S M L

एक्जिमा का इलाज अस्थमा के रोगियों को भी करेगा चंगा !

जो बच्चे एटॉपिक डरमेटाइटिस (एडी) से पीड़ित होते हैं, उनकी जिंदगी में अस्थमा होने का खतरा बढ़ जाता है

FP Staff Updated On: Jan 26, 2018 05:17 PM IST

0
एक्जिमा का इलाज अस्थमा के रोगियों को भी करेगा चंगा !

किसी बच्चे में एक्जिमा बीमारी का इलाज उस बच्चे में अस्थमा के प्रभावों को कम कर सकता है. बेल्जियम स्थित द फ्लंडर्स इंस्टीट्यूट फॉर बायोटेक्नोलॉजी के एक शोध में यह बात सामने आई है. रिसर्चरों ने एक्जिमा और अस्थमा के बीच संबंधों पर गौर किया है. सूजन संबंधी इन दोनों बीमारियों के उपचार को लेकर कई तरह के शोध चल रहे हैं. जो बच्चे एटॉपिक डरमेटाइटिस (एडी) से पीड़ित होते हैं, उनकी जिंदगी में अस्थमा होने का खतरा बढ़ जाता है. एडी एक प्रकार का एक्जिमा रोग है. एडी और अस्थमा के लिए घर के महीन धूलकण दोषी माने जाते हैं. क्योंकि इसी से सूजन बढ़ती है.

कैसे होता है एक्जिमा

वैज्ञानिक एक शोध में पहले भी बता चुके हैं कि त्वचा में एक खास प्रोटीन की कमी के कारण एक्जिमा या खाज होता है. एटोपिक एक्जिमा (चकत्ते वाली खुजली) अक्सर बच्चों में उनकी जिंदगी के पहले साल में पाई जाती है. यह उनके बड़े होने पर भी बनी रहती है. इसके खराब प्रभाव के रूप में नींद से जुड़ी परेशानियां सामने आते हैं.

शोधों में बताया गया है कि प्रोटीन फिलाग्रीन के प्रभाव से त्वचा के दूसरे प्रोटीनों व उसके काम करने की क्षमता पर असर पड़ता है, नतीजतन खाज हो जाती है. इंग्लैंड के न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के स्किन स्पेशलिस्ट प्रोफेसर निक रेनॉल्डस की मानें तो हमें पहली बार पता चला है कि फिलाग्रीन प्रोटीन टूटने के कारण दूसरे प्रोटीन भी प्रभावित होते हैं, जो अंतत: एक्जिमा को जन्म देता है. उन्होंने बताया कि इस रिसर्च से फिलाग्रीन प्रोटीन की कमी की अहमियत का पता चलता है, जिससे त्वचा के कार्यो में रुकावट आ सकती है और कोई एक्जिमा से पीड़ित हो सकता है.

धूलकण से अस्थमा

एक्जिमा और अस्थमा पर शोध को लेकर द फ्लंडर्स इंस्टीट्यूट फॉर बायोटेक्नोलॉजी के कई डॉक्टरों की एक टीम लगी है. इन डॉक्टरों में एक डॉ. डेकर्स ने कहा, जैसा कि हमारा अंदाजा था, धूलकण से त्वचा की सूजन बढ़ती है जो सांस की नली में सूजन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है. डॉक्टरों की इस टीम को पता चला कि घर के बारीक धूलकण फेंफड़ों पर सीधा असर डालते हैं. जबकि यह जरूरी नहीं कि इसका असर पहले ही त्वचा के सूजन के रूप में दिखे.

इस हालिया शोध ने एडी की गंभीरता को गहराई से समझने मदद की है. शोध टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना था कि क्या त्वचा सूजन में राहत मिलने से अस्थमा पर कोई असर पड़ता है? टीम ने इस शोध में दो एंटी-इनफ्लामेटरी कंपाउंड-कोर्टिकोस्टेरॉयड और पीपीएआर एगोनिस्ट को मिक्स किया और इसे चूहे पर आजमाया. रिजल्ट में पता चला कि मिलाई गई दवा से एडी की शिकायत और बढ़ गई जबकि फेंफड़े को एलर्जिक अस्थमा से कोई राहत नहीं मिला. हालांकि इस उपचार ने अस्थमा की परेशानी को कम किया क्योंकि इसने फेंफड़े के एक खास इम्युन रेसपोंस को रोक दिया था. इस लिहाज से यह उपचार त्वचा के सूजन और एटॉपिक डर्मेटाइटिस को ठीक करने में अच्छा रोल निभा सकता है.

अस्थमा भी है खतरनाक

अस्थमा के रोगियों को सांस लेने में काफी परेशानी होती है. इसके लक्षणों की बात करें तो कफ आना, घरघराहट, सीने में जकड़न, सांस लेने में परेशानी और खांसी जैसी समस्‍याएं सामने आती हैं. अस्थमा से पीड़िता लोगों की सांस की नली सिकुड़ जाती है. अस्थमा ऐसी बीमारी है जिसमें फेफड़ों में सूजन भी आ जाती है. यह बीमारी किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है. अगर आपको अक्‍सर खांसी या जुकाम रहता है तो ये अस्‍थमा का लक्षण हो सकता है. इसके अलावा अगर आपको सीने में जकड़न, नाक बंद या फिर सीने में दर्द की शिकायत है, तो भी आप अस्‍थमा से पीड़ित हो सकते हैं.

(इनपुट एजेंसियों से)

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Test Ride: Royal Enfield की दमदार Thunderbird 500X

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi