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पड़ताल: हत्यारा लाश के साथ चल रहा है, एक्सपर्ट्स ने पुलिस को पोस्टमॉर्टम के वक्त ही बता दिया

आशीष सोमानी की लाश का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर के.एल शर्मा के मुताबिक, इससे यह भी तय हो गया कि हत्यारा पीड़ित परिवार का करीबी-परिचित है जो आशीष सोमानी के परिवार और पुलिस पर पूरी नजर रखे हुए है

Sanjeev Kumar Singh Chauhan Sanjeev Kumar Singh Chauhan Updated On: Mar 31, 2018 09:20 AM IST

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पड़ताल: हत्यारा लाश के साथ चल रहा है, एक्सपर्ट्स ने पुलिस को पोस्टमॉर्टम के वक्त ही बता दिया

फॉरेंसिक साइंस की जबाबदेही कानून के प्रति यूं ही नहीं होती है. तमाम साल अदालतों में मुकदमेबाजी चलने से पहले ही फॉरेंसिक साइंस करीब-करीब यह तो तय कर ही देती है कि आपराधिक घटना का अंजाम क्या होगा? बशर्ते घटना की 'पड़ताल' अगर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर पूरी कर ली जाएगी तो.

कुल जमा अगर यह कहा जाए, कि अपराध-अपराधी, अदालत और तमाम जांच एजेंसियों से फॉरेंसिक साइंस कहीं आगे चलती और बोलती है, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. भारत में इसका जीता-जागता सबूत बना 20 साल पहले 11 साल के मासूम आशीष सोमानी की अपहरण के बाद जघन्य हत्या. पढ़िए 'पड़ताल' सीरिज में इस केस के खुलासे की कहानी:

9 नवंबर 1997 की तारीख और पूर्वी दिल्ली का थाना कृष्णा नगर

शाम के समय थाना क्षेत्र के गुरु अंगद नगर (ईस्ट आजाद नगर) में रहने वाले अशोक कुमार कृष्णा नगर थाने पहुंचे. पूर्वी दिल्ली इलाके के नामी कोयला बिजनेसमैन अशोक कुमार ने पुलिस को बताया कि, उनका 11 साल का बेटा आशीष सोमानी घर के बाहर खेलते-खेलते गायब हो गया है. आशीष पास ही मौजूद मोहल्ला ज्वाला नगर स्थित सेंट जोसफ स्कूल में कक्षा-6 का विद्यार्थी था. थाने में मौजूद ड्यूटी अफसर हवलदार देव पाल ने एफआईआर नंबर 521 पर अपहरण का मुकदमा दर्ज करके, ‘पड़ताल’ सब-इंस्पेक्टर हरि सिंह के हवाले कर दी.

फिरौती के लिए हुआ था अपहरण

दारोगा हरि सिंह, थाने के सिपाही श्योपाल और विजेंद्र सिंह के साथ घटनास्थल पर पहुंचे, तो पता चला कि, आशीष का अपहरण फिरौती की मोटी रकम वसूलने के लिए किया गया है. पुलिस के पहुंचने से पहले ही, अपहरणकर्ता आशीष के चाचा अरुण कुमार को फोन पर धमका चुका था. अपहरणकर्ता ने कहा था कि पांच लाख रुपये का दो घंटे के अंदर इंतजाम कर लो. दोबारा फोन करूंगा तो फिरौती की रकम लेने की जगह बता दूंगा. कहकर अपहरणकर्ता ने फोन काट दिया. फोन लैंडलाइन पर किया गया था.

घटना के समय घर पर नहीं थे माता-पिता

जिस वक्त आशीष सोमानी का अपहरण हुआ उस वक्त उसके पिता अशोक कुमार पत्नी शबनम सोमानी के साथ आईटीओ पर आयोजित समारोह में गए थे. इधर पुलिस को जैसे ही बिजनेसमैन के बेटे के अपहरण की सूचना मिली, घर पर दिल्ली पुलिस के आला-अफसरों की भीड़ इकट्ठी हो गई. मोहल्ले में दिन-दहाड़े बच्चे का अपहरण होने से कोहराम मच गया.

अपहरणकर्ताओं तक पहुंचने के लिए विशेष टीम

मामले की पड़ताल के लिए दो तेज-तर्रार इंस्पेक्टर, त्रिलोकपुरी थाने के एडिश्नल एसएचओ सत्यपाल सिंह, इंस्पेक्टर विनोद कपूर सहित हलवलदार बाबू लाल, गुरतेज सिंह और सिपाही कंवर प्रताप (क्राइम टीम से) और सुधीर कुमार की एक विशेष टीम बनाई गई. अशोक कुमार सोमानी के सभी फोन नंबर पुलिस ने रिकॉर्डिंग पर लगवा दिए. ताकि अपहरणकर्ताओं द्वारा की जाने वाली फिरौती की ‘कॉल्स’ (बातचीत) को सुना और रिकॉर्ड किया जा सके.

रात भर तलाश में भटकी पुलिस, सुबह घर के दरवाजे पर मिली लाश

अपहृत आशीष सोमानी की तलाश में दिल्ली पुलिस तड़के तीन बजे तक अंधेरे में इधर-उधर भटकती रही. आसपास के लोग भी बच्चे की तलाश के बाद थक-हार के घर चले गए. सोमानी परिवार दिन निकलने की उम्मीद लिए घर के भीतर जाकर बैठ गया. भोर होने पर अपहृत बच्चे आशीष की मां शबनम सोमानी ने घर के पीछे का दरवाजा जैसे ही खोला, तो उनके मुंह से दिल दहला देने वाली चीख निकल गई. जब तक घर वाले उनके पास पहुंचे, वो बेहोश हो चुकी थीं. सामने दरवाजे पर बच्चे आशीष सोमानी की लाश पड़ी थी.

लाश मिलते ही पब्लिक ने निशाने पर ले लिया पुलिस को

आशीष सोमानी की लाश घर के पिछले दरवाजे पर मिलते ही पब्लिक का गुस्सा दिल्ली पुलिस के खिलाफ फूट पड़ा. नाराज भीड़ ने पुलिस को घेर लिया. आशीष की लाश के साथ कई घंटे तक भीड़ ने सड़क जाम कर दी. काफी मशक्कत और पब्लिक की मान-मनुहार करके कृष्णा नगर थाना पुलिस आशीष की लाश को पंचनामा भरने के बाद पोस्टमॉर्टम के लिए सब्जी मंडी मोर्च्यूरी (पोस्टमॉर्टम हाउस) भिजवा पाई.

बिगड़े हालातों से चौकन्ने थे पोस्टमॉर्टम हाउस के डॉक्टर्स

आशीष सोमानी की लाश का पोस्टमॉर्टम उस वक्त सब्जी मंडी मोर्च्यूरी (सिविल हॉस्पिटल दिल्ली) के प्रमुख डॉ. के.एल. शर्मा ने खुद करने की योजना बनाई. बकौल डॉ. शर्मा- ‘आशीष सोमानी के अपहरण के बाद जिस ढीले तरीके से पुलिस पड़ताल चल रही थी...उसके बाद घर के पीछे बच्चे की लाश मिलने के बाद गुस्साई भीड़ के विरोध का आलम देखकर मुझे अंदाजा हो गया था कि मामला पेचीदा है. भीड़ गुस्से में है. मुझे अंदेशा था कि ऐसा न हो पहले से ही पुलिस से चिढ़ी (गुस्साई) बैठी भीड़ कहीं पोस्टमॉर्टम और पोस्टमॉर्टम एक्सपर्ट डॉक्टर्स को लेकर भी उग्र न हो उठे. लिहाजा मैने खुद ही आशीष सोमानी की लाश का पोस्टमॉर्टम करने की सोची और किया भी.’

पुरानी सब्जी मंडी स्थित पोस्टमॉर्टम हाउस, इसी में हुआ था आशीष सोमानी की लाश का पोस्टमॉर्टम

पुरानी सब्जी मंडी स्थित पोस्टमॉर्टम हाउस, इसी में हुआ था आशीष सोमानी की लाश का पोस्टमॉर्टम

पोस्टमॉर्टम एक्सपर्ट्स ने खोलीं पुलिस की आंखें

आशीष सोमानी का पोस्टमॉर्टम करने वाले फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट डॉ. के.एल. शर्मा के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम के दौरान पता चला कि, आशीष सोमानी ने दिन में चार बजे के आसपास जो खाना खाया था, वो उसके पेट में सेमी-डायजेस्टिड (आधा पचा हुआ) रुप में मौजूद था. सेमी-डायजेस्टिड खाने की पोजीशन पेट में तीन घंटे में बनती है और छह घंटे में भोजन पेट में पूरी तरह पच चुका होता है, जबकि अपहरण के बाद करीब 6-7 बजे के बीच फिरौती की ‘कॉल’ अपहरणकर्ता ने की थी. आशीष के अपहरण का वक्त जबकि शाम 5-6 बजे के बीच का बताया गया था.

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पोस्टमॉर्टम के दौरान सामने आई खाने की इस स्थिति ने साफ कर दिया कि आशीष सोमानी की हत्या अपहरण के दो-तीन घंटे के भीतर ही की जा चुकी थी. या फिर इस तथ्य को साइंटिफिक फैक्ट के नजरिए से ऐसे भी बोल/मान सकते हैं कि, आशीष की हत्या फिरौती की कॉल मतलब 7 बजे (शाम) किए जाने के आसपास हो चुकी थी.

परिचित है हत्यारा, गिरफ्तारी से पहले ही खुल गया था राज

पोस्टमॉर्टम के दौरान ही यह बात भी साबित हो गई कि अपहरण के बाद बच्चे को घर (घटनास्थल) के आसपास ही छिपा कर रखा गया होगा. इसीलिए हत्यारों/हत्यारे ने, रात में पुलिस और पब्लिक के घटनास्थल से हटते ही लाश को सुबह-सुबह बच्चे के घर के पिछले दरवाजे पर आसानी से लाकर फेंक दिया. कहीं दूर हत्या करके लाश को घर तक लाने का जोखिम अपराधी नहीं उठाएगा.

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आशीष सोमानी की लाश का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर के.एल. शर्मा के मुताबिक, इससे यह भी तय हो गया कि हत्यारा पीड़ित परिवार का करीबी-परिचित है. जो आशीष सोमानी के परिवार और पुलिस पर पूरी नजर रखे हुए है. डॉ. शर्मा के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम के दौरान आशीष सोमानी के मुंह और नाक पर टेप चिपका मिला. उसकी मौत दम घुटने से हुई थी.

पोस्टमॉर्टम के दौरान ही एक्सपर्ट्स को आशीष के हाथ की उंगलियों के नाखूनों में त्वचा और गोश्त (खाल और इंसान का मांस) भी फंसा मिला. इससे यह तय हो गया कि, मुंह-नाक पर कपड़ा चिपकाए जाते वक्त बच्चे ने जब विरोध किया, उसी वक्त आरोपी/आरोपियों में से किसी के चेहरे या सीने की खाल बच्चे की उंगलियों में फंसकर रह गयी होगी.

फॉरेंसिक साइंस की मदद से 'ब्लाइंड-मर्डर' खुलवाने के माहिर देश के मशहूर पोस्टमॉर्टम एक्सपर्ट डॉ. के.एल. शर्मा, जिनके नाम दर्ज है 25 हजार पोस्टमॉर्टम करने का रिकार्ड

फॉरेंसिक साइंस की मदद से 'ब्लाइंड-मर्डर' खुलवाने के माहिर देश के मशहूर पोस्टमॉर्टम एक्सपर्ट डॉ. के.एल. शर्मा, जिनके नाम दर्ज है 25 हजार पोस्टमॉर्टम करने का रिकार्ड

पोस्टमॉर्टम हाउस में ही ताड़ लिया पुलिस ने ‘मुलजिम’

पोस्टमॉर्टम के दौरान जैसे ही वहां मौजूद पुलिस को बच्चे की उंगलियों से किसी न किसी के जख्मी होने का इशारा हुआ. पोस्टमॉर्टम कर रहे डॉ. के. एल. शर्मा के इशारे पर पुलिस वाले पोस्टमॉर्टम हाउस परिसर में मौजूद भीड़ को देखने पहुंच गए. भीड़ में 25-26 साल के एक लड़के पर जाकर पुलिस की नजरें ठहर गयीं . उसने कमीज के सीने के बटन खोल रखे थे. उसके सीने पर नोंचे जाने के निशान मौजूद थे. नाखूनों के दो निशान चेहरे पर भी लगे हुए थे. पुलिस ने मगर इन सब इशारों का आभास संदिग्ध को नहीं होने दिया.

हत्यारे की गिरफ्तारी को ‘हत्यारा’ ही नारेबाजी में जुटा था

पता चला कि, बच्चे की लाश बरामद होने के बाद गुस्साई भीड़ के बीच वही संदिग्ध लड़का, जिसे पुलिस ने पोस्टमॉर्टम हाउस में ‘ताड़’ कर नजरों में ले लिया था. आशीष सोमानी की लाश मिलने के बाद गुस्साई भीड़ के साथ मिलकर दिल्ली पुलिस के खिलाफ सबसे ज्यादा नारेबाजी कर रहा था. गुस्साई भीड़ में बार-बार वही युवक पुलिस को बढ़-चढ़कर खरी-खोटी सुना रहा था.

दिल्ली पुलिस अफसरों को हत्यारे की जल्दी गिरफ्तारी न होने पर, अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहने की नसीहतें दे रहा था. यह अलग बात है कि, उसे यह नहीं पता था कि, वो दिल्ली पुलिस द्वारा पोस्टमॉर्टम हाउस पर ही ‘ताड़’ लिया गया है.

शमशान तक लाश के साथ ही रहा हत्यारा

माहौल चूंकि पुलिस के खिलाफ था. इसलिए पुलिस ने संदिग्ध को गिरफ्तार करके कोई नई मुसीबत सिर न लेने में ही भलाई समझी. पुलिस की इस समझदारी और चुप्पी का नतीजा यह निकला कि, पुलिस से बेफिक्र मुलजिम, मासूम आशीष सोमानी की लाश का अंतिम संस्कार कराने (ताकि उस पर पुलिस को शक न हो) शमशान घाट भी पहुंच गया. इतना ही नहीं वरन् अंतिम संस्कार के बाद वह मातम मनाने बच्चे के घर भी गया.

‘पड़ताल’ जिसने मुजरिम को ‘काल-कोठरी’ पहुंचाया

आशीष सोमानी के अपहरण और हत्या के बाद माहौल धीरे-धीरे शांत हुआ. फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट्स की तमाम रिपोर्ट्स पुलिस को हासिल हो गईं. रिपोर्टस में साबित हो चुका था कि, पोस्टमॉर्टम के दौरान आशीष सोमानी के हाथ की उंगलियों के नाखूनो में फंसी मिली खाल और मांस, संदिग्ध आरोपी के ही हैं, तो उसे दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

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आगे की पड़ताल में 26 साल के मुख्य आरोपी गुरुविंदर सिंह डोगरा पुत्र भगवान सिंह निवासी वेस्ट आजाद नगर, पूर्वी दिल्ली, ने पुलिस को बताया कि, लखपति बनने की उम्मीद में उसने अपने दोस्त अरुण कुमार सोमानी के भतीजे आशीष सोमानी का अपहरण किया था. उसका इरादा आशीष की हत्या का नहीं, सिर्फ फिरौती वसूलने का था. आशीष सोमानी के पिता कोयला व्यापारी और मालदार आसामी है. वो बेटे को छुड़ाने की एवज में लाखों रुपए दे सकते हैं.

पड़ोसी होने के नाते गुरुविंदर को उम्मीद थी कि, उस पर कोई शक नहीं करेगा. कृष्णा नगर थाना पुलिस फाइलों में दर्ज पड़ताली तथ्यों के मुताबिक, मुलजिम ने फिरौती के लिए टेलीफोन कॉल करने जाने के वक्त, बच्चे आशीष को घर के पास ही एक गोदाम में मुंह पर टेप लपेटकर बंद कर दिया था. इस उम्मीद के साथ कि, फिरौती की कॉल करने के बाद और आशीष के घर के आसपास का माहौल जानने के बाद लौटकर वो गोदाम में बंद आशीष को खोल देगा. जब वो वापिस लौटा, तब तक आशीष सोमानी की दर्दनाक मौत हो चुकी थी.

दिल्ली पुलिस के दस्तावेजों में दर्ज जानकारी के मुताबिक इस मामले में आरोपी गुरुविंदर सिंह को कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिश्नल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज जे.एम. मलिक की अदालत ने ‘उम्र-कैद’ और अर्थदंड की कड़ी सजा सुनाई.

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