साल पहले रूसी तानाशाह स्टालिन ने अपने राजनीतिक विरोधियों को तस्वीरों से गायब करवाने का एक जबरदस्त षड्यंत्र रचा था. स्टालिन का सोवियत की सत्ता पर एकाधिकार था और पूरी सरकार के सहयोग के साथ उसके विरोधियों को इतिहास से गायब कर देने का गंदा खेल खेला जाता था. और इसके लिए जरूरी नहीं था सामने वाला स्टालिन का मजबूत विरोधी हो सिर्फ उसका विरोधी मत ही जाहिर कर देना काफी था.

स्टालिन ने अपने कितने राजनीतिक विरोधियों का सफाया किया, इसका आंकड़ा तो शायद आज भी पूरा न हो लेकिन तस्वीरों से वो अपने विरोधियों को कैसे गायब करवाता था, ये बेहद दिलचस्प पहलू है. सिर्फ गायब ही नहीं रूसी क्रांति के जनक लेनिन के बीमार हो जाने के बाद उनके साथ अपनी एक तस्वीर को उसने कैसे पूरे देश में पाट दिया था, ये जानना भी बेहद मजेदार है.

स्टालिन की तस्वीरों में कराई गई इस कलाकारी का खुलासा किया था ब्रिटिश लेखक और ग्राफिक डिजाइनिंग के इतिहासकार डेविड किंग ने. डेविड ने सोवियत संघ की तस्वीरों पर अभी तक का सबसे बड़ा कलेक्शन किया था. इस दौरान ही उन्हें इस बात की जानकारी हुई कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को सिर्फ वतर्मान ही नहीं इतिहास से मिटाने देने का भयानक षड्यंत्र रचा था. तस्वीरों के इस पूरे कलेक्शन पर डेविड किंग की एक किताब 1997 में आई थी जिसका नाम था कमिसार वैनिसेज: द फाल्सिफिकेशन ऑफ फोटोग्राफ्स एंड आर्ट इन स्टालिन्स रसिया (he Commissar Vanishes: The Falsification of Photographs and Art in Stalin's Russia). उस समय के सोवियत में सर्वोच्च पद को कमिसार ही कहा जाता था.

इस किताब में डेविड किंग ने एक बाद एक कई तस्वीरों के जरिए खुलासा किया कि आखिर कैसे स्टालिन अपने विरोधियों का सफाया करवाता था. उदाहरण देखिए...

stalin

इस तस्वीर में स्टालिन के साथ निकोलाई येझोव स्टालिन के साथ दिख रहे हैं. ये मास्को कैनाल के शुभारंभ की तस्वीर है. लेकिन कुछ सालों बाद जब निकोलाई सत्ता से बेदखल किए गए तो तस्वीरों से भी गायब हो गए.

trotsky

ये तस्वीर 7 नवंबर 1919 की है. इस तस्वीर में उस समय की सोवियत लीडरशिप के बड़े नेता दिख रहे हैं, जो रूसी क्रांति की दूसरी वर्षगांठ मना रहे हैं. इसमें व्लादिमीर लेनिन के साथ लियॉन ट्राट्स्की दिखाई दे रहे हैं. लेनिन के रहते तो ट्राट्स्की सोवियत के ताकतवर लोगों में बने रहे लेकिन जैसे ही स्टालिन ने सत्ता पर कब्जा जमाया तो मदभेद शुरू हो गए. कई सालों इस तस्वीर से ट्रॉट्स्की को गायब ही कर दिया गया. इससे भी वीभत्स यह हुआ कि ट्राट्स्की की बेहद क्रूर हत्या कर दी गई.

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सोवियत की इस मशहूर तस्वीर में भी जब लेनिन भाषण दे रहे हैं तो उनके नीचे बायीं तरफ ट्राट्स्की नजर आ रहे हैं. लेकिन बाद की तस्वीरों में उन्हें गायब करवा दिया गया.

russia

ये तस्वीर फरवरी 1897 की है. इस तस्वीर में ऊपर खड़े लोगों में सबसे बायीं तरफ जो लड़का खड़ा है वो इंजीनियरिंग का छात्र था, एलेक्जेंडर मालचेन्को. इसकी मां ने लेनिन को अपने घर में छिपने की जगह दी. बाद में मालचेंको रूसी सरकार का हिस्सा बने. लेनिन के रहते उन्हें बेहतर जगह मिली. लेकिन उनका अंत भी स्टालिन विरोध के साथ ही हुआ. और 18 नवंबर 1930 को मौत की सजा दे दी गई.

ये तो तस्वीरें सिर्फ कुछ बानगी भर हैं. स्टालिन के शासनकाल में 1935 से 1937 तक ग्रेट पर्ज नाम का कुख्यात हत्या षड्यंत्र चला था. इसमें हजारों ऐसे लेखकों और सरकारी अधिकारियों की हत्या हुई जो किसी भी तरह सरकार के विरुद्ध कुछ कह-सुन रहे थे. इनमें ट्राट्स्की भी शामिल थे.

इन सबसे दिलचस्प एक और तस्वीर है जिसे स्टालिन ने सोवियत में अपनी ख्याति के लिए इस्तेमाल किया था. इस तस्वीर में अधेड़ उम्र के लेनिन के साथ स्टालिन नजर आ रहा है. इस फेक तस्वीर को स्टालिन ने इसलिए इस्तेमाल किया सोवियत में उसे ही लेनिन का असली उत्तराधिकारी माना जाए.

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आज के दौर में जब सोशल मीडिया पर फोटोशॉप तस्वीरों के बीच फंसे होते हैं तो अक्सर हमें ऐसे लोग दिख जाते है जो इसके लिए वैचारिक आरोप लगाते रहते हैं. ऐसे लोगों को समझाया तो जा नहीं सकता लेकिन हालिया दौर के फोटोशॉप मास्टर्स को ये समझना चाहिए कि उनका असली गुरु तो सोवियत में पैदा हुआ था.

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