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रामसेतु: विज्ञान के इन नए दावों से क्या बदल जाएगी रामायण

अगर विज्ञान को आधार बनाकर रामायण की बात की जाएगी तो काव्य पर बुने गए कई मिथक छोड़ने होंगे

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee Updated On: Dec 13, 2017 04:38 PM IST

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रामसेतु: विज्ञान के इन नए दावों से क्या बदल जाएगी रामायण

राम सेतु को लेकर एक नई और बड़ी खबर आई है. अमेरिका के साइंस चैनल ने अपने कार्यक्रम व्हॉट ऑन अर्थ में राम सेतु के बारे में कई नई बातें कही हैं. अभी पूरा शो टेलीकास्ट नहीं हुआ है मगर कार्यक्रम का जो हिस्सा ट्वीट किया गया है उसमें कई रोचक बाते हैं. सैटलाइट इमेज, अंडरवॉटर फोटोग्राफ्स और कार्बन डेटिंग के आधार पर दो बातें कही जा रही हैं. एक तो भारत श्रीलंका के बीच की ये रचना मानव निर्मित है. दूसरा इसे लगभग 5-7 हजार साल पहले बनाया गया था.

धार्मिक मान्यताएं और विज्ञान एक दूसरे के विरोधी माने जाते हैं. सूरज धरती के चारों ओर चक्कर काटता है. धरती चौकोर है, शुरुआती समय में आदमी उड़ सकता था, दुनिया सात दिन में बनी थी. जैसे तमाम मिथक हैं जो विज्ञान की कसौटी पर खरे नहीं उतरते. ऐसे में जब कोई खोज धार्मिक मान्यता और विज्ञान के बीच में पुल की तरह आती है तो निसंदेह बहुत खास बन जाती है.

भारतीय पुराणों में जिन कथाओं को वर्णन है, उन्हें ज्यादातर विद्वान काव्य यानि कविता मानते हैं. इन कविताओं में समय-समय पर नई अतिश्योक्तियां भी जुड़ती रही हैं तो इनका रूप भी बदलता रहा है. मगर रामसेतु से जुड़ी ये खबर धार्मिक मान्यताओं से ज्यादा मानव विकास की अवधारणाओं को बदलने वाली हो सकती है. हालांकि एक वीडियो के आधार पर मानव सभ्यता के इतिहास पर टिप्पणी करना थोड़ा जल्दबाजी हो सकता है लेकिन भारत और श्रीलंका के बीच बहुत पुरानी पुल जैसी मानव निर्मित रचना मौजूद होने के आधार पर कुछ बातें कही जा सकती हैं.

दुनिया और मानव सभ्यता

दुनिया लगभग 454 करोड़ साल पुरानी है. मानव सभ्यता का इतिहास 20 लाख साल पुराना. इसे आसानी से समझ सकते हैं. अगर पूरी धरती की उम्र 24 घंटा मान लें तो डायनासॉर पृथ्वी पर लगभग एक घंटे के लिए थे और इंसान को महज एक सेकेंड से कुछ ज्यादा समय हुआ है. आज से 26 लाख साल पहले धरती बर्फ में डूबी थी और जब ये बर्फ पिघली तो आधुनिक मानव सभ्यता के बीज पड़े.

मानवों के 20 लाख साल पुराने इतिहास में वर्तमान सभ्यता का इतिहास महज 5,000-10,000 साल पुराना है. भारतीय उपमहाद्वीप की सिंधु घाटी सभ्यता, मिस्र की हेम्मुराबी की सभ्यता, ग्रीक सभ्यता, माया सभ्यता और पिरामिड जैसी सभ्यताएं लगभग 5000 साल पुरानी हैं. हाल ही में मिस्र में एक और सभ्यता के अवशेष मिले थे जो 7000 साल पुरानी है.

कितना खास है राम सेतु

राम सेतु की बात करें तो ये एक रेत के आधार पर रखे गए पत्थरों की संरचना है. रेत 4000 साल पुरानी है और ऊपर रखे पत्थर 7000 पुराने. इसका मतलब हुआ कि कहीं और से पुराने पत्थर लाकर रेत पर रखे गए. जिस आधार पर कहा जा रहा है कि इंसान ही इन पत्थरों को यहां लाए. दोनों बातों को माने तो ये पत्थर वाला पुल लगभग 5,000-7000 साल पुराना हुआ.

निश्चित रूप से ये एक अतिमानवीय काम है. एंथ्रोपोलॉजी के हिसाब से ये वो दौर था जब पहिये का इस्तेमाल आने-जाने के लिए शुरू नहीं हुआ था, या शुरुआती चरण में था. ऐसे में ये संरचना मानवीय सूझबूझ और इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना है. वैसे सबसे पुराने पिरामिडों के बनने का समय भी लगभग यही होगा. इसलिए कह सकते हैं कि इंजीनयरिंग के स्तर पर ऐसी संरचनाएं उस दौर में संभव थीं.

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पिरामिडों का ही उदाहरण देखें तो उस समय मिस्र के लोगों के पास पहिया नहीं था. ऐसे में ये हजारों बड़े-बड़े पत्थर कैसे उस ऊंचाई तक पहुंचाए गए कल्पना से परे है. पिरामिड ही क्यों पहिया अपने आप में इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है. ऐसी कोई भी संरचना प्रकृति में नहीं पाई जाती. एक गोल डिस्क के बीच में एक्सल फंसाने का मूल आइडिया इतने हजार सालों में कोई बदल नहीं पाया.

कई मिथक भी टूटेंगे

अगर आप विज्ञान की कसौटी पर रामसेतु के होने को मानते हैं तो आपको इसके बारे में दूसरे वैज्ञानिक तथ्यों को मानना पड़ेगा. इसका मतलब है कि बहुत से मिथक अपने आप खारिज हो जाएंगे. त्रेतायुग के 12 लाख साल तक रहने और कई लाख साल पहले खत्म होने की बात ‘इस’ राम सेतु के सामने अप्रासंगिक हो जाती है. इसी के साथ ये बात भी स्पष्ट रहे कि राम सेतु के अस्तित्व के बारे में वैज्ञानिक शोध सामने आया है. रामायण से जुड़े दूसरे तथ्यों पर अभी कोई बात नहीं हुई है. इसलिए इसके आधार पर अगर आपको व्हॉट्सऐप पर कोई वैज्ञानिक जानकारी मिले तो उससे बचकर रहें.

रामसेतु से जुड़ी ये खबर अपने आप में बड़ी है. पूरा कार्यक्रम सामने आने के बाद कई बातें सामने आएंगी. इससे एक बात तय है आने वाले समय में इतिहास को लेकर काफी कुछ नया जानने सुनने को मिल सकता है.

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