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रिसर्च: पूर्णिमा की रात बाइक के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा ज्यादा

एक अध्ययन में सामने आया है कि जिस रात में चांद पूरा होता है उससे एक रात पहले बाइक के दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना अधिक रहती है

Bhasha Updated On: Dec 13, 2017 07:52 PM IST

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रिसर्च: पूर्णिमा की रात बाइक के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा ज्यादा

एक अध्ययन में सामने आया है कि पूर्णिमा यानी जिस रात में चांद पूरा होता है उस रोज बाइक के दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना अधिक रहती है.

शोधकर्ताओं का मानना है कि पूर्णिमा की रात में बाइक सवार का ध्यान भटक जाता है जो हादसे को दावत देता है. शोधकर्ताओं ने बताया कि दुनिया में बाइक हादसे में लोगों की जान जाना आम है. अमेरिका में हर साल इस वजह से करीब पांच हजार लोगों की मौत होती है. यानी हर सात सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में एक बाइक सवार होता है.

सड़क हादसों की बड़ी वजह वाहन चलाने के दौरान अचानक से ध्यान भटक जाना होता है. साल में करीब 12 बार पूरा चांद दिखता है जो बड़ा और चमकीला होता है. इसलिए यह संभावित तौर पर वाहन चालक का ध्यान भटका सकता है.

कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो और अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पूर्ण चंद्र वाली रात में होने वाले सड़क हादसों की गणना की है और इसकी तुलना पूर्ण चंद्र से ठीक एक हफ्ते पहले और बाद वाले हफ्ते में होने वाले सड़क हादसों से की है.

1,482 रातों में 13,029 लोग घातक बाइक हादसों का शिकार हुए. इनमें 494 रातें पूर्ण चंद्र वाली थीं जबकि 988 रातें सामान्य थीं.

आम तौर पर बाइक चलाने वाला मध्यम उम्र का पुरुष (औसत उम्र 32) होता है जो ग्रामीण सड़क पर बाइक चलाता है और उसके सीधे सिर में चोट लगती है क्योंकि वह हेलमेट भी नहीं पहने होता है.

कुलमिलाकर, पूरे चांद की 494 रातों में 4,494 घातक दुर्घटनाएं हुई. यानी प्रत्येक रात करीब नौ सड़क हादसे हुए. वहीं सामान्य 988 रातों में 8,535 हादसे हुए जिसका औसत प्रत्येक रात 8.64 हादसे हैं.

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