S M L

जब हिप्नोटिक-एनालेसिस ने बुजुर्ग को बलात्कार और कत्ल के कलंक से बचा लिया!

कानून की नजर में जो ‘जांच’ या जांच का जो ‘फॉर्मूला’ मान्य ही न हो उससे अगर किसी की जान बच जाए तो लोगों को हैरत तो होगी ही

Updated On: Sep 01, 2018 09:19 AM IST

Sanjeev Kumar Singh Chauhan Sanjeev Kumar Singh Chauhan

0
जब हिप्नोटिक-एनालेसिस ने बुजुर्ग को बलात्कार और कत्ल के कलंक से बचा लिया!
Loading...

कानून की नजर में जो ‘जांच’ या जांच का जो ‘फॉर्मूला’ मान्य ही न हो. उसी फॉर्मूले या पड़ताल में इस्तेमाल ‘तरीके’से अगर कोई इंसान तमाम उम्र जेल की काल-कोठरी में कैद होने से बचा लिया जाए तो, यह किसी को भी हैरत में डाल देने वाला ही होगा. अमूमन इस तरह की ‘पड़ताल’, ऐसे हैरतंगेज प्रयोग या फिर ‘फॉर्मूले’ का इस्तेमाल, विदेशों में ही देखने-सुनने को मिलता है. अगर मैं कहूं कि ऐसा उदाहरण हिंदुस्तान में भी देखने को मिला तो किसी को भी मेरी दावेदारी पर आसानी से विश्वास नहीं होगा. ‘पड़ताल’ की इस कड़ी को पढ़ने के बाद मगर, आपको विश्वास करना पड़ेगा.

पेश है वो सच्ची मगर पूरी तरह साइंटिफिक (वैज्ञानिक) तथ्यों / सबूतों पर साबित हुई ‘पड़ताल’, जिसने बचा लिया 75 साल के एक बूढ़े इंसान को 70 साल की बुजुर्ग महिला के बलात्कार और कत्ल के इल्जाम से. अलग बात है कि यह कमाल संभव हो सका, एक अनुभवी भारतीय फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट की दूरदर्शिता/ सूझबूझ से. उसी ‘हिप्नोटिक-एनालिसिस’ के बलबूते जिसे, वाकई आज भी भारतीय कानून की नजर में ‘मान्यता’ तक हासिल नहीं है. क्या है आखिर इस उलझी हुई कहानी की सुलझी हुई ‘पड़ताल’ का सच? पढ़िए तफ्सील से उन्हीं फॉरेंसिक एक्सपर्ट की मुंहजुबानी, जिनकी सूझबूझ ने कालांतर में किसी बुजुर्ग के माथे पर, बलात्कार-हत्या जैसे संगीन आरोप को लगने से बेदाग बचा लिया.

फुटपाथ पर मिली बुजुर्ग महिला की लाश

1111

बात है सन् 2001 और 2002 के आसपास की. उत्तरी दिल्ली जिला पुलिस कंट्रोल को सूचना मिली कि फुटपाथ (सड़क किनारे) पर सूनसान इलाके में एक बूढ़ी महिला की लाश पड़ी है. सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने 70 साल की उस महिला का शव सील करके पोस्टमॉर्टम के लिए सब्जी मंडी मोर्च्यूरी भिजवा दिया. साथ ही हत्या का मामला दर्ज कर लिया. मौके के हालात से पुलिस को महिला के साथ बलात्कार की भी आशंका लग रही थी.

लिहाजा पुलिस ने बलात्कार और कत्ल के नजरिए से पड़ताल शुरू कर दी. छानबीन के दौरान पता चला कि कई साल से बूढ़ी महिला लाल किला, चांदनी चौक इलाके में सड़कों पर घूम-घूमकर टोकरी में रखकर बीड़ी-सिगरेट-पान-तंबाकू बेचा करती थी. रात को फुटपाथ पर ही सो जाती थी. काफी तलाशने पर भी पुलिस को, मर चुकी महिला का कोई करीब रिश्तेदार भी नहीं मिला.

संदेह के आधार पर हिरासत में ले लिया था बुजुर्ग

पंचनामा के बाद लाश को पोस्टमॉर्टम हाउस भिजवाने के बाद पुलिस ने इलाके में मुखबिर तंत्र को सजग कर दिया. ताकि महिला की हत्या का कहीं से कोई सुराग हाथ लग सके. पोस्टमॉर्टम हो पाता उससे पहले ही पुलिस ने, संदेह के आधार पर इलाके में अक्सर देखे-जाने वाले 75 साल के एक बूढ़े इंसान को पकड़ कर बैठा लिया. पुलिस को शक था कि कहीं न कहीं उसी महिला की हत्या का कुछ लिंक शायद उस बूढ़े से रहा हो. बुजुर्ग को पकड़ कर लाने के पीछे पुलिस का तर्क महज यह था कि मरने वाली बूढ़ी महिला और हिरासत में लिये गये बुजुर्ग की उम्र तकरीबन एक बराबर ही है. इसलिए संभव है कि बलात्कार के बाद महिला की हत्या उसी बूढ़े ने कर दी हो. हांलांकि वृद्ध को आरोपी साबित करने के पीछे पुलिस के हाथ मे भी कोई ठोस सबूत नहीं था.

जेहन में जन्मे तमाम अजीब सवाल

POST MORTEM

महिला के शव का पोस्टमॉर्टम किया भारत के मशहूर फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट (सन् 2005 में रिटायर) डॉ. के.एल. शर्मा ने. के.एल. शर्मा करीब 38 साल की नौकरी के दौरान 25 हजार से ज्यादा शवों का पोस्टमॉर्टम कर चुके हैं. लिहाजा उसी के हिसाब से उनका फॉरेंसिक साइंस में योगदान-अनुभव भी गिना जाता है. पोस्टमॉर्टम के दौरान फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट को ऐसा कुछ नहीं मिला जो, महिला के साथ हत्या से पूर्व या बाद बलात्कार की ओर इशारा करता हो. फिर भी बलात्कार की तथ्यात्मक/वैज्ञानिक पुष्टि के लिए डॉ. के.एल. शर्मा ने महिला का ‘योनि-स्राव’ तथा संदिग्ध और पुलिस हिरासत में मौजूद बुजुर्ग के वीर्य-रक्त नमूने जांच के लिए सील करके प्रयोगशाला भिजवा दिये. साथ ही पुलिस को हिदायत दी कि प्रयोगशाला से एक्सपर्ट रिपोर्ट आने से पहले वो (पुलिस), बुजुर्ग आदमी को महिला से बलात्कार और उसकी हत्या का मुलजिम न बनाये.

सीने पर थे इंसानी दांतों के निशान

पोस्टमॉर्टम के दौरान फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट को यह बात हैरानी वाली लगी कि बलात्कारी-हत्यारे ने महिला की छातियों पर आखिर बुरी तरह दांतों से काटा क्यों था? काटे जाने के निशान पोस्टमॉर्टम के दौरान भी जस-के-तस मौजूद थे. महिला की हत्या जबकि गला दबाकर की गई थी. पड़ताल को वैज्ञानिक रूप से अदालत में मजबूत साबित करने के लिए पोस्टमॉर्टम करने वाले फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट ने उसके सीने पर मौजूद ‘डेंटल-इम्प्रेशन’ले लिये.

डेंटल-इम्प्रेशन सील करके जांच/ पुष्टि के लिए प्रयोगशाला भेज दिये गये. अब पुलिस के सामने समस्या यह थी कि वो हिरासत में मौजूद संदिग्ध आरोपी का क्या करे? उसे न छोड़ते बन रहा था न ही ज्यादा समय तक उसे पुलिस हिरासत में रखने का कोई कानूनी और वाजिब औचित्य था. जबकि बलात्कार की पुष्टि और दांत से काटे जाने के निशाने के बाबत रिपोर्ट आने में अच्छा-खासा वक्त जाया होना तय था.

सांप मर गया लाठी भी टूटी नहीं

पसोपेश में फंसी परेशान हाल पुलिस के लिए भी राहत भरा रास्ता दिया फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट डॉ. के. एल. शर्मा ने ही. डॉ. शर्मा के सुझाये फार्मूले से पुलिस ने भी राहत महसूस की और हिरासत में संदिग्ध 75 साल के बुजुर्ग ने भी. डॉक्टर शर्मा के मशविरे पर पुलिस ने संदिग्ध वृद्ध को छोड़ दिया, मगर उस पर पैनी नजर बरकरार रखी. महिला की लाश का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉ. के.एल. शर्मा को शुरू से ही यह बात खटक रही थी कि जिस बुजुर्ग को पुलिस ने शक में उठा रखा है, उसकी जगह बूढ़ी महिला का शायद हत्यारा-बलात्कारी कोई और ही है. ऐसा क्यों?

पूछने पर डॉ. के.एल. शर्मा बताते हैं कि, ‘दरअसल पुलिस ने बूढ़े आदमी को सिर्फ इस बिनाह पर बैठा रखा था कि वो भी अक्सर उसी इलाके में देखा जाता था, जहां बूढ़ी औरत बीड़ी सिगरेट दिन में बेचा करती थी. उस बुजुर्ग के ऊपर पुलिस का संदेह करने का बस यही एक इकलौता तर्क मेरे गले नहीं उतर रहा था. मेरी सलाह पर पुलिस ने महिला की हत्या में हिरासत में रखे बुजुर्ग के अलावा, किसी अन्य संदिग्ध की तलाश में भी हाथ-पैर मारने शुरू कर दिये.’

मरा चूहा खाने वाले ने बदला रुख!

एक अदद 75 साल के बूढ़े इंसान को हिरासत में लेकर हवा में कुलांचें भर रही दिल्ली पुलिस को उस वक्त काठ मार गया जब मुखबिर से पता चला कि इलाके में एक ऐसा संदिग्ध युवक भी देखने में आ रहा है जो मरा हुआ चूहा तक खा जाता है. भला किसी बूढ़ी महिला की हत्या और संदिग्ध बलात्कार से चूहा खाने वाले युवक का क्या संबंध हो सकता है? फिर भी पुलिस ने इसका जिक्र महिला का पोस्टमॉर्टम करने वाले फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट से कर दिया. फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट की सलाह पर पुलिस ने उस युवक को ताड़ना शुरू कर दिया. फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट का मानना था कि जो युवक मरा हुआ चूहा खा सकता है, वो दौरान-ए-कत्ल बूढ़ी महिला का सीना (छाती) भी काट सकता है.

एक्सपर्ट्स सलाह से मिला ‘संदिग्ध’!

इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने मरा हुआ चूहा खाने वाले उस युवक को दबोच लिया. पूछताछ करने पर वो बूढ़ी महिला के कत्ल का आरोप मानने से साफ मुकर गया. उधर पुलिस और फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट उस युवक के दांतों के इंप्रेशन और महिला की सीने पर मिले दांतों के निशान की मिलान-रिपोर्ट का इंतजार कर रहे थे. जब तक दांतों के निशान की रिपोर्ट आ पाती उससे पहले आरोपी के और करीब पहुंचने के लिए डॉ. के.एल शर्मा पुलिस को जो ‘फॉर्मूला’ सुझाया, वह भी कम हैरतंगेज नहीं था.

KL SHARMA

गौरतलब तो यह है कि डॉ. शर्मा द्वारा सुझाया गया वह फॉर्मूला भले ही भारतीय कानून की नजर में ‘जीरो’ हो. हमारे कानून में इस हैरतंगेज फार्मूले की दो कौड़ी की कदर-वक्त भले न हो लेकिन, इसी वाहियात समझे जाने वाले फॉर्मूले ने 75 साल के एक बूढ़े इंसान को महिला के बलात्कार और कत्ल के इल्जाम से साफ-साफ बचा लिया. यह फार्मूला था ‘हिप्नोटिक-एनालेसिस’.

हैरतंगेज ‘हिप्नोटिक-एनालेसिस’ तिकड़म

चूंकि अभी तक दांतों के निशान, महिला के योनि स्राव, 75 साल के संदिग्ध बुजुर्ग शख्स के खून और वीर्य की जांच रिपोर्ट आने में देर थी. इससे पहले ही मरा चूहा खाने वाला 25-26 साल का युवक दूसरे संदिग्ध के रुप में पुलिस के हाथ लग चुका था. इस सबके बाद भी मगर हत्याकांड में हालात ‘जीरो’ थे. लिहाजा वरिष्ठ फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट डॉ. के.एल. शर्मा के दिमाग में एक अजीब-ओ-गरीब विचार आया. ऐसा विचार जो हमारे कानून की नजर में ‘रद्दी’ से ज्यादा कुछ नहीं था. चूंकि लेकिन वक्त काफी था.

इसलिए पुलिस ने डॉ. शर्मा की सलाह पर उस फॉर्मूले को अमल करने में बुराई नहीं समझी. मरा चूहा खा जाने वाले युवक का ‘हिप्नोटिक-एनालेसिस’ कराने की योजना बनाई गयी. जिसके तहत युवक को पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मीनगर-प्रीत विहार स्वास्थ्य विहार इलाके में मौजदू एक प्राइवेट क्लिनिक में कराया गया.

रहस्यमयी काले कमरे का कारनामा

मरा चूहा खाने वाले और बूढ़ी महिला की हत्या में संदिग्ध युवक को एक ‘डार्क-रूम’ में कुर्सी पर ले जाकर बैठा दिया. रूम में अजीब-ओ-गरीब रंग की लाल-पीली-सफेद-हरी आदि-आदि तमाम रंग वाली विशेष-किस्म की लाइटें जल-बुझ रही थीं. एक कुर्सी पर संदिग्ध और उसके सामने देश का मशहूर ‘हिप्नोटिक- एक्सपर्ट’ बैठा था. कुल जमा कमरे के अंदर की दुनिया रहस्यमयी-रूहानी सी महसूस हो रही थी. कमरे के अंदर मौजूद था हलक सुखा देने वाला डर और मरघटी सन्नाटा. कभी-कभी रूह कंपा देने वाली अजीब सी डरावनी आवाजें.

इसी कमरे की मोटे कपड़े की दीवार के पीछे हेडफोन कान से लगाये छिपा बैठा था, दिल्ली पुलिस का दबंग इंस्पेक्टर और हत्या के मामले का पड़ताली. एक कलम और कॉपी लेकर. जिसे सुनकर नोट करनी थी हिप्नोटिक-एक्सपर्ट और संदिग्ध की बातचीत हू-ब-हू. खास बात यह थी कि इस पूरी तैयारी में संदिग्ध युवक को इसका भान दूर-दूर तक नहीं होने दिया गया था कि कोई पुलिस वाला उसकी बातें सुनकर नोट भी कर रहा होगा.

कानूनन ‘जीरो’ और पुलिस का ‘हीरो’

हिप्नोटिक-एनालेसिस के दौरान संदिग्ध ने कुबूल कर लिया कि बूढ़ी महिला की हत्या में उसका हाथ था. युवक ने बताया था कि, ‘जिस रात उसने बूढ़ी महिला की गला दबाकर हत्या की उसी दिन महिला से उसका झगड़ा हुआ था. दिन में झगड़े की वजह थी, महिला से उसने बिना पैसे दिये सिगरेट मांगी. फोकट में महिला ने सिगरेट देने से मना कर दिया. रात के अंधेरे में मौका मिलने पर, महिला को तड़पाकर मारने के लिए पहले उसने बूढ़ी औरत के दोनो ब्रेस्ट दांतों से नोच लिये. उसके बाद गला दबाकर उसे मार डाला.’

आरोपी के इसी कुबूलनामे के मुताबिक बाद में पुलिस ने सबूत-गवाह जुटाये. संदिग्ध को मुलजिम के बतौर गिरफ्तार कर लिया. कालांतर में हत्यारोपी करार देकर अदालत ने उसे सजा सुना दी. यह अलग बात है कि पूरी तफ्तीश में अदालत के सामने कहीं भी दिल्ली पुलिस ने हिप्नोटिक-एनालेसिस का कहीं कोई जिक्र नहीं किया, क्योंकि पुलिस के लिए ‘हीरो’ साबित हो चुकी ‘हिप्नोटिक-एनालेसिस’ अदालत और भारतीय कानून की नजर में ‘जीरो’ था और आज भी जीरो ही है.

‘नारकोफेजिया’ मतलब खतरनाक बीमारी

किसी इंसान द्वारा दूसरे इंसान, जिंदा या मरे जानवर को बुरी तरह दांतों से काटना (खा जाना या नोचना), गंभीर बीमारी है. मेडिकल साइंस में इसे ‘नारकोफेजिया’ कहते हैं. करीब 21 साल में बतौर फॉरेंसिंक साइंस एक्सपर्ट (पोस्टमॉर्टम-विशेषज्ञ) अब तक 12 हजार से ज्यादा लाशों का पोस्टमॉर्टम करने के अनुभवी डॉ. कुलभूषण गोयल के मुताबिक, ‘ऐसा किया जाना महज इंसानी गुस्से का प्रतिफल नहीं है. बल्कि नारकोफेजिया एक किस्म की गंभीर बीमारी है. इस बीमारी का शिकार इंसान मरे हुए इंसान और जानवर का गोश्त खाने का अभ्यस्त हो जाता है. श्मशान में रात के वक्त अमूमन सिद्धी-प्राप्ति के जुनून में इंसानी गोश्त खाने वाले ‘औघड़’ इसी बीमारी का शिकार होते हैं.

पेश पड़ताल में भी जिस लड़के ने मरा चूहा खा लिया था, वह भी इसी बीमारी का शिकार रहा होगा. इस बीमारी का मरीज होने की वजह से ही बाद में आरोपी और मुजरिम करार दिया गया वो युवक, महिला की हत्या के समय उसके ब्रेस्ट दांतों से काट कर खा गया. हत्या की वारदात को अंजाम देने से चंद दिन पूर्व ही उसके द्वारा मरा चूहा खाना भी उसमें ‘नारकोफेजिया’ की मौजूदगी का सबूत था. डॉ. कुलभूषण गोयल फिलहाल दिल्ली के अरुणा आसफ अली हॉस्पिटल के चीफ मेडिकल ऑफिसर (नॉन फंक्शनल सलेक्शन ग्रेड) हैं.

कौन हैं पुलिस के ‘तारणहार’ डॉ. शर्मा?

kl sharma

डॉ. केएल शर्मा

डॉ. के. एल. शर्मा (रिटायर्ड) का जन्म 17 अप्रैल सन् 1945 को राजस्थान के जिला अलवर स्थित बानसूर गांव में हुआ था. 23 साल की अल्पआयु में ही उन्होंने 1968 में उदयपुर के रविंद्रनाथ टैगोर कॉलेज से एमबीबीएस पास किया. सन् 1975 में डॉ. के.एल. शर्मा बजरिये केंद्रीय लोक सेवा आयोग सेंट्रल हेल्थ सर्विसेज में सलेक्ट हो गये. सन् 1996 से 2005 (रिटायरमेंट तक) श्री शर्मा बहैसियत फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट दिल्ली में करीब 25000 से ज्यादा शवों का पोस्टमॉर्टम करने की रिकॉर्ड संख्या भी खुद के नाम लिखा चुके हैं. इन सबसे ऊपर उनकी उपलब्धियों में गिनी जाती है, दिल्ली विश्वविद्यालय का फॉरेंसिक मेडिसन (न्यायालिक आयुर्विज्ञान) में एम.डी. (उच्च स्नातक) में दिल्ली राज्य का पहला छात्र होने का गौरव प्राप्त होना.

( ‘संडे क्राइम स्पेशल’ में पढ़ना न भूलें : बचपन में कभी ‘नाव’ की सवारी के नाम से ही खौफजदा हो जाने वाला बच्चा, ‘मुर्दों’ के ढेरों के बीच बेखौफ बैठा रहा.‘लाशों’ के अंदर से भी कुछ ‘खोज’ लाने की हसरत पाले हुए! दो-चार मिनट या दो-चार घंटे नहीं. कई दिन-रात तक लगातार. आखिर क्यों?....पढ़िये पूरी कहानी माकूल जबाबों के साथ. कालांतर के उसी बच्चे और आज 77 साल के बुजुर्ग हो चुके अजूबा शख्स की मुंह-जुबानी. )

0
Loading...

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
फिल्म Bazaar और Kaashi का Filmy Postmortem

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi