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पड़ताल: जब थाने पर लटके 'पुतले' से खुला महिला की लावारिस लाश की हत्या का ‘राज’

पड़ताल में पढ़िए कैसे थाने के दरवाजे पर लटकाए गए 'पुतले' ने मीलों दूर छिपे पत्नी के हत्यारे को फंसा दिया कानून के शिकंजे में?

Updated On: Mar 17, 2018 02:20 PM IST

Sanjeev Kumar Singh Chauhan Sanjeev Kumar Singh Chauhan

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पड़ताल: जब थाने पर लटके 'पुतले' से खुला महिला की लावारिस लाश की हत्या का ‘राज’

पुतले (बुत) बोलते नहीं. यह तो जगजाहिर है. पुतले ढाई महीने पुरानी लाश की पहचान करा सकते हैं. कई सौ मील दूर छिपे बैठे हत्यारे को कोई पुतला या बुत कानून के पंजों में पकड़वा सकता है. यह सुनने-देखने-पढ़ने में हैरतअंगेज और अविश्वसनीय लगता है.

'पड़ताल' की दूसरी कड़ी में हम एक ऐसी ही सच्ची घटना से आपको रू-ब-रू करा रहे हैं. पड़ताल की इस कड़ी में ही आपको पढ़ने को मिलेगा कि आखिर कैसे पुलिस से भी तेज होती हैं फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्टस (न्यायपालिका आयुर्विज्ञान) की नजरें, जो कदम-कदम पर मददगार साबित होती हैं पुलिस या सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों के लिए. साथ ही दिल्ली के मुर्दाघर में किए गए लाश की पोस्टमॉर्टम एक्सपर्ट्स की रिपोर्ट और उससे हासिल सबूत, कैसे कई सौ मील दूर बिहार में छिपे बैठे हत्यारे की गर्दन को फंसवा देती है कानून के शिकंजे में?

पड़ताल की तह तक जाने के लिए सन् 1996-97 का उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के थाना सुलतानपुरी के रिकार्ड पर एक बार नजर डालनी होगी. इसी थाना इलाके की पुलिस करीब 24 साल की एक महिला की लावारिस लाश लेकर दिल्ली के सिविल हॉस्पिटल के सब्जीमंडी स्थित पोस्टमॉर्टम हाउस (मुर्दाघर) पहुंची. पुलिस ने पोस्टमॉर्टम हाउस प्रमुख/प्रभारी डॉ. के.एल. शर्मा से शव का पोस्टमॉर्टम कराने का आग्रह किया.

दिल्ली पुलिस की कहानी

दिल्ली पुलिस ने जो कहानी फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट्स को सुनाई, उसके मुताबिक, महिला की लाश नाले में पड़ी थी. लाश को रजाई में लपेटकर उसकी गठरी की सिलाई कर दी गई थी. गठरी को कंबल में लपेटकर बांध दिया गया था. लाश कुछ इस तरह से पैक की गई थी कि उसके अंदर हवा न जाने पाए. बरामदगी के वक्त पुलिस को लाश वाली गठरी का कुछ हिस्सा (नीचे की ओर वाला) पानी में डूबा मिला. पानी में पड़े होने के बाद भी लाश पूरी तरह सड़ी नहीं थी. महिला की लाश के गले में मौजूद धागे में एक चाबी लटक रही थी.

महिला के सिर के बाल खुद-ब-खुद उतरकर गठरी के भीतर इकट्ठे हो चुके थे. हाथों में चूड़ियां मौजूद थीं. देखने में कद-काठी, रंग-नाक-नक्श से महिला नेपाली मूल की लग रही थी. महिला के गले पर तार से दबाए जाने का एक गहरा काला निशान था. कपड़ों के नाम पर महिला के बदन पर दो कपड़े मौजूद थे. पुलिसिया कहानी के मुताबिक हत्या की घटना दो-तीन पुरानी थी.

फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्टस ने पुलिस की थ्योरी नकारी

महिला की लाश का सब्जी मंडी मुर्दाघर में पोस्टमॉर्टम किया गया. कई घंटे चले पोस्टमॉर्टम ने पुलिस की थ्योरी पलट दी. शव-विच्छेदन के वक्त फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्टस को पुलिस की यह बात तो सही लगी कि, महिला की हत्या गले में तार का फंदा कसकर की गई. पोस्टमॉर्टम के दौरान पता चला कि, महिला के सिर पर भारी चीज से चोट भी की गई थी. जिसके चलते महिला के सिर में ‘फ्रेक्चर’ भी मौजूद था.

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट के सामने स्थित पोस्टमॉर्टम हाउस, इसी में हुआ था महिला की लाश का पोस्टमॉर्टम

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट के सामने स्थित पोस्टमॉर्टम हाउस, इसी में हुआ था महिला की लाश का पोस्टमॉर्टम

सुलतानपुरी थाने की जो पुलिस महिला को नेपाली मूल का बता रही थी, पोस्टमॉर्टम के बाद उसकी वो थ्योरी भी फेल हो गयी. शव का पोस्टमॉर्टम करने वाले फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट और उस वक्त सब्जी मंडी पोस्टमॉर्टम हाउस प्रभारी डॉ. के. एल. शर्मा (अब रिटायर्ड) के मुताबिक वह महिला पहनावे-ओढ़ावे, कद-कादी-रंग-रूप आदि से मंगोल-आर्यन मूल की मालूम पड़ रही थी. बदन पर मिले कपड़ों, चूड़ियों के डिजाइन, गले में मौजूद धागे में लटका चाबी गुच्छा आदि, महिला का संबंध बिहार से होने की ओर भी इशारा कर रहे थे.

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पोस्टमॉर्टम के बाद डॉ. शर्मा ने जब मुर्दाघर में मौजूद सुलतानपुरी थाने के उस वक्त के थाना-प्रभारी (एसएचओ) को बताया कि, लाश दो से ढाई महीने पुरानी है. तो यह सुनते ही पुलिस परेशान हो उठी क्योंकि पुलिस इस थ्योरी को तो दूर-दूर तक जांच में शामिल करने को राजी ही नहीं थी कि, लाश दो-ढाई महीने पुरानी भी हो सकती है. पुलिस का तर्क था कि, लाश गठरी में बंद थी. पानी में आधी डूबी हुई थी. इसके बाद भी पूरी तरह नहीं सड़ी थी. अगर लाश पुरानी होती तो वो बुरी तरह सड़-गल चुकी होती.

फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट के साइंटिफिक तर्क

उस वक्त सब्जी मंडी पोस्टमॉर्टम हाउस के इंचार्ज डॉ. के.एल. शर्मा के मुताबिक, लाश को हत्यारे ने कुछ इस तरह से सील (पैक) किया था कि, गठरी के अंदर हवा बिलकुल प्रवेश न कर सके. साथ ही लाश की गठरी नाले के पानी में उतनी ही डूबी थी, जिससे की वो पूरी तरह सड़ सके. उनके मुताबिक इसी वजह से महिला के सिर के बाल तो हट गए थे, मगर लाश पूरी तरह सड़ी नहीं.

फॉरेंसिक साइंस में लाश की इस स्थिति को ADIPOCERE कहते हैं. जिसमें लाश हवा और पानी के पूर्णत: संपर्क में न आने की वजह से पूरी तरह से सड़ नहीं पाती है. या यूं कहें कि, यही वो स्टेज होती है जब लाश सड़ना शुरू हो चुकी होती है मगर पूर्ण रुप से सड़ नहीं पाई होती है. तो भी गलत नहीं होगा.

पोस्टमॉर्टम एक्सपर्ट्स के मुताबिक लाश को ADIPOCERE पोजीशन में आने में औसतन दो से ढाई महीने का वक्त लगता है. सुलतानपुरी पुलिस को लाश देखते ही (पोस्टमॉर्टम से पहले ही) यह बात पोस्टमॉर्टम करने वाले डाक्टर ने बता दी थी. जिसे पुलिस किसी भी कीमत पर मानने को राजी नहीं थी.

मुसीबत में पुलिस की मददगार बनी फॉरेंसिक साइंस

महिला की हत्या को दो से ढाई महीना हो चुका है. लाश गठरी में बुरी तरह बांधकर फेंकी गई थी. लाश की गठरी पानी में आधी डूबी हुई थी. इसके बाद भी लाश सड़ना-गलना शुरू न करे आदि-आदि नतीजे पोस्टमॉर्टम के दौरान सामने आए यही वे तमाम अबूझ सवाल थे, जिसने दिल्ली पुलिस के जांच अधिकारी को उलझा कर रख दिया. अंतत: परेशान-हाल सुलतानपुरी पुलिस को फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट्स से मिले ‘इनपुट्स’ की मदद से ही जांच को आगे बढ़ाना पड़ा.

फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की सलाह जो बन गई नजीर

इस बेहद उलझे हुए मामले से बेहाल हुई पुलिस को महिला के शव का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर के.एल. शर्मा ने महिला की हू-ब-हू ‘डमी’ (बुत या पुतला) बनाने की सलाह दी. डॉ. शर्मा ने महिला के बुत को वे ही कपड़े धुलवा कर पहनाए जो, पोस्टमॉर्टम के दौरान फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट्स को लाश के ऊपर मौजूद मिले थे. पुतले के गले में लाश से बरामद महिला का वही असली धागा और चाबी पहनाई गई, जो लाश के गले में मौजूद था. पोस्टमॉर्टम के दौरान हाथों में मिली चूड़ियां भी महिला की डमी को पहनाई गईं.

थाने के गेट पर टंगे ‘पुतले’ ने खुलवा दिया हत्याकांड

सब्जी मंडी मोर्च्यूरी प्रभारी डॉ. के.एल शर्मा की सलाह पर, सुलतानपुरी थाने के गेट पर महिला के पुतले को टांगे हुए पुलिस को अभी कुछ घंटे ही बीते थे. थाने के गेट पर टंगे पुतले को देखने वाले तमाशबीनों की भीड़ जुट गई. परिणाम यह रहा कि, इलाके के लोगों ने ‘पुतले’ को देखकर महिला की पहचान कर दी. पुलिस महिला के घर पहुंची. पुलिस को मकान पर पहुंचने पर पता लगा कि, दो-ढाई महीने से (महिला की हत्या होने का यही दो ढाई महीने पहले का संभावित टाइम पोस्टमॉर्टम करने वाले फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट डॉक्टर शर्मा ने सुलतानपुरी थाना एसएचओ को पोस्टमॉर्टम करते वक्त बता दिया था) महिला और उसका पति कमरे में ताला लगाकर गायब हैं.

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आगे की पुलिस पड़ताल में महिला बिहार की ही रहने वाली निकली. जबकि सुलतानपुरी पुलिस शुरुआती जाँच में महिला को नेपाली मूल का मान रही थी. बिहार पहुंची दिल्ली पुलिस की टीम को महिला के पिता ने बताया कि, जो कपड़े लाश पर मिले हैं, वे उसके (मरने वाली महिला को) पिता ने ही लाकर दिए थे. इसके बाद पुलिस ने महिला के पति को गिरफ्तार कर लिया. पति ने पत्नी की हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया.

आरोपी का कबूलनामा, अदालत और सबूत

पुलिस पूछताछ में पति ने कबूला था कि, रोज रोज के झगड़े से परेशान होकर उसने पत्नी की हत्या का षडयंत्र रचा था. पति ने महिला के सिर पर पहले लोहे की छड़ से वार किया. जब वो बेहोश हो गई तो, उसने स्कूटर के तार से उसका गला घोंट दिया. इसके बाद घर में मौजूद रजाई में पैक करके रजाई को चारों ओर से सिल दिया. लाश की गठरी को कंबल में लपेटकर नाले में फेंक आया था. अदालत में जब मामला पहुंचा तो, कोर्ट में भी आरोपी के खिलाफ फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट की वो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ही पुलिस के लिए मील का पत्थर साबित हुई.

आरोपी के खिलाफ और महिला की हत्या को साबित करने के लिए महिला के वे कपड़े जो, पोस्टमॉर्टम के दौरान फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट्स ने पुलिस को दिए थे, महिला के हाथों में मौजूद चूड़ियां, कंबल-रजाई जिसमें हत्यारे ने लाश की गठरी बनाई थी, महिला के सिर के बाल, धागे में पड़ी गले से बरामद हुई चाबी दिल्ली पुलिस (सुलतानपुरी थाना) ने अदालत में बतौर सबूत पेश की.

फॉरेंसिक साइंस की मदद से 'ब्लाइंड-मर्डर' खुलवाने के माहिर देश के मशहूर पोस्टमॉर्टम एक्सपर्ट डॉ. के.एल. शर्मा, जिनके नाम दर्ज है 25 हजार पोस्टमॉर्टम करने का रिकार्ड

फॉरेंसिक साइंस की मदद से 'ब्लाइंड-मर्डर' खुलवाने के माहिर देश के मशहूर पोस्टमॉर्टम एक्सपर्ट डॉ. के.एल. शर्मा, जिनके नाम दर्ज है 25 हजार पोस्टमॉर्टम करने का रिकार्ड

मिलिए ब्लाइंड मर्डर खुलवाने में माहिर फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट से

देश के मशहूर फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट डॉ. के.एल. शर्मा (रिटायर्ड) का जन्म 17 अप्रैल 1945 को गांव बानसूर, जिला अलवर, राजस्थान में हुआ था. 23 साल की उम्र में ही के. एल. शर्मा ने सन् 1968 में उदयपुर के रविंद्रनाथ टैगोर कॉलेज से एमबीबीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की थी. कुछ समय तक डॉ. शर्मा राजस्थान सरकार के स्वास्थ्य सेवा विभाग में सिविल असिस्टेंट सर्जन रहे. इसके बाद 1973 में उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवा ज्वाइन करते ही रामपुर और लखनऊ सिटी में जिला स्वास्थ्य प्रभारी बने.

22 फरवरी सन् 1975 को डॉ. के.एल. शर्मा केंद्रीय लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के जरिए केंद्रीय स्वास्थ्य सेवा में सलेक्ट हुए. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सन् 1996 से सन् 2005 (रिटायरमेंट तक) तक वहैसियत फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट, तकरीबन 25000 शवों का पोस्टमॉर्टम डॉक्टर शर्मा की देखरेख में ही हुआ. जबकि इस सेवा अवधि में बने 84 मेडिकल बोर्ड (पैनल) के चेयरमैन भी डॉक्टर शर्मा ही बनाए गए.

दिल्ली के सफदरजंग, डॉ. राम मनोहर लोहिया, लोक नायक जय प्रकाश नारायण (एलएनजेपी हॉस्पिटल) में फॉरेंसिक मेडिसन एक्सपर्ट के रूप में सेवाएं दे चुके डॉ. के. एल. शर्मा की तमाम खासियतों पर उनकी अपनी ही एक अलग पहचान हमेशा भारी साबित हुई है. और वो खासियत है, डॉ. के.एल. शर्मा का दिल्ली विश्वविद्यालय का फॉरेंसिक मेडिसन (न्यायालिक आयुर्विज्ञान) में एम.डी. (उच्च स्नातक) का पहला छात्र होने का गौरव. डॉ. शर्मा ने ये गौरव सन् 1982 में केंद्रीय स्वास्थ्य सेवा में नौकरी करते हुए ही हासिल किया.

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