S M L

सलिल चौधरी: जिनके साज ने दी चार्ली चैप्लिन से लेकर बांग्लादेश संघर्ष तक को आवाज

कला के जरिए जन जागरण में अक्सर दीनबंधु मित्र के नाटक ‘नील दर्पण’ का उदाहरण देने वाले सलिल चौधरी ने ऐसे कई गीत इप्टा के लिए लिखे जो बाद में बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बने

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee Updated On: Sep 05, 2017 01:33 PM IST

0
सलिल चौधरी: जिनके साज ने दी चार्ली चैप्लिन से लेकर बांग्लादेश संघर्ष तक को आवाज

सलिल शब्द का अर्थ पानी होता है .पानी ऊपर से शांत लगता है मगर जब अपने आवेग में आता है तो रास्ते की हर चीज को बहा ले जाता है. सलिल चौधरी इसी तरह के संगीतकार हैं. अपनी धुनों की रौ में सबकुछ बहा कर ले जाने वाले.

सलिल दा की बात करते हुए अक्सर संगीत समीक्षक उन्हें लोक धुनों का माहिर कंपोजर कह कर छोड़ देते हैं. जबकि सलिल चौधरी की शख्सियत इससे बहुत बड़ी है. उनके जैसी संगीत की तकनीकी समझ रखने वाले संगीतकार हिंदुस्तान में कम ही हुए हैं.

संगीत में समाजवाद

सलिल दा कम्युनिस्ट थे. सोवियत संघ और लाल झंडे के बड़े फैन थे. जमींदारी की मुखालिफत करने वाले खांटी कॉमरेड. इसीलिए उनके संगीत में समाज के हर वर्ग का प्रतिनिधित्व दिखता है. लोग संगीत की धुनों को उन्होंने जितनी खूबी से फिल्मी संगीत में मिलाया वो बिरले ही कर पाए हैं. ‘मधुमति’ फिल्म का ‘चढ़ गयो पापी बिछुआ’ सुनिए. आसाम के लोक संगीत की एकदम साफ मगर बहुत ही कलात्मक छवि इस गाने में दिखती है. जबकी इसी फिल्म का 'दिल तड़प-तड़प के कह रहा है' एक पोलिश लोकगीत पर आधारित है.

सलिल दा की लोक संगीत की समझ ऐसे ही नहीं बनी थी. एक बार कोलकाता से मुंबई के सफर में वो कुछ महीनों के लिए गायब हो गए थे. बाद में वजह पता चली कि जगह-जगह गांवों में ठहर कर लोक संगीत को समझ रहे थे. काबुलीवाला के इस गाने को सुनिए और महसूस करिए कि लोक संगीत का क्या खूब इस्तेमाल हुआ है.

संगीत के बड़े जानकार

पश्चिमी संगीत की उनकी पकड़ ऐसी थी कि चार्ली चैप्लिन के ऐक्ट पर प्यानो पर संगत कर चुके थे. संगीत में मैलोडी के हिमायती सलिल चौधरी ने पश्चिम के हारमनी आधारित संगीत पर कई बेहतरीन लेख भी लिखे हैं. इसके साथ ही सलिल चौधरी ने रवींद्र संगीत को आजाद भारत के हिंदी फिल्म संगीत के लिए आदर्श कहा है.

ये भी पढ़ें: रॉडरीगेज़: संगीत की दुनिया में इससे रोमांचक कहानी नहीं है

रवींद्र संगीत को प्रेरणा बताने से उनका मतलब है कि जिस तरह रवींद्र संगीत में शास्त्रीय संगीत के साथ सुगम और लोक संगीत को मिलाकर एक नए तरह का म्यूज़िकल जॉनर बनाया गया वैसा ही हिंदी सिनेमा के कंपोजरों को करना चाहिए. ये परिभाषा काफी हद तक हिंदी सिनेमा के संगीत को परिभाषित कर देती है.

अगर अभी भी आपको लगता हेै कि सलिल दा की धुनों में सिर्फ लोक संगीत है तो एक बार इस कंपोजिशन में प्यानो का इस्तेमाल सुनिए.

अलग से बैकग्राउंड स्कोर देने वाले

सलिल चौधरी ने हिंदी सिनेमा में कंपोजर होते हुए सिर्फ बैकग्राउंड स्कोर देने की शुरुआत की. उन्होंने 10 से ज्यादा ऐसी फिल्में की हैं जिनमें गाने सचिन देव वर्मन या शंकर-जयकिशन के हैं मगर बैकग्राउंड स्कोर सलिल चौधरी का. विमल रॉय की ‘देवदास’ और यश चोपड़ा की ‘काला पत्थर’ ऐसी ही एक फिल्मे हैं.

ये भी पढ़ें: 'एक चतुर नार' किसने गाया? होशियार किशोर कुमार ने या भाई अशोक कुमार ने

आला दर्जे के कवि

हिंदी में सलिल चौधरी ने ऐसे कई गाने दिए हैं जो पहले बांग्ला में कंपोज हुए थे. इनमें से ज्यादातर गानों के बांग्ला वर्जन को सलिल चौधरी ने ही लिखा है. आनंद फिल्म का कहीं दूर जब दिन ढल जाए बांग्ला में ‘आमाय प्रोश्नो कौरे नील ध्रूवो तारा’ के तौर पर आया. सलिल चौधरी ने सुदर्शन के नाम से कई गानों को उनके बोल दिए हैं.

बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के गीत

सलिल दा 1953 तक इप्टा से जुड़े रहे. कम्युनिस्ट पार्टी के थियेटर करने वाले इस संगठन के तले उन्होंने कई साल तक जनजागरण का काम किया. सलिल दा आजादी से पहले हिंदी सिनेमा में सबसे ज्यादा बनने वाली धार्मिक और फूहड़ कॉमेडी वाली फिल्मों से बहुत नाराज रहते थे. उनका कहना था कि हिंदुस्तान में बनने वाली सारी फिल्मों में हिंदी सिनेमा का हिस्सा सबसे बड़ा है, जबकि हिंदी फिल्म वालों को पता ही नहीं है कि ये कितना सशक्त माध्यम है.

कला के जरिए जन जागरण में अक्सर दीनबंधु मित्र के नाटक ‘नील दर्पण’ का उदाहरण देने वाले सलिल चौधरी ने ऐसे कई गीत इप्टा के लिए लिखे जो बाद में  बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बने.

ये भी पढ़ें: राजेश खन्ना: एक फिल्म ने काका का स्टारडम अमिताभ को दे दिया

5 सितंबर 1995 को दुनिया से गए सलिल चौधरी ने हिंदी सिनेमा को 'दो बीघा ज़मीन', 'आनंद', 'छोटी सी बात', 'मधुमति', 'पराए', 'मेरे अपने', 'काबुलीवाला' और 'रजनीगंधा' जैसी कई फिल्में दी हैं जो अपने संगीत के लिए हिंदी सिनेमा की क्लासिक्स में गिनीं जाती हैं. चलते चलते उनकी ही एक बेहतरीन कंपोजीशन सुनते चलिए.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
SACRED GAMES: Anurag Kashyap और Nawazuddin Siddiqui से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi