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क्या हुआ था जब मुकेश ने गायकी के साथ-साथ फिल्म निर्माण में आजमाई थी किस्मत

राग गौड़ सारंग संगीतकार रोशन साहब के पसंदीदा रागों में से था. ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने और भी कुछ फिल्मों में इसी राग की जमीन पर गाने तैयार किए थे

Updated On: May 27, 2018 08:04 AM IST

Shivendra Kumar Singh Shivendra Kumar Singh

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क्या हुआ था जब मुकेश ने गायकी के साथ-साथ फिल्म निर्माण में आजमाई थी किस्मत

राग गौड़ और मल्हार के मिश्रण राग गौड़ मल्हार की कहानी

जाने-माने गायक मुकेश को कौन नहीं जानता. उन्होंने सैकड़ों सुपरहिट गाने गाए हैं. लंबे समय तक वो शोमैन राज कपूर की आवाज थे. लेकिन यह बात कम ही लोग जानते हैं कि उन्होंने 2 फिल्में भी प्रोड्यूस की थीं. इन्हीं में से एक फिल्म थी- मल्हार. जो उन्होंने 50 के दशक में बनाई थी. दूसरी फिल्म उन्होंने 1956 में बनाई, जिसका नाम था- अनुराग. फिल्म मल्हार के डायरेक्टर हरीश थे. हरीश ने कई फिल्मों में अभिनय भी किया था. फिल्म के संगीत का जिम्मा रोशन साहब का था. फिल्म के गीतकार थे इंदीवर और कैफ इरफानी.

इंदीवर के लिए भी यह करियर की शुरुआत ही थी. जैसा कि फिल्म के नाम से ही जाहिर है कि इसके संगीत पक्ष को तबियत से सवांरना था. संगीतकार रोशन ने खुद विधिवत शास्त्रीय संगीत सीखा था, वो भी उस्ताद अलाउद्दीन खान साहब से. यही वजह थी कि बाद में उन्होंने अपने फिल्मी संगीत में भी ना सिर्फ शास्त्रीय संगीत का इस्तेमाल किया बल्कि उसे बहुत खूबसूरती से निभाया भी. दिलचस्प बात यह है कि फिल्म संगीत में यह रोशन का दूसरा ही साल था. फिल्म मल्हार से पहले उन्होंने इक्का-दुक्का फिल्मों में ही संगीत दिया था. ऐसे में उन्हें खुद को साबित करना था. उन्होंने फिल्म मल्हार के लिए एक गीत तैयार किया. गीत के बोल थे- गरजत बरसत भीगत. इस गाने को लता मंगेशकर को गाना था. आइए पहले आपको यह गाना सुनाते हैं फिर कहानी को आगे बढ़ाएंगे.

दरअसल यह गाना रोशन साहब ने शास्त्रीय राग गौड़ मल्हार की जमीन पर तैयार किया था. फिल्म का नाम मल्हार था इसलिए शायद यह राग उनके दिमाग में आया होगा. यह गाना बाद में लता मंगेशकर के पसंदीदा गानों में था. रोशन साहब के लिए गाए गए गानों में वो इस गाने को हमेशा याद करती हैं. इस फिल्म के और भी गानों को काफी पसंद किया गया. जिसमें एक गाना 'बड़े अरमान से रखा है सनम तेरी कदम प्यार की दुनिया में ये पहला कदम' बहुत लोकप्रिय हुआ था.

राग गौड़ सारंग संगीतकार रोशन साहब के पसंदीदा रागों में से था. ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने और भी कुछ फिल्मों में इसी राग की जमीन पर गाने तैयार किए थे. इसमें साल 1963 में रिलीज हुई फिल्म- ताजमहल का गाना- जुर्म-ए-उल्फत पे शामिल है. इस गाने को भी लता मंगेशकर ने ही गाया था. गजलनुमा इस गीत के संगीत में रोशन साहब की एक अलग छाप दिखती है. इसके बाद 1967 में रिलीज हुई फिल्म नूरजहां का गाना ‘शराबी शराबी ये सावन का मौसम’ में भी रोशन साहब और राग गौड़ सारंग की ही जोड़ी थी. इस गाने को सुमन कल्याणपुर ने गाया था. आइए आपको यह दोनों गाने सुनाते हैं.

1968 में एक और फिल्म आई थी- आशीर्वाद. इस फिल्म को ऋषिकेश मुखर्जी साहब बना रहे थे. फिल्म में अशोक कुमार और संजीव कुमार जैसे कलाकार थे. इस फिल्म को बहुत तारीफ मिली थी. इस फिल्म का संगीत वसंत देसाई ने तैयार किया था. उन्होंने भी इस फिल्म में एक गाना राग गौड़ मल्हार की जमीन पर तैयार किया था. इस फिल्म के गीत गुलजार साहब ने लिखे थे. आइए आपको यह गाना सुनाते हैं.

फिल्मी गानों के बाद आइए आपको राग गौड़ मल्हार के शास्त्रीय पक्ष के बारे में बताते हैं. राग गौड़ मल्हार की उत्पत्ति खमाज थाट से है. इस राग का वादी स्वर ‘म’ और संवादी स्वर ‘सा’ है. इस राग की जाति संपूर्ण संपूर्ण है. राग गौड़ मल्हार में सभी स्वर शुद्ध लगते हैं. अवरोह में ‘ध’ के साथ कोमल ‘नी’ का प्रयोग किया जाता है. इस राग को गाने बजाने का समय रात का दूसरा पहर है. कुछ लोग इसे काफी थाट का राग भी मानते हैं. लेकिन प्रचलित तौर पर राग गौड़ मल्हार को खमाज थाट का राग ही माना गया है. आप नाम से भी अंदाजा लगा सकते हैं कि इस राग को राग गौड़ और राग मल्हार के मिश्रण से तैयार किया गया है. इसीलिए यह राग मल्हार के कई प्रकारों में से एक प्रकार है. इस राग के नाम से आप यह भी समझ गए होंगे कि यह एक तरह का मौसमी राग है. बारिश के मौसम में इसे खूब गाया-बजाया जाता है. आइए आपको इस राग का आरोह अवरोह और पकड़ बताते हैं.

आरोह- सा, रे ग रे म ग रे सा, रे म प, ध नी सां

अवरोह- सां, ध नी प म, ग म रे सा

पकड़- रे ग रे म ग रे सा, रे प, म प ध सां ध प म

राग गौड़ मल्हार के बारे में और विस्तार से जानकारी के लिए आप एनसीईआरटी का बनाया यह वीडियो भी देख सकते हैं.

आइए अब आपको हमेशा की तरह कुछ ऐसे वीडियो दिखाते हैं जिसे देखकर आप यह अंदाजा लगा सकते हैं कि राग का शास्त्रीय पक्ष किस तरह बरता जाता है. आपको दो वीडियो दिखाते हैं. पहले में ग्वालियर घराने के दिग्गज कलाकार पंडित डीवी पलुस्कर का गाया राग गौड़ मल्हार है. पंडित डीवी पलुस्कर का सिर्फ 34 साल की उम्र में निधन हो गया था लेकिन उन्होंने शास्त्रीय संगीत की दुनिया में बड़ा नाम किया. दूसरा वीडियो उस्ताद फैयाज खां साहब का है जो आगरा घराने के विख्यात कलाकारों में से एक थे.

गायन के बाद वादन की तरफ आते हैं. आपको विश्वविख्यात सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खान साहब का बजाया राग गौड़ मल्हार सुनाते हैं. आपको जानकर ताज्जुब होगा कि उस्ताद हाफिज अली खान साहब के बेटे उस्ताद अमजद अली खान जब सिर्फ 6 साल के थे तब उन्होंने अपना पहला परफॉर्मेंस दिया था. सेनिया बंगश घराने के उस्ताद अमजद अली खान ने तब से लेकर अब तक पिछले 6 से ज्यादा दशकों से भारतीय संगीत को अलग पहचान दी है. आपको उनके बजाए राग गौड़ मल्हार के वीडियो के साथ छोड़े जा रहे हैं. अगले हफ्ते एक और नए राग के साथ मुलाकात होगी.

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