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27 दिसंबर: इतिहास का वो दिन जब पहली बार गाया गया था देश का राष्ट्रगान

राष्ट्रगान को सबसे पहले 1905 में बंगाली भाषा में लिखा गया था जिसका आबिद अली ने हिंदू और उर्दू में अनुवाद किया

Updated On: Dec 27, 2018 08:19 AM IST

FP Staff

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27 दिसंबर: इतिहास का वो दिन जब पहली बार गाया गया था देश का राष्ट्रगान

राष्ट्रगान किसी भी देश की सबसे बड़ी पहचान होता है. इसी के जरिए देश की संस्कृति की झलक मिलती है. भारतीय इतिहास में आज यानी 27 दिसंबर का दिन इसीलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पूरा देश अपने राष्ट्रगान से परिचित हुआ था. आज ही के दिन 'जन गण मन' पहली बार गाया गया था.

भारत के राष्ट्रगान के बारे में दिलचस्प यह है कि इसे सबसे पहले 1905 में बंगाली भाषा में लिखा गया था जिसके हिंदी संस्करण को संविधान सभा द्वारा 24 जनवरी 1950 को स्वीकार किया गया. राष्ट्रगान का बंगाली से हिंदू और उर्दू में अनुवाद करने का काम आबिद अली ने किया था.

वो 27 दिसंबर 1911 का दिन था जब कलकत्ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन था. इसी मौके पर पहली बार गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने राष्ट्रगान गाया. उस दौरान यह खबर मीडिया में कुछ इस तरह छपी थी..अमृत बाजार पत्रिका में कहा गया था कि कांग्रेस के जलसे में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित एक प्रार्थना से शुरुआत की गई. वहीं बंगाली अखबार में कहा गया कि अधिवेशन की शुरुआत गुरुदेव द्वारा रचित देशभक्ति गीत से हुई.

अधिवेशन में अंग्रेज सम्राट जॉर्ज पंचम अपनी पत्नी के साथ भारत आए हुए थे. उन्होंने वायसरॉय लॉर्ड हार्डिंग्स के कहने पर बंगाल के विभाजन को निरस्त कर दिया था और उड़ीसा को अलग राज्य का दर्जा दे दिया था. इसीलिए कांग्रेस के अधिवेशन में जॉर्ज पंचम की प्रशंसा में भी एक गाना गाया गया था.

रामभुज चौधरी ने रचा था जॉर्ज पंचम की तारीफ में गाना

जॉर्ज के आगमन पर गाना रामभुज चौधरी द्वारा रचा गया था. लेकिन उस दौरान चौधरी को ज्यादा लोग नहीं जानते थे तो मीडिया में छप गया कि गुरुदेव ने जॉर्ज की तारीफ में एक गाना गाया. इस घटना का जिक्र कई मीडिया रिपोर्ट में आता है.

लोगों का मानना था कि गुरुदेव ने जॉर्ज की तारीफ में 'जन गण मन' गाया लेकिन गुरुदेव ने 1912 में कहा था कि गाने में वर्णित 'भारत भाग्य विधाता' के केवल दो ही मतलब हो सकते हैं. एक देश की जनता और दूसरा सर्वशक्तिमान ईश्वर. बाद में 'जन गण मन अधिनायक जय हे' एक भजन के रूप में कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशनों की शुरुआत में गाया जाने लगा.

1917 में टैगोर ने इस राष्ट्रगान को एक धुन में पिरोया जो लोगों की जुबां पर चढ़ गया. राष्ट्रगान को पूरा गाने में 52 सेकेंड लगते हैं और इसमें 5 पद हैं.

शुरुआत में वदेंमातरम को राष्ट्रगान बनाने की योजना थी लेकिन बाद में उसे राष्ट्रगीत बनाया गया क्योंकि वंदे मातरम की शुरुआती चार लाइन ही देश को समर्पित हैं बाद की लाइने बंगाली भाषा में हैं और उनमें मां दुर्गा की स्तुति की गई.

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