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पुण्यतिथि विशेष: फुटबॉलर जिसके गीतों के बिना प्रेम पत्र अधूरे रहते हैं

हिंदी सिनेमा के कुछ सबसे रोमांटिक गीत लिखने वाले इस गीतकार ने मोहनबागान से फुटबॉल भी खेला है

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee Updated On: Feb 25, 2018 09:19 AM IST

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पुण्यतिथि विशेष: फुटबॉलर जिसके गीतों के बिना प्रेम पत्र अधूरे रहते हैं

प्रेम में पड़ने वाले लोग अक्सर गाने गुनगुनाते हैं. पुराने जमाने में प्रेम पत्रों के बीच लिरिक्स भी खूब लिखे जाते थे, मसलन 'न ये चांद होगा, न तारे रहेंगे'. अब व्हॉट्सऐप पर फॉर्वर्ड और फेसबुक पर स्टेटस शेयर किए जाते हैं, जैसे कजरे ने ले ली मेरी जान या तारीफ करूं क्या उसकी, जिसने तुम्हें बनाया.

एस एच बिहारी ऐसे ही गीतकार हैं. जिनके लिखे गीत प्रेम करने वालों के जीवन में कभी न कभी आते ही हैं. ऊपर के पैराग्राफ में जो भी गीत लिखे हैं वो शम्सुल हुदा बिहारी के ही लिखे हैं. मगर बिहारी के काम को तो लोग जितना जानते हैं उतना उनके गीतों को नहीं.

बिहार के आरा में पैदा हुए बिहारी 1947 में मुंबई आ गए. इससे पहले मोहन बागान क्लब से फुटबॉल खेलते थे. उन्होंने स्क्रीन प्ले और डायलॉग भी लिखे मगर बिहारी के गीत यादगार बन गए. हिंदी सिनेमा में क्लासिक की कोई लिस्ट उनके गीतों के बिना नहीं बन सकती.

सादगी भरा प्रेम

शैलेंद्र साधारण शब्दों में दर्शन को उतार देने के मास्टर हैं. साहिर रूमानियत में एक ग्लैमर और भव्यता लेकर आते हैं. इसी तरह बिहारी के गीतों में सादगी सबसे बड़ा फैक्टर है. उनकी लिरिक्स में रूपक और उपमाएं भरपूर होती हैं मगर वो गीत की सुंदरता पर हावी नहीं हो पाती. इसी वजह से जब भी आम जनता को अपने/अपनी दिल की बात कहनी होती है तो बिहारी के लिखे गीत पूरा माहौल बना देते हैं.

उदाहरण के लिए आओ हुजूर तुमको सितारों में ले चलूं, या फिर ऐसी तो मेरी तक़दीर न थी, तुमसा जो कोई महबूब मिले. इन गीतों में ऐसा एक भी शब्द नहीं है जो आपको हमको समझ न आए. मगर रूपक भी है और उपमा भी. इस वजह से लिरिक्स सीधे दिल में उतर जाती है. जो बात कहना चाहता है वो भी खुश, जिससे कही जाती है वो भी खुश. इन्हीं से निकलती है, दुनिया है मेरे पीछे, लेकिन मैं तेरे पीछे, अपना बना ले मेरी जान जैसी लिरिक्स.

एस एच बिहारी को काम मिलने की भी एक रोचक दास्तान है. बिहारी अपने स्ट्रगल से परेशान हो गए थे. एक आखिरी कोशिश करने हिमांशु मुखर्जी के पास गए. हिमांशु नहीं मिले. बाजू पर एक ताबीज बंधा था, उसमें चांदी का एक सिक्का था. सिक्का निकाल कर चाय भजिया खा लिया. फिर एक बार स्टूडियो गए. देखा सामने ही हिमांशु मुखर्जी खड़े थे.

हिमांशु दा ने पूछा, क्या बेचते हो? बिहारी ने जवाब दिया, दिल के टुकड़े. हिमांशु मुखर्जी को ये जवाब बड़ा पसंद आया, गाड़ी चल निकलेगी. हिंदी साहित्य में रीतिकालीन कवि बिहारी की नायिका बहुत प्रसिद्ध है. एसएच बिहारी ने ऐसे कई गीत लिखे हैं जो तमाम नायिकाओं पर सूट करते हैं. सुनिए ऐसे ही कुछ गीत

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