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न्यूटन: सिर पर सेब गिरने की झूठी कहानी, जिसने दुनिया बदल दी

न्यूटन ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है. भले ही उनके सिर पर सेब न भी गिरा हो मगर उनकी ही बदौलत आज बहुत सी चीजें चल रही हैं

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee Updated On: Jan 04, 2018 12:16 PM IST

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न्यूटन: सिर पर सेब गिरने की झूठी कहानी, जिसने दुनिया बदल दी

कहते हैं कि दुनिया बदलने में तीन एपल का सबसे बड़ा योगदान है. पहला एडम और ईव का, दूसरा आइज़क न्यूटन का और तीसरा एपल कंप्यूटर्स का. अब चौथा एपल किसे मिलेगा पता नहीं मगर बात करते हैं दूसरे एपल वाले शख्स यानी सर आइज़क न्यूटन की.

विज्ञान की दुनिया से कम वास्ता रखने वाले लोग अक्सर कहते हैं कि न्यूटन क्लास की जगह बगीचे में बैठे थे और उनके सामने गिरे सेब ने उन्हें बड़ा वैज्ञानिक बना दिया. ये बेहद सामान्यीकरण है. न्यूटन ने कई ऐसे सिद्धांत दिए हैं जिनपर भौतिक विज्ञान की नींव पड़ी है. गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत इनमें से एक है. वैसे सबसे पहले आपको एक बात स्पष्ट कर दें कि न्यूटन के सर पर कभी सेब नहीं गिरा था. एक रात वो डिनर के बाद बगीचे में खड़े थे. वहां सामने सेब का पेड़ देखकर उनके दिमाग में ग्रैविटी का खयाल आया. अब जनता को चाशनी और मसाले लपेटकर बनाए गए किस्से पसंद हैं तो समय के साथ सिर पर सेब गिरने की कहानी बना दी गई.

न्यूटन के तीन नियम

न्यूटन का सबसे बड़ा योगदान विज्ञान के तीन नियम हैं. इन तीन नियमों पर फिजिक्स की नींव है. न्यूटन का पहला नियम है कि अगर कोई चीज़ रुकी है तो रुकी रहेगी, चलती है तो चलती रहेगी अगर इसपर कोई बाहरी ताकत न लगाई जाए. ये नियम सुनने में जितना आसान लगता है उतना ही जरूरी है. हम सब जानते हैं कि कोई भी चीज़ हमेशा चलती नहीं रहती, तो ऐसा क्यों होता है? इस सवाल के चलते विज्ञान में न्यूटन के बाद कई सारे नए फोर्स, तलाशे गए.

इसी तरह न्यूटन का दूसरा नियम कहता है कि किसी भी चीज़ में फोर्स उसको दिए गए एक्सेलरेशन और वजन के बराबर होता है. दूसरे तरीके से या तो आप कोई भारी पत्थर किसी पर धीरे से मारें या हल्का पत्थर तेजी से मारे दोनों में बराबर असर पड़ेगा. इसके अलावा न्यूटन का तीसरा नियम क्रिया-प्रतिक्रिया का है. किसी भी क्रिया के बराबर और उलटी प्रतिक्रिया होती है. इस नियम को समझना आसान है चाहे तो किसी बराबर वाले को एक थप्पड़ मार कर देख लें.

ग्रैविटी के बाद कैलकुलस

न्यूटन का योगदान इन तीन नियमों तक खत्म नहीं होता. उन्होंने सबसे पहले प्रिज्म के जरिए प्रकाश के सात रंगों के बारे में बताया. इसी तरह उन्होंने आधुनिक गणित के कैलकुलस की खोज की. न्यूटन अपने काम को लोगों से छिपा कर रखते थे. जब दूसरे वैज्ञानिकों ने कैलकुलस की खोज के बारे में लिखना शुरू किया तो न्यूटन ने बताया कि वो पहले ही कैलकुलस के नियम तलाश कर चुके हैं. इसी तरह से न्यूटन ने बड़ी आसानी से समझाया कि हमारा सोलर सिस्टम कैसे काम करता है. क्यों चांद हमारे आसपास चक्कर काटता है न कि पृथ्वी चांद का चक्कर लगाती है.

दुनिया को बदलने वाले न्यूटन का व्यक्तित्व अपने आप में बहुत विरोधाभासी था. उनके जन्म से पहले ही उनके पिता की मौत हो गई थी. उनकी मां चाहती थी कि न्यूटन पढ़ाई छोड़ खेती करें. न्यूटन पर इन सबका बहुत असर पड़ा. एक बार उनके कुत्ते ने न्यूटन की स्टडी में जलती मोमबत्ती गिरा दी. न्यूटन की कई रिसर्च उस आग में जल गई. इस वैज्ञानिक की दिमागी हालत पर इससे बड़ा असर पड़ा.

बाइबिल में ढूंढ रहे थे संदेश

हालांकि दुनिया को विज्ञान की राह दिखाने वाले न्यूटन कुछ मामलों में जरूरत से ज्यादा धार्मिक भी थे. वो मानते थे कि बाइबिल में उनके लिए कोई संदेश छिपा है. इस गुप्त संदेश को खोजने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की. इसी तरह उनका विश्वास था कि दुनिया 2060 तक खत्म हो जाएगी. न्यूटन की खराब परवरिश का असर उनकी जिंदगी में कई जगह दिखता है. सर आइज़क न्यूटन जीवन भर अकेले रहे. उनकी मौत के बाद उनकी जांच करने वाले डॉक्टरों की माने तो उन्हें जीवन में एक भी बार किसी महिला के नजदीक रहने का मौका नहीं मिला.

खैर, सर आइज़क न्यूटन ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है. भले ही उनके सिर पर सेब न भी गिरा हो मगर उनकी ही बदौलत आज बहुत सी चीजें चल रही हैं. दुनिया बदलने वाला चौथा एपल कहां से और कैसे आएगा, देखना दिलचस्प रहेगा.

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