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फूलन से कम दिलचस्प नहीं है उनके हत्यारे शेर सिंह की कहानी

एक डकैत का सांसद बनना फिर एक राजपूत के हाथों मारे जाना एक अलग ही कहानी है.

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Jul 25, 2017 03:53 PM IST

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फूलन से कम दिलचस्प नहीं है उनके हत्यारे शेर सिंह की कहानी

25 जुलाई को फूलन देवी की पुण्यतिथि है. आज ही के दिन साल 2001 में फूलन देवी की हत्या कर दी गई थी. एक राजपूत युवक शेरसिंह राणा उर्फ पंकज सिंह ने बड़े ही फिल्मी अंदाज में मिर्जापुर की सपा सांसद फूलन देवी की हत्या कर दी थी.

फूलन देवी की मौत के 16 साल बीत चुके हैं. फूलन देवी के किस्सों को लेकर आज भी लोगों में उत्सुकता बनी रहती है. एक लड़की के डकैत बनने से लेकर सांसद बनने की कहानी के कई पहलू हैं.

फूलन देवी से कुछ जाति के लोग सहानुभूति रखते हैं तो कुछ जाति के लोगों में फूलन देवी के लिए वो सम्मान नहीं है. इसके पीछे भी बेहमई कांड की प्रमुख भूमिका है.

जाति की रंजिशें थीं सबसे बड़ी वजह

फूलन देवी की हत्या करने वाले शेरसिंह राणा की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है. शेरसिंह राणा ने फूलन की हत्या के बाद कहा था कि उसने बेहमई में 22 राजपूतों की हत्याओं का बदला लिया है.

हम आपको बता दें कि शेरसिंह राणा की व्यक्तिगत तौर पर फूलन देवी से कोई पुरानी अदावत नहीं थी. फूलन देवी की हत्या के बाद शेरसिंह राणा ने दावा किया था कि उत्तर प्रदेश के बेहमई हत्याकांड का बदला लेने के लिए उसने बचपन में ही कसम ले रखी थी.

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बेहमई में डकैत फूलन देवी ने 22 ठाकुरों को सरेआम मौत के घाट उतार दिया था. 14 फरवरी 1981 को डकैत फूलन देवी ने जो कहर बरपाया गया उसकी गूंज आज भी बेहमई में गूंजती रहती है. बेहमई कानपुर देहात से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक राजपूत बहुल गांव है.

फूलन देवी की हत्या के दो दिन बाद ही आरोपी शेरसिंह राणा ने देहरादून में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था. शेरसिंह राणा ने बड़े गर्व के साथ उस समय फूलन देवी की हत्या में शामिल होने की बाद स्वीकारी थी.

पुलिस के अनुसार राणा ने बेहमई हत्याकांड में मारे गए 22 ठाकुरों की हत्या का बदला लेने के लिए फूलन देवी की हत्या की थी. शेर सिंह राणा का आत्मसमर्पण जितना चौंकाने वाला था लगभग तीन साल बाद 17 फरवरी 2004 को तिहाड़ जेल से भागना भी उतना ही चौंकाने वाला था.

फूलन देवी के अंतिम दर्शन के दौरान उनपर फूल चढ़ाता एक समर्थक.

फूलन देवी के अंतिम दर्शन के दौरान उनपर फूल चढ़ाता एक समर्थक.

नाटकीय तरीके से भागा था राणा

शेरसिंह राणा बड़े ही फिल्मी अंदाज में तिहाड़ जेल से फरार हो गया था. फूलन देवी हत्याकांड के आरोपी का तिहाड़ जैसे जेल से नाटकीय घटनाक्रम कर भाग जाना अपने आप में एक बड़ा सवाल था.

पुलिस की काफी मशक्कत के बाद 17 मई 2006 को शेरसिंह राणा को एक बार फिर से गिरफ्तार कर लिया गया. राणा को कोलकाता के एक गेस्ट हाउस से गिरफ्तार किया गया.

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अपने फरारी के दिनों के बारे में राणा ने जो खुलासा किया वह भी कम आश्चर्यजनक नहीं था. राणा ने दावा किया कि वह बचपन से ही अफगानिस्तान के गजनी इलाके में हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान की रखी अस्थियों के अपमान की जानकारी मिलने को लेकर बेहद दुखी था. राणा ने पृथ्वीराज चौहान की रखी अस्थियों को वापस लाने की ठानी. तिहाड़ जेल से फरारी के बाद सबसे पहले झारखंड के रांची से फर्जी पासपोर्ट बनवाया.

पासपोर्ट बनाने के बाद वो नेपाल, बांग्लादेश, दुबई होते हुए अफगानिस्तान पहुंचा. साल 2005 में वह अस्थियां लेकर भारत आया. राणा ने पूरे घटनाक्रम की वीडियो भी बनाया. ताकि वो अपने बात को प्रमाणित कर सके.

चुनाव में उतरा था राणा

बाद में शेर सिंह राणा साल 2012 में उत्तर प्रदेश के जेवर से निर्दलीय चुनाव भी लड़ा लेकिन हार गया. वह पांचवें नंबर पर आया था. यह चुनाव क्षेत्र जातीय समीकरण के हिसाब से ठाकुर बाहुल्य क्षेत्र था.

अगस्त 2014 में दिल्ली की एक निचली अदालत ने फूलन देवी हत्याकांड के दोषी शेर सिंह राणा को उम्रकैद और 1 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई.

हम आपको बता दें कि जिस समय बेहमई हत्याकांड हुआ था, उस समय यूपी के सीएम वीपी सिंह थे, जो बाद में चल कर देश के प्रधानमंत्री भी बने. राजपूतों का एक तबका वीपी सिंह पर आरोप लगाता रहता है कि बेहमई हत्याकांड पर उन्होंने उचित कार्रवाई नहीं की. यही आरोप मध्य प्रदेश के तत्कालीन सीएम अर्जुन सिंह पर भी लगाए जाते हैं.

खत्म हो रहा था फूलन देवी गैंग

बेहमई हत्याकांड के बाद फूलन देवी गिरोह पुलिस के निशाने पर आ गया. पुलिस मुठभेड़ों में फूलन का ज्यादातर गैंग खत्म हो रहा था. खुद फूलन जंगल-जंगल जान बचाने को भटक रही थी.

फूलन जिस जाति से आति थी उस जाति का मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में अच्छा-खासा वोटबैंक है. कहा ये जाता है कि इंदिरा गांधी के कहने पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने फूलन देवी को सरेंडर करवाया.

फूलन देवी के अंतिम यात्रा में उनके पति उमेद सिंह से मिलतीं सोनिया गांधी.

फूलन देवी के अंतिम यात्रा में उनके पति उमेद सिंह से मिलतीं सोनिया गांधी.

इसी वोटबैंक के खातिर फूलन देवी के खिलाफ चल रहे सभी मामले को यूपी के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने वापस ले लिया और उन्हें समाजवादी पार्टी में शामिल कर सांसद बनाकर सम्मानित किया.

फूलन देवी को सांसद बनाने के बाद राजपूत समुदाय के जख्म को एक बार मुलायम सिंह यादव ने उभार दिया.

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बेहमई कांड का बदला लेने के लिए शेर सिंह राणा ने दिल्ली के सबसे सुरक्षित जगहों में से एक जगह माने जाने वाले अशोका रोड पर फूलन देवी को सरेआम गोलियों से छलनी कर दिया.

राजपूतों का हीरो

लुटियंस जोन में हुए इस हत्याकांड ने काफी राजनीतिक तूफान मचाया था. दो दिन बाद शेरसिंह राणा ने देहरादून में आत्मसमर्पण कर इल्जाम अपने सिर ले लिया .

राजनीतिक बयानबाजियों में शेरसिंह राणा का बचाव होने लगा. राजपूत समुदाय से ताल्लुक रखने वाले कुछ नेता भी दबी जुबान में शेरसिंह राणा का बचाव कर रहे थे.

शेरसिंह राणा ने उस समय भले ही फूलन देवी की हत्या की बात कबूली पर बाद में उसने कोर्ट में कहा था कि उसको इस केस में झूठा फंसाया गया है. शेर सिंह राणा पर आई एक किताब में राणा ने पुलिस पर जबरदस्ती जुर्म कबूल करवाने का आरोप लगाया.

कुछ लोगों का दावा है कि पिछले 16 साल से बेहमई गांव में शेर सिंह राणा की पूजा की जाती है. सुबह-शाम राणा की तस्वीर पर फूल-मालाएं चढ़ाई जाती हैं.

फूलन देवी हत्याकांड को कई नजरिए से देखा जाता है. जानकारों का मानना है कि यह एक राजनीतिक साजिश थी जिसमें फूलन के पति उम्मेद सिंह पर भी फूलन की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगता है.

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