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जब ‘बेहया’ बाबा की देहरी पर मिली ‘सुहागिन’ को 'विधवा' होने की ‘दुआ’!

अब तक ‘नीम-हकीम-खतरा-ए-जान’ जैसी कहावत ही देखी-पढ़ी-सुनी है. लेकिन ‘पड़ताल’ की इस कड़ी में पढ़िए ऐसा किस्सा जिसकी बुनियाद ‘नीम-हकीम-दुआ-ए-विधवा’ जैसे समाज में एकदम ‘अ-प्रचलित’ से जुमले पर रखी गई है.

Updated On: Feb 09, 2019 09:11 AM IST

Sanjeev Kumar Singh Chauhan Sanjeev Kumar Singh Chauhan

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जब ‘बेहया’ बाबा की देहरी पर मिली ‘सुहागिन’ को 'विधवा' होने की ‘दुआ’!

अब तक ‘नीम-हकीम-खतरा-ए-जान’ जैसी कहावत ही देखी-पढ़ी-सुनी है. लेकिन ‘पड़ताल’ की इस कड़ी में पढ़िए ऐसा किस्सा जिसकी बुनियाद ‘नीम-हकीम-दुआ-ए-विधवा’ जैसे समाज में एकदम ‘अ-प्रचलित’ से जुमले पर रखी गई है. संभव है कि यह जुमला शायद इसी कहानी की खातिर जन्मा हो. इसी कहानी के अंत पर, जमाने में जमींदोज भी हो जाए. ‘नीम-हकीम-दुआ-ए-विधवा’ यानि वो अनपढ़-गंवार झोला-झाप कथित हकीम या तांत्रिक (जादू-टोटने-टोटके वाला) जिसकी, देहरी पर बांटी-बेची जाती थी ‘दुआ’! हैरान करने वाला खूनी किस्सा उस बवाल-ए-जान बाबा का, जिसके द्वारा उसकी मनहूस, ‘कुटिया’ में बांटा गया था बीते साल एक सुहागिन को ‘विधवा’ हो जाने का ‘आशीर्वाद’! पहली नजर में भले ही पाठकों को यह सब अविश्वसनीय लगे मगर सच यही है. कौन है यह धूर्त बाबा? भला क्यों कोई सुहागिन खुद ही यहां चलकर पहुंच गई ‘विधवा’ होने का आशीर्वाद लेने ? ऐसे ही और तमाम सवालों के जवाब के लिए पढ़िए आगे की पूरी कहानी.

अल्हड़ की जीत पर भला मासूम खुश क्यों?

पंजाब का गिल कलां गांव बठिंडा जिले के थाना सदर रामपुरा फूल इलाके में स्थित है. गुरलाल और हरबंस कौर इसी गांव के बाशिंदे हैं. इस दंपत्ति की बेटी का नाम है किरणपाल कौर. बात तब की है जब, पंजाब में प्रचलित कबड्डी का खेल देखने की शौकीन हरबंस कौर और गुरलाल की बेटी किरणपाल कौर, लहरा धूर कोट स्थित शासकीय सेकेंडरी स्कूल में पढ़ रही थी.

गिल कलां गांव की कबड्डी टीम का होनहार और गबरू जवान खिलाड़ी हरविंद्र सिंह (हरविंदर, मूल निवासी जेठूका गांव) उर्फ हिन्दा (हिंदा), किरणपाल कौर का फेवरिट प्लेयर था. गिल कलां गांव की कबड्डी टीम ने एक दिन जब, संगरूर की टीम को बुरी तरह हरा दिया. अपनी टीम की उस जीत का ‘हीरो’ हिन्दा घोषित किया गया. कबड्डी मैच जीता हिन्दा और उसकी टीम ने था. मगर खुशी का जश्न मना रही थी कबड्डी ग्राउंड पर एक कोने में अकेली बैठी लड़की किरणपाल कौर.

पहले तुम्हारा ‘खेल’ पसंद था अब ‘तुम’

उसी दिन किरणपाल कौर ने मन में ठान ली कि वो अगर सात फेरे लेकर किसी की सुहागिन बनेगी तो वो ‘हिन्दा’ होगा. एक दिन हिन्दा ने अपने प्यार में बावरी सी हुई किरणपाल से पूछ ही लिया, ‘किरण तुझे मेरा खेल पसंद है या मैं?’ किरण ने जब दोनों को ही (हिन्दा और उसका खेल) खुद की पसंद में शुमार जाहिर किया, तो हिन्दा बोला कि, दोनों में से कोई एक चुन और सोचकर बता. इस पर किरण हिन्दा से बोली, ‘पहले तुम्हारा खेल पसंद था और अब तुम.’ किरणपाल के मुंह से इतना सुनते ही अल्हड़ मनमौजी हरविंद्र सिंह उर्फ हिन्दा की बांछें खिल गईं.

वो इश्क ही क्या, नसीहत जिसका रुख बदल दे

हिन्दा के साथ बेटी के प्यार के चर्चों ने मां हरबंस कौर और पिता गुरलाल की नींद उड़ा दी. कोई माकूल रास्ता न मिलता दिखा. इज्जत की खातिर मां-बाप ने कुछ दिन के लिए बेटी किरणपाल को ननिहाल में रहने भेज दिया. यह सोचकर कि शायद वहां दूर रहकर वो हिन्दा को भूल जाएगी. इंसान जैसा सोचता है, वैसा अक्सर हुआ नहीं करता है. तो भला अड़ियल किरणपाल कौर के बदनसीब मां-बाप भी इस अछूत कहावत की छाया से दूर कैसे रह पाते. हिन्दा के प्यार में पागल किरणपाल के प्यार के चर्चे. कौम-कुनबे की पंचायत तक पहुंच गए. पंचों ने सहमति जताई कि अगर वे दोनों विवाह करना चाहते हैं, तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए.

‘लवली-पैग’ ने लंगड़ी बना दी जिंदगी

शादी के करीब एक साल बाद हिन्दा और किरणपाल कौर के यहां बेटे ने जन्म लिया. नाम रखा गया सरनदीप सिंह. बेटे के जन्म से निहाल हिन्दा की तमन्ना थी कि कबड्डी में वो खुद तो भले ही मुकाम हासिल न कर सका. बेटे सरनदीप को मगर इंटरनेशनल स्तर का कबड्डी खिलाड़ी जरूर बनाएगा. दिन भर खेतों में भाई-पिता के साथ हाड़तोड़ मेहनत के बाद शाम ढले घर पहुंचते ही हिन्दा निढाल हो जाता. दिन-ब-दिन बढ़ती शारीरिक थकान का जिक्र हिंदा ने गांव के यार-दोस्तों से किया तो उन्होंने उसे हर रात खाना खाने के बाद शराब के दो पैग पीने जैसी कुत्सित सलाह दे डाली. यारों के मशविरे पर हिन्दा हर रात पैग लगा कर चैन की नींद सोने लगा.

तार-तार रिश्तों को देख इंसानियत सिसक उठी

शराब के उन दो ‘पैग’ के बलबूते चैन की नींद सोना ही, कुछ वक्त बाद हिन्दा और किरण की जिंदगी का नासूर बन गया. शाम ढले थके-हारे घर पहुंचे हिन्दा के लिए पैग, बाद में बढ़कर ‘पटियाला-पैग’ में तब्दील हो गए. कुल जमा चंद लम्हों की शांति की खातिर पी गई शराब हिन्दा-किरण की खुशियों के लिए ‘ग्रहण’ बन गई. वो ग्रहण जिसने दो खानदानों के माथे पर कभी न मिटने वाला बदनामी का कलंक तो लगाया ही साथ-साथ पति-पत्नी के बीच के पाकीजा रिश्ते को भी तार-तार कर दिया.

बीवी की हसरतों पर भारी पड़ी पति की शराबखोरी

हिन्दा के पास सुख-सम्पन्नता की कमी नहीं थी. अब जरूरत थी तो बस समाज में, एक अदद ऊंचे-रुतबे की. इसके लिए उसने ‘आप’ (आम आदमी पार्टी) की उंगली पकड़ ली. यह अलग बात है कि पार्टी ने हिन्दा को पंजाब में विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं दिया. इस झटके के बाद हिन्दा ने अंधा-धुंध शराब पीना शुरू कर दिया. हिन्दा की गले में ज्यों-ज्यों शराब उतरी. त्यों-त्यों बीवी किरणपाल की नजरों से हिन्दा उतरता चला गया.

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औरत ही औरत की दुश्मन निकली!

किरणपाल कौर की तबाह जिंदगी की किताब पलटने पर उसका हर पन्ना फटा हुआ ही दिखाई पड़ता है. गांव की तमाम परिचित औरतों से किरणपाल कौर ने पति को शराब की लत से बचाने के वास्ते राय-मशविरा किया. इन्हीं औरतों में से कुछ ने किरणपाल को नाम सुझाया बलबीर सिंह उर्फ निक्का बाबा का. सलाह देने वाली उन औरतों का दावा था कि निक्का बाबा ही उनके शराबी-कबाबी-बिगड़ैल पतियों को ठिकाने पर लाया था. लिहाजा जमाने में मौजूद ढोंगी बाबाओं के शातिर-दिमाग से पूरी तरह अनजान किरण कौर एक दिन जा पहुंची सीधी निक्का बाबा के डेरे पर.

हिन्दा

हिन्दा

नामचीन टोटकेबाज ‘निक्का’ की कहानी!

पंजाब पुलिस और किरणपाल कौर के रिश्तेदारों के मुताबिक, ‘बलबीर सिंह उर्फ निक्का दबंग प्रवृत्ति का इंसान है. इलाके में, निक्का लाचार लोगों को मूर्ख बनाकर उनसे मोटी रकम ऐंठने के लिए बदनाम है! बताते हैं कि ऊल-जलूल हरकतों से आजिज पिता ने निक्का को घर से बेदखल कर दिया था. उसके बाद वो राजगढ़ कुब्बे स्थित एक सन्यासी के डेरे में जा पहुंचा. सन्यासी बाबा की मौत के बाद दबंग निक्का खुद ही डेरे का ढोंगी-तांत्रिक बाबा बन बैठा.’

निक्का के इन तमाम ऐबों से अनजान किरण कौर एक दिन उसके डेरे पर जा पहुंची. बिगड़ैल और शराबी-कबाबी पति हिन्दा को सुधरवाने की हसरत पाले हुए. यह अलग बात है कि, धूर्त निक्का के मायावी डेरे के भीतर, सुहागिन किरण कौर को मिला ‘विधवा’ होने का घिनौना ‘आशीर्वाद’!

गुरु से चार कदम आगे चलता था ‘चेला’

घर-खानदान से चोरी-छिपे एक दिन किरण कौर, निक्का के डेरे पर अकेली ही जा पहुंची. डेरे पर उसका पाला सबसे पहले पड़ा निक्का से चार-कदम आगे चलने वाले उसके धूर्त चेले संदीप से. संदीप अपने गुरु निक्का के हर बुरे कर्म का भागीदार-राजदार था. वो जौकड़ियां थाना क्षेत्र के गांव बैहणी वाल, जिला मानसा का मूल निवासी था. ढोंगी गुरु की कथित काबिलियत में चार चांद लगाकर ‘ग्राहक’ फांसने का जिम्मा संदीप के ही कंधों पर था. पीड़ित किरण से पहली ही मुलाकात में हाथ लगी उसकी, तमाम राज की बातें संदीप ने ढोंगी बाबा निक्का को मौका मिलते ही बता दीं.

कल के प्यार पर भारी पड़े आज के पाप

पुलिसिया कहानी के मुताबिक, ‘बजरिये संदीप, जब किरण निक्का के सामने पेश हुई. तो उसे वश में करने के लिए निक्का ने, संदीप से पहले ही हासिल हो चुकी, किरण और उसके पति के संबंध में तमाम जानकारियां देकर, किरण को हैरत में डाल दिया. शराबी पति और उसकी शराब से पिंड छुड़ाने की चाहत में अंधी पत्नी किरण निक्का के डेरे पर यह नहीं समझ पाई कि धूर्त निक्का उसे वही सब बता-सुना रहा है जो वो (किरण) निक्का के चेले संदीप से सामने 10-5 मिनट पहले ही रो-धो और गा-बता चुकी थी.

ऐसे में पहले से बेचैन मन किरण को सामने मौजूद शातिर दिमाग ढोंगी बाबा निक्का के जेहन में कुलांचें मार रहीं उसकी ‘घिनौनी’ हसरतों का अंदाजा ही नहीं लग सका. खुद की इसी गलती के चलते वो (किरण कौर) जाने-अनजाने शातिर दिमाग निक्का बाबा के जाल में फंसती चली गई. नौबत यहां तक आ गई कि निक्का के मास्टरमाइंड शिष्य संदीप ने सुहागिन किरणपाल कौर को ‘विधवा’ करवा डालने तक का आशीर्वाद दे-दिलवा डाला!

शोहरत से पहले ही खामोश ‘मौत’ साथ हो ली

पंजाब पुलिस के मुताबिक, ‘ शराब छोड़ने की उम्मीद में पत्नी के कहने पर हिन्दा भी निक्का बाबा के डेरे पर आने-जाने लगा. डेरे पर आते-जाते कई महीने बीत गए. इसी दौरान राज्य में हुए जिला परिषद चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) ने हिन्दा को बठिंडा देहात से अपनी पार्टी का उम्मीदवार बना दिया. हिन्दा ने पार्टी की विधायक (महिला) की मौजूदगी में चुनाव के लिए नामांकन भी दाखिल कर दिया. उधर हिन्दा, इस बात से पूरी तरह अनभिज्ञ था कि, पत्नी किरण कौर और निक्का बाबा के चेले संदीप के बीच उसे (हिन्दा) कत्ल कराए जाने के षड्यंत्र को अंतिम रूप दिया चुका है.’

किरणपाल

किरणपाल

मतलब शोहरत से पहले ही (पंचायत चुनाव में जीत मिलने से पहले ही) ‘खामोश-मौत’ हिन्दा के साथ लम्हा-लम्हा चलने लगी थी.

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लाश मिलने से पंजाब राज्य में सनसनी

10 सितंबर 2018 को सुबह अपने ही मकान के एक कमरे में हिन्दा की लाश मिलने से पंजाब राज्य में सनसनी फैल गई. हिन्दा की हत्या उसके सिर को कुचल कर की गई थी. पत्नी किरणपाल कौर ने पुलिस को जो कहानी समझाई उसके मुताबिक, ‘रात के वक्त हिन्दा के पास तीन अजनबी आए थे. वे सब शराब पी रहे थे. वो (पत्नी किरण) 15 साल के इकलौते बेटे को लेकर मकान की पहली मंजिल पर सोने चली गई. सुबह नीचे आकर देखा तो पति मरा मिला.’ उसी दिन थाना सदर रामपुरा फूल में हिन्दा की हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया. ‘पड़ताल’ सौंपी गई थाना प्रभारी निर्मल सिंह को.

हत्या हिन्दा की और नींद पुलिस की गायब

चुनाव के वक्त में हुई हिन्दा की हत्या ने बठिंडा जिला पुलिस की नींद उड़ा दी. एसएसपी नानक सिंह से लेकर एसपी (डिटेक्टिव) स्वर्ण सिंह तक के पास वारदात का कोई सुराग नहीं था. परेशान हाल पुलिस ने अंतत: 13 सितंबर 2018 यानि वारदात के तीन दिन बाद ही ‘पड़ताल’ की दिशा निक्का बाबा, हिन्दा की पत्नी किरण, निक्का के शागिर्द संदीप की ओर मोड़ दी. लिहाजा सबसे पहले पुलिस ने किरण को हिरासत में ले लिया. किरण से पता चला कि हिन्दा की ‘अकाल-मौत’ का सौदा करने वाला कोई दुश्मन नहीं. वरन् वही पत्नी किरण है, जिसके लिए हिन्दा कभी ‘जिंदगी’से प्यारा हुआ करता था.

सुहागिन से ‘विधवा’ बनने को भटकती बीवी

बठिंडा पुलिस के मुताबिक, ‘निक्का बाबा मनमौजी तो उसका चेला संदीप उससे चार कदम आगे अय्याश किस्म का इंसान में छिपा शैतान था. शराबी पति से परेशान किरण के साथ निक्का बाबा के डेरे में संदीप ने जब चाहा मनमर्जी की. उन तमाम बदतर हालात में भी किरण चुप्पी साधे रही. ताकि निक्का के डेरे पर किसी तरह से उसे सुहागिन से ‘विधवा’ बनने का वरदान हासिल हो सके!

वक्त ने अचानक पलटी मारी. लिहाजा निक्का और संदीप दोनों ही किरण के आगे पीछे घूमने लगे. इतना ही नहीं मौकापरस्त और बाद में ‘पतिहंता’ साबित हुई किरण. उल्टे उन मनमौजी गुरु-चेले (निक्का बाबा और संदीप) से ही रकम की वसूली करने लगी.

बीवी की मुखबिरी बनी ‘अकाल-मौत’ की वजह

शक होने पर एक दिन पत्नी किरण कौर का पीछा करता हुआ पति हिन्दा निक्का बाबा के डेरे पर जा पहुंचा. वहां हिन्दा ने संदीप और किरण को जिस हाल में देखा वो किसी भी पति के लिए ना-काबिल-ए-बरदाश्त था. गुस्साए हिन्दा ने रंगीन-मिजाज संदीप को मौके पर ही तबियत से धुना. ढोंगी निक्का बाबा की खुलेआम बेइज्जती की. उसके बाद पत्नी किरण को घसीटता हुआ घर ले गया. हिन्दा की तमाम पाबंदी के बाद संदीप ने किरण को अपने डेरे पर बुलाना बंद कर दिया.

अब वो दोनों ढोंगी मक्खन बाबा के डेरे (अड्डे) पर मिलने लगे. मक्खन बाबा और निक्का बाबा कमोबेश एक ही ‘फितरत’ रंगीन-मिजाज थे. एक दिन मौका पाकर निक्का, मक्खन और संदीप किरण को समझाने में कामयाब हो गए कि उसका पति हिन्दा उसे (किरण) ठिकाने लगाने वाला है.

बाबा के दर पर मिली विधवा होने की मुराद

पति हिन्दा के हाथों खुद को कत्ल होने से बचाने के लिए. घबराई किरण ने मक्खन बाबा और संदीप से ‘विधवा’ होने का ‘आशीर्वाद’ मांगा. मक्खन-संदीप पहले से ही इसी ताड़ में बैठे थे. दोनों ने वक्त गंवाए बिना ही किरण ‘विधवा’ करा डालने का ‘आशीर्वाद’ दे डाला. मक्खन ने मय संदीप अपने डेरे पर काम करने वाले चमकौर सिंह उर्फ कोरी, जैमल सिंह (दोनों नौकर) को भी 50-50 हजार रुपए में राजी कर लिया. योजना के मुताबिक 9 सितंबर 2018 की रात को पत्नी किरण ने शराब और अंडे के आमलेट में नींद की पिसी हुई गोलियां मिलाकर वो सब हिन्दा को खिला-पिला दिया. हिन्दा के बेहोश होते ही किरण ने संदीप को मोबाइल से खबर कर दी.

अंत में मिला कत्ल का पहला षड्यंत्रकारी

मामले के खुलासे के वक्त प्रेस-कांफ्रेंस में बठिंडा जोन के पुलिस महानिरीक्षक एम.एफ. फारुखी ने बताया था कि, ‘संदीप उस वक्त चमकौर और जैमल के साथ माड़ी गांव में कार में बैठा किरण के ही फोन का इंतजार कर रहा था. किरण के साथ घर में घुसे तीनों ने हिन्दा की हत्या कर दी. बाद में पुलिस ने एक-दो को छोड़कर तकरीबन सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. 15 सितंबर 2018 को एएसआई मनजिंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल शेर सिंह, कांस्टेबल गुरप्रीत सिहं और लेडी कांस्टेबल अमनदीप कौर की टीम ने संदीप को उसके गांव के पास से ही पकड़ लिया. पूछताछ के बाद पुलिस ने मक्कार निक्का बाबा को रिहा कर दिया. इस वजह से क्योंकि वो मनमौजी तो था, मगर हिन्दा की हत्या में उसका कोई रोल नहीं था.’

(लेखक वरिष्ठ खोजी पत्रकार हैं)

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